15 से अधिक देशों के प्रतिनिधि पहुंचे रांची, राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने भारतीय ज्ञान परंपरा से कराया अवगत
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Short Headline: 15 से अधिक देशों के प्रतिनिधि पहुंचे रांची, राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने भारतीय ज्ञान परंपरा से कराया अवगत
Synopsis: 15 से अधिक देशों के प्रतिनिधि पहुंचे रांची, राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने भारतीय ज्ञान परंपरा से कराया अवगत, नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका, थाइलैंड समेत कई देशों के प्रतिनिधि शामिल।
Category: Government , Planning , Education , International Relations , Youth , Student
Deadline : 22 SEPTEMBER, RANCHI
22 सितंबर, रांची: राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने रांची स्थित लोक भवन में भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद के अंतर्गत भारत में उच्च शिक्षा एवं शोध करने आए विभिन्न देशों के विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों के साथ संवाद किया। इस दौरान उन्होंने हुए कहा कि भारत को प्राचीन काल से ही ज्ञान एवं शिक्षा की भूमि के रूप में जाना जाता रहा है। तक्षशिला, नालंदा एवं विक्रमशिला जैसे प्रसिद्ध शिक्षा केंद्रों में विश्व के विभिन्न क्षेत्रों से विद्यार्थी ज्ञान प्राप्त करने के लिए आते थे। ज्ञान एवं विचारों के आदान-प्रदान की यह समृद्ध परंपरा आज भी हमें प्रेरित करती है।
राज्यपाल ने कहा कि श्रीलंका, बांग्लादेश, नेपाल, इराक एवं अफ्रीकी तथा मध्य-पूर्व के देशों सहित विभिन्न देशों के विद्यार्थियों का भारत में अध्ययन एवं शोध करना भारत और उनके संबंधित देशों के बीच मजबूत शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक संबंधों को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि भारत “वसुधैव कुटुम्बकम्” के शाश्वत सिद्धांत में विश्वास करता है। ज्ञान एवं संवाद देशों के बीच सेतु का निर्माण करते हैं और लोगों को एक-दूसरे के करीब लाते हैं। भगवान बुद्ध एवं भगवान महावीर की धरती भारत ने विश्व को शांति, करुणा, अहिंसा एवं सद्भाव का संदेश दिया है। आज की दुनिया में इन मूल्यों की प्रासंगिकता और भी बढ़ गई है।
राज्यपाल ने कहा कि आज के समय में अंतरराष्ट्रीय सहयोग का महत्व निरंतर बढ़ रहा है। माननीय प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में भारत ‘विकसित भारत’ के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। भारत की अध्यक्षता में नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह वैश्विक समुदाय के साथ भारत की सक्रिय सहभागिता को दर्शाता है।
राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने झारखण्ड की चर्चा करते हुए कहा कि राज्य अपनी समृद्ध जनजातीय एवं सांस्कृतिक विरासत, प्राकृतिक सौंदर्य, वन, झरनों, पहाड़ियों एवं प्रचुर खनिज संपदा के लिए जाना जाता है। यह धरती धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा एवं अनेक स्वतंत्रता सेनानियों की भूमि है, जिन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में अपना अहम एवं उल्लेखनीय योगदान दिया। उन्होंने विद्यार्थियों से झारखण्ड में अपने प्रवास के दौरान राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक विरासत को समझने एवं अनुभव करने हेतु कहा।
राज्यपाल ने विद्यार्थियों से कहा कि वे भारत में अपने अध्ययन एवं शोध के साथ-साथ देश के इतिहास, विविध संस्कृति, परंपराओं एवं लोकतांत्रिक मूल्यों को भी समझने का प्रयास करें। उन्होंने कहा कि ये अनुभव उनकी शैक्षणिक यात्रा को समृद्ध करने के साथ-साथ जीवनभर मूल्यवान स्मृतियों के रूप में उनके साथ रहेंगे।
राज्यपाल ने कहा कि भारत में अध्ययन एवं शोध कर रहे ये विद्यार्थी केवल अपने-अपने देशों के विद्यार्थी नहीं हैं, बल्कि भारत और उनके संबंधित देशों के बीच मित्रता एवं आपसी समझ के सेतु भी हैं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि विद्यार्थी भारत की सुखद स्मृतियाँ अपने साथ लेकर अपने देश लौटेंगे तथा अपने परिवार, मित्रों एवं देशवासियों के साथ भारत में अपने अनुभव साझा करेंगे।
कार्यक्रम में नेपाल के 15, बांग्लादेश के 1, श्रीलंका के 1, थाईलैंड के 1, इराक के 3, सीरिया के 3, यमन के 2, कंबोडिया के 1, सूडान के 3, तंजानिया के 4, इथियोपिया के 3, युगांडा के 1, सोमालिया के 1, मलावी के 1, घाना के 1, लाइबेरिया के 1 समेत विभिन्न देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
💡 पृष्ठभूमि (Background)
15 से अधिक देशों के प्रतिनिधि रांची आए और राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने भारतीय ज्ञान परंपरा से परिचित कराया। यह कार्यक्रम बहुराष्ट्रीय सांस्कृतिक आदान-प्रदान का हिस्सा है, जिसमें नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका और थाइलैंड के अधिकारी शामिल थे। यह विषय भारतीय संस्कृति और ज्ञान की वैश्विक मान्यता को दर्शाता है। खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भारत के सॉफ्ट पावर को बढ़ाता है और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को प्रोत्साहित करता है। आम जनता पर इसका असर सकारात्मक है: नागरिकों को विदेशी मित्रों के साथ संवाद के अवसर मिल
🎙️ वॉयस ऑफ क्रांति का मत
रांची में 15 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों का आगमन भारतीय ज्ञान परंपरा के महत्व को दर्शाता है। यह हमें याद दिलाता है कि सांस्कृतिक संवाद से शांति और समृद्धि बढ़ती है। जब भी समाज में मतभेद हों, संवाद, सहानुभूति और पारस्परिक सम्मान से समाधान खोजें। इस अवसर पर हम सभी को एकजुट होकर वैश्विक सहिष्णुता और सहयोग की दिशा में कदम बढ़ाने का आह्वान करते हैं।