'10 अक्टूबर को कॉकरोच...', सुप्रीम कोर्ट के जज के बयान पर क्या बोले सौरव दास
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कॉकरोच जनता पार्टी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रही है. वह मुंबई के बाद दिल्ली में प्रदर्शन के लिए तैयार है. इस बीच सीजेपी के नेता सौरव दास का बड़ा बयान आया है.
उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के जज उज्ज्वल भुइयां की प्रतिक्रिया पर रिएक्शन दिया है. सौरव दास ने रविवार (4 अक्टूबर) कहा है कि कॉकरोच 10 अक्टूबर को आ रहे हैं. सीजेपी दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रोटेस्ट करने वाली है.
सौरव दास ने एक्स पर लिखा, 'सुप्रीम कोर्ट के जज की तरफ से बड़ा बयान.
ज्ञानू ब्रो (ज्ञानेश कुमार) का बने रहना मुमकिन नहीं है. 10 अक्टूबर से कॉकरोच आ रहे हैं.' दरअसल सौरव दास ने सुप्रीम कोर्ट के जज उज्ज्वल भुइयां के बयान को रीपोस्ट करते हुए ज्ञानेश कुमार पर तंज कसा.
'बार एंड बेंच' के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस भुइयां ने कहा था, 'अगर किसी प्रक्रिया के कारण करोड़ों भारतीय नागरिक अपने वोट देने के अधिकार से वंचित हो जाते हैं तो ऐसी प्रक्रिया मूल रूप से मनमानी है.
इसे किसी भी तरह के तर्क से सही नहीं ठहराया जा सकता. कोई भी अथॉरिटी ऐसा नहीं कर सकती, कोई भी अदालत इसे मंजूरी नहीं दे सकती है.'
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन
गौरतलब है कि सीजेपी के साथ-साथ कांग्रेस और विपक्ष की दूसरी पार्टियां भी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन कर रही हैं. सीजेपी ने मुंबई में प्रदर्शन किया था.
वहीं शिवसेना ने भी रविवार को मार्च निकाला था.
दूसरी ओर भारतीय युवा कांग्रेस ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के लिए जंतर-मंतर को फिर से प्रदर्शन स्थल के रूप में बहाल करने की मांग करते हुए रविवार को दिल्ली में मशाल जुलूस निकाला.
अब सीजेपी 10 अक्टूबर को फिर से प्रोटेस्ट की तैयारी में है.
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📡 स्रोत: ABP Live
💡 पृष्ठभूमि (Background)
यह खबर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और दिल्ली में होने वाले प्रदर्शन के इर्द-गिर्द घूमती है। 10 अक्टूबर को होने वाली रैली पर सौरव दास ने सुप्रीम कोर्ट के जज उज्ज्वल भुइयां की प्रतिक्रिया के बाद रिएक्शन दिया। यह विषय इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह चुनावी प्रक्रियाओं और न्यायिक हस्तक्षेप के बीच तनाव को उजागर करता है, जो लोकतंत्र के मूलभूत सिद्धांतों को प्रभावित कर सकता है। आम जनता पर इसका असर यह हो सकता है कि चुनावी नियमों में बदलाव की मांग बढ़े, जिस