'100 शतक के लिए कोहली के पास पर्याप्त मैच नहीं', पूर्व भारतीय कोच का बड़ा दावा
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विराट कोहली ने अब तक अपने अंतर्राष्ट्रीय करियर में 86 शतक लगा लिए हैं.
वह सबसे ज्यादा शतक लगाने की सूची में दूसरे पायदान पर हैं. भारत के पूर्व दिग्गज बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर 100 शतकों के साथ पहले नंबर पर हैं.
मौजूदा वक्त में सिर्फ किंग कोहली को ही सचिन का रिकॉर्ड तोड़ने वाले खिलाड़ी के रूप में देखा जा रहा है.
लेकिन कोहली भी अपने करियर के अंत पर पहुंच चुके हैं, जिसे देखते हुए भारत के पूर्व सहायक कोच अभिषेक नायर ने कहा कि कोहली के पास 100 शतकों के लिए पार्याप्त मैच नहीं है.
गौर करने वाली बात यह है कि कोहली भारत के लिए सिर्फ वनडे फॉर्मेट खेल रहे हैं.
टी20 से उन्होंने 2024 में और टेस्ट से 2025 में संन्यास लिया था. 2027 वनडे विश्व कप के बाद कोहली संभवत: वनडे से भी संन्यास लेकर अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह देंगे. ऐसे में वाकई उनके पास मैच तो कम बचे हैं.
सचिन के रिकॉर्ड की बराबरी यानी 100 शतक के लिए कोहली को 14 सेंचुरी लगानी हैं, जबिक रिकॉर्ड तोड़ने के लिए 15 शतक जड़ने होंगे.
कोहली 100 शतकों पर अभिषेक नायर
जियोस्टार पर बात करते हुए अभिषेक नायर ने कहा कि मुझे नहीं लगता कि वर्ल्ड कप तक उनके पास उस उपलब्धि तक पहुंचने के लिए पर्याप्त मैच है.
मैं चाहता हूं कि वह ऐसा करें, लेकिन आपको भी आगे बढ़ने के लिए काफी गेम खेलने होंगे.
हो सकता है कि वह वर्ल्ड कप के बाद भी खेलना जारी रखे, लेकिन मैं वर्ल्ड कप तक के समय के बारे में सोच रहा हूं. वर्ल्ड कप के बाद, उनकी प्रेरणा शायद वैसी न रहे.
अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या कोहली 100 अंतर्राष्ट्रीय शतकों का आंकड़ा छूने वाले दुनिया के दूसरे बल्लेबाज बन पाते हैं या नहीं. 2027 विश्व कप की शुरुआत 02 अक्टूबर से होगी.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, टूर्नामेंट से पहले टीम इंडिया 13 से 24 वनडे मुकाबले खेल सकती है. इसके अलावा विश्व कप में भी उनके पास मैच होंगे.
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📡 स्रोत: ABP Live Khel
💡 पृष्ठभूमि (Background)
विराट कोहली, विश्व के शीर्ष बल्लेबाज, 86 शतक लेकर 100 शतक के लक्ष्य के करीब हैं, जबकि सचिन तेंदुलकर के 100 शतक का रिकॉर्ड अभी भी अटूट है। यह विषय उनके करियर के अंतिम चरण में है, जहाँ मैचों की कमी उनके लक्ष्य को चुनौती देती है। यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह कोहली के रिकॉर्ड तोड़ने के प्रयासों और भारतीय क्रिकेट के भविष्य पर प्रकाश डालती है। आम जनता पर इसका असर मनोबल बढ़ाने के साथ-साथ युवा खिलाड़ियों को प्रेरित करने में है, जिससे भारतीय क्रिकेट में नई पीढ़ी के सपने और उम्मीदें जागृत हों।