100 साल पुरानी समाधियों पर कब्जे का खेल, पटवारी की झूठी रिपोर्ट पर तहसीलदार की मुहर - सिवनी में प्रशासन की शर्मनाक चुप्पी, न्याय के लिए भटक रहा नाथ समाज!
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →सिवनी/केवलारी -मध्यप्रदेश में राजस्व विभाग का हाल देखना है तो सिवनी जिले की केवलारी तहसील में आ जाइए। यहां ग्राम खैरा पलारी में पटवारी की एक गलत रिपोर्ट के दम पर तहसीलदार ने ऐसा त्रुटिपूर्ण फैसला सुना दिया कि 100 साल पुरानी आस्था ही दांव पर लग गई।
मामला नाथ समाज की समाधि भूमि का है। पीड़िता रामकुमारी बाई ने खुद राजस्व मंत्री और जिला कलेक्टर सिवनी को लिखित शिकायत में गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि जहां उनके पूर्वजों की समाधियां हैं, जहां शंकर मढ़िया और त्रिशूल स्थापित है, जो सदियों से पूरे समाज की आस्था का केंद्र है, उसी पवित्र भूमि पर कुछ लोगों द्वारा अवैध कब्जा कर मकान निर्माण किया जा रहा है।
सबसे बड़ा सवाल - इस क्षेत्र में किसी को भी आवासीय भूमि का पट्टा नहीं मिला, तो इन परिवारों को पट्टा कैसे मिल गया? आरोप है कि नियम विरुद्ध तरीके से कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से उक्त भूमि पर पट्टा प्रदान किए गए।
परिजनों का दावा और भी सनसनीखेज है। उनके पास हल्का पटवारी की रिकॉर्डिंग है, जिसमें पटवारी ने खुद स्वीकार किया है कि उसने घटनास्थल से गलत प्रतिवेदन दिया है। इतना ही नहीं, इस मामले में न्यायालय में प्रकरण प्रस्तुत है और स्थगन आदेश भी प्राप्त है, इसके बावजूद दिन-दहाड़े निर्माण कार्य जारी है। धार्मिक स्थल और समाधियों को तोड़े जाने का खतरा मंडरा रहा है।
समाज की भावनाएं आहत हो रही हैं, परिजन कलेक्टर ऑफिस के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन प्रशासन के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही। नाथ संप्रदाय ने मांग की है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच हो, पटवारी की रिपोर्ट की समीक्षा हो, नियम विरुद्ध पट्टों को तत्काल निरस्त किया जाए और दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई हो।
सवाल सीधा है - क्या प्रशासन किसी बड़ी घटना का इंतजार कर रहा है? आखिर कब मिलेगा पीड़ित परिवार को न्याय?