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20 साल की दोस्ती जमीन के कारण हत्या तक पहुंची:मोतिहारी में सरकारी टीचर का मर्डर; पत्नी बोली-जिस परिवार से थे गहरे रिश्ते, उसी ने मेरे पति को मार डाल

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 20 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
20 साल की दोस्ती जमीन के कारण हत्या तक पहुंची:मोतिहारी में सरकारी टीचर का मर्डर; पत्नी बोली-जिस परिवार से थे गहरे रिश्ते, उसी ने मेरे पति को मार डाल

मेरे ससुर और आरोपी के पिता के बीच गहरी दोस्ती थी। दोनों बचपन से साथ रहे। इसी वजह से आरोपी और मेरे पति के बीच भी करीब 20 साल तक दोस्ती रही, लेकिन कुछ टुकड़े जमीन के विवाद ने इस रिश्ते को दुश्मनी में बदल दिया। जिस परिवार के साथ कभी हमारे इतने करीबी रिश्ते थे, वही आज हमारे पति की हत्या का आरोपी है।

जमीन के विवाद ने हमारे परिवार को ऐसा तोड़ा कि हमने अपना पति खो दिया। ये कहना है मृतक टीचर श्मशाद आलम (45) की पत्नी रिजवाना परवीन का, जो अपने पति के हत्यारे के लिए मौत की सजा की मांग कर रही है। दरअसल, मोतिहारी में एक सरकारी टीचर की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। इस मामले में परिवार वालों ने पूर्व प्रमुख जफीर आजाद चमन, मुखिया पति फैजुरहमान और मुखिया तान्या प्रवीण समेत 9 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करवाई गई है।

पहले घटना से जुड़ी तस्वीरें देखिए अब सिलसिलेवार तरीके से पढ़िए पूरी खबर...

मोतिहारी के बंजरिया थाना क्षेत्र का सिसवा सहवाद टोला। यहां एक सरकारी शिक्षक की हत्या ने दो परिवारों के बीच रिश्तों की ऐसी कहानी सामने ला दी है, जिसकी शुरुआत दोस्ती से हुई थी और अंत दुश्मनी और हत्या के आरोप तक पहुंच गया। दैनिक भास्कर की टीम इस दोस्ती की जानकारी लेने सिसवा गांव पहुंचा।

वहां उन्होंने कुछ ग्रामीणों और मृतक की पत्नी से बात कर पुरानी कहानी के बारे में जाना। सबसे पहले हमारी टीम की मुलाकात कुछ ग्रामीणों से हुई। उन्होंने माइक पर बोलने से मना करते हुए बताया, श्मशाद आलम के पिता और आरोपी पक्ष के पिता की गहरी दोस्ती थी। दोनों अक्सर साथ घूमते थे। बचपन से साथ रहने के कारण गांव में उनकी दोस्ती की मिसाल दी जाती थी।

दोनों परिवारों के बीच आना-जाना था और मुश्किल वक्त में एक-दूसरे की मदद भी करते थे। परिवार के मुताबिक, जब चमन के पिता को कैंसर हुआ था, तब श्मशाद के पिता मो.रफीस ने इलाज के लिए करीब 30 हजार रुपए देकर उन्हें मुंबई भेजने में मदद की थी। उनकी मौत के समय भी पटना ले जाने में करीब 30 हजार रुपए खर्च किए गए थे।

यानी जिस परिवार के साथ कभी इतने करीबी रिश्ते थे, कुछ सालों बाद उसी परिवार के लोगों पर श्मशाद की हत्या का आरोप लगने लगा। गांव वालों का कहना है कि इसकी शुरुआत जमीन विवाद से हुई। विवाद धीरे-धीरे इतना बढ़ा कि शिकायतों, धमकियों और मारपीट के आरोपों तक पहुंच गया। अब श्मशाद की हत्या के बाद परिवार का आरोप है कि लंबे समय से चल रही इसी दुश्मनी ने आखिर उनकी जान ले ली।

पुलिस ने मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के लिए 30 हजार रुपए का इनाम घोषित किया गया है। हालांकि, हत्या के पीछे की पूरी वजह और किस-किस की भूमिका थी, यह पुलिस जांच में स्पष्ट होना बाकी है। दोस्ती कैसे दुश्मनी में बदली?

श्मशाद की पत्नी रिजवाना के मुताबिक, इस दुश्मनी की शुरुआत साल 2005 से हुई थी। उस दौरान स्कूल और दूसरे मामलों को लेकर चमन से मेरे पति का विवाद शुरू हुआ था। इसके बाद जमीन को लेकर भी विवाद बढ़ता चला गया। आरोपी पक्ष के लोग जमीन में हिस्सा मांगते थे और कहते थे कि एक जगह जमीन दे दीजिए। इसी विवाद को लेकर मेरे पति ने कई बार अधिकारियों के पास आवेदन देकर शिकायत की थी।

साल 2016 में मेरे पति मुखिया बने। इसके बाद भी जमीन और दूसरे मामलों को लेकर विवाद जारी रहा। एक बार होटल के रजिस्टर पर साइन करने के लिए भी मेरे पति पर दबाव बनाया गया था। पहले उनकी बहन से साइन करने को कहा गया, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। इसके बाद मेरे पति से साइन कराया गया। उस दौरान चमन और गुड्डू को फोन किया गया था।

मेरे पति ने बाद में बताया था कि चमन ने अपने भाई गुड्डू से कहा था कि अगर बात नहीं मानोगे तो छह गोलियां सीने में उतार देंगे। डर की वजह से मेरे पति को आखिरकार साइन करना पड़ा था। 'मेरे मामा को दी थी मारने की धमकी' 3 जून 2025 को जमीन से जेसीबी के जरिए मिट्टी काटे जाने की जानकारी मिली। इसके बाद वहां पहुंचकर घटना का वीडियो बनाया गया।

वीडियो और लिखित आवेदन एसपी, थाना समेत संबंधित अधिकारियों को भेजे गए। उस समय भी हमें धमकी दी गई थी कि करीब पांच हजार लोगों को बुलाकर मार देंगे। उस दिन मेरे मामा वहां अकेले थे। उनसे कहा गया कि यहां से चले जाओ, नहीं तो मारकर भगा देंगे। यह भी धमकी दी गई कि बाद में तुम्हारा घर तुड़वा देंगे।

डर के कारण मेरे मामा वहां से अपने घर चले गए। उन्होंने मौके पर हुई पूरी घटना का वीडियो भी बनाया था। इन घटनाओं के बाद हमने लगातार प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई। थाना से लेकर कलेक्टर तक अधिकारियों के पास गए और कई बार आवेदन दिए, लेकिन हमारी शिकायतों पर वैसी कार्रवाई नहीं हुई, जिसकी हमें उम्मीद थी।

आज मेरे पति की हत्या हो गई है और पूरा परिवार टूट गया है। अगर हमारी शिकायतों और लगातार मिल रही धमकियों पर समय रहते गंभीरता से कार्रवाई होती, तो शायद आज मेरे पति हमारे बीच होते। हमने बहुत पहले से अन्याय, जमीन विवाद और धमकियों की शिकायत की थी, लेकिन हमें न्याय नहीं मिला। अब हमारी मांग है कि मेरे पति की हत्या में शामिल सभी आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो और उन्हें कड़ी से कड़ी सजा मिले।

मेरे पति की जगह मुझे अनुकंपा के आधार पर नौकरी देने की बात हुई है, लेकिन हमारे बच्चे अभी बहुत छोटे हैं। पति के जाने के बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी अब मेरे ऊपर आ गई है। इस मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी को लेकर 30 हजार रुपए इनाम की घोषणा की है। जो भी आरोपी की जानकारी देगा, उसे ये पैसे मिलेंगे।

इसके अलावा पुलिस ने एक आरोपी को शुक्रवार को अरेस्ट कर लिया है। मामला बंजरिया थाना क्षेत्र के सिसवा सहवाद टोला का है। बता दें कि श्मशाद के 8 बच्चे हैं, 5 बेटियां और 3 बेटे...किसी को वो डॉक्टर बनाना चाहते थे, तो किसी को IITIAN और किसी को IAS...सबसे छोटी बेटी मात्र 7 साल की है, क्लास 1 में पढ़ती है।

उसे तो ये तक समझ नहीं आ रहा कि घर में क्या हो रहा है? ‘बेटा घर नहीं पहुंचा तो शाम 4:30 बजे थाने पहुंचे’ वहीं, इस मामले में मृतक के पिता मो.रफीस ने अपने बेटे की मौत का जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों को भी ठहराया है। उनका कहना है, हर दिन मेरा बेटा स्कूल से घर शाम 4 बजे तक आ जाता था। गुरुवार 17 सितंबर को जब श्मशाद शाम 4.30 बजे तक घर नहीं लौटा तो हमलोगों ने उसके नंबर पर फोन किया था।

पहले तो फोन लगा, लेकिन किसी ने उठाया नहीं। आधे घंटे बाद फोन लगना भी बंद हो गया। 5 बजे तक वो घर नहीं पहुंचा तो हमलोगों ने बंजरिया थाने में पहुंचकर घटना की जानकारी दी। मैंने पुलिस को बताया कि मेरा बेटा नहीं मिल रहा है। वो सुबह स्कूल गया था, घर लौटते समय लापता हो गया है। आपलोग उसकी तलाश कीजिए।

हालांकि, पुलिस ने मेरी बात को गंभीरता से नहीं लिया। उनलोगों ने मेरे बेटे की तलाश नहीं की। थानाध्यक्ष ने मुझसे कहा कि अगर आपके बेटे के लापता होने की बात झूठी निकली तो मैं आपके खिलाफ कार्रवाई करूंगा। मैं बार-बार थानाध्यक्ष को बेटे की तलाश के लिए गुहार लगा रहा था, लेकिन उनलोगों ने कोई कार्रवाई नहीं की।

अगर पुलिस समय पर कार्रवाई करती तो शायद मेरा बेटा आज जिंदा होता। ‘कुछ घंटे बाद थाना से फोन आया, सदर अस्पताल में है श्मशाद’ मो.रफीस के मुताबिक, थाने में शिकायत करने के करीब 3-4 घंटे बाद बंजरिया थाना से मुझे फोन आया। उन्होंने कहा, श्मशाद सदर अस्पताल में है। उन्होंने हमें मौत की सूचना नहीं दी।

जब तक हमलोग आनन-फानन में सदर अस्पताल पहुंचे, वहां देखा श्मशाद का शव पड़ा है। इस दौरान वहां पर कोई पुलिसकर्मी मौजूद नहीं था। मृतक के पिता ने कहा कि मिट्टी कटाई के विवाद को लेकर भी हमने पहले भी अधिकारियों के यहां शिकायत की थी। इसके बावजूद विवाद का समाधान नहीं हुआ और धमकियां मिलती रहीं।

पुराने विवाद के कारण ही श्मशाद को निशाना बनाया गया है। मेरा इकलौता बेटा था, मेरी उम्र 85 वर्ष है, बीमार रहते है, उसी के कमाए पैसे से ही घर चलता था, अब हमारा घर कौन चलाएगा?

📡 स्रोत: NewsData.io

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🎙️ वॉयस ऑफ क्रांति का मत

जमीन के विवाद से बंधे रिश्ते टूटते हैं, पर हिंसा से नहीं। जब मतभेद हों, संवाद, मध्यस्थता और कानूनी मार्ग अपनाएँ। परिवार की शांति और समाज का विकास तभी संभव है जब हम संघर्ष को शांतिपूर्वक सुलझाएँ। पीड़ित परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए, हम सभी को याद दिलाते हैं कि प्रेम और सहानुभूति से ही सच्ची जीत मिलती है।

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