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102 दिन बाद शिमला जिला परिषद को मिलेंगे अध्यक्ष-उपाध्यक्ष, वीरवार को चुनाव, दोनों दलों ने किए जीत के दावे

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 26 सितंबर 2026 👁️ 1 बार पढ़ा गया
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
102 दिन बाद शिमला जिला परिषद को मिलेंगे अध्यक्ष-उपाध्यक्ष, वीरवार को चुनाव, दोनों दलों ने किए जीत के दावे

अगस्त 10, शिमला (हिमाचल प्रदेश): जिला परिषद शिमला को 102 दिन बाद आखिरकार आज अध्यक्ष और उपाध्यक्ष मिलने वाले हैं। उपायुक्त अनुपम कश्यप की अध्यक्षता में सुबह 10:30 बजे बचत भवन में जिला परिषद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव करवाए जाएंगे। इसके लिए सभी सदस्यों को सूचित कर दिया गया है। सभी को चुनाव प्रक्रिया के लिए तय समय पर पहुंचने के लिए कहा गया है।

जिला प्रशासन ने बुधवार शाम चुनाव की सभी तैयारियां पूरी कर दी हैं। बचत भवन में चुनाव के लिए मतपेटियां भी रखी जा रही हैं। 31 मई और 1 जून को जारी हुए जिला परिषद चुनाव के नतीजों में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था। कुल 25 सदस्यों वाले जिला परिषद शिमला में बहुमत के लिए 13 सदस्यों का आंकड़ा छूने के लिए कांग्रेस और भाजपा को अब निर्दलीयों का सहारा है।

जिला परिषद चुनाव जीतकर आए चार निर्दलीय वीरवार को होने वाले अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव में किंगमेकर की भूमिका निभाने वाले हैं। जिस पार्टी को भी इनका समर्थन मिलेगा, वह जीत हासिल कर लेगी। उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय की लॉटरी लगना लगभग तय है। अभी पलड़ा भाजपा का भारी है। पार्टी के पास 11 सदस्यों के साथ दो निर्दलीयों का समर्थन है।

हालांकि, वीरवार को होने वाले चुनाव में क्रॉस वोटिंग का भी अंदेशा है। ऐसे में कौन सी पार्टी जिला परिषद पर कब्जा जमाती है, इस पर वीरवार दोपहर तक स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। अभी दोनों ही पार्टियां अपनी-अपनी जीत के दावे कर रही हैं। जिला परिषद के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुनाव के लिए अगस्त के पहले हफ्ते में भी बैठक बुलाई गई थी।

उस समय भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों के सदस्यों ने बैठक से किनारा कर लिया था। अब यह जिला परिषद की दूसरी बैठक होगी। नियमानुसार इस बार 50 फीसदी यानी 13 सदस्य आने पर भी कोरम पूरा माना जाएगा। इसके आधार पर चुनाव भी करवा दिए जाएंगे। चुनाव टाले जाने से जुड़ा मामला प्रदेश हाईकोर्ट में भी विचाराधीन है।

कोर्ट के आदेश पर ही वीरवार को चुनाव करवाए जा रहे हैं। भाजपा ने भी अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव टाले जाने को लेकर सवाल उठाए थे।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।