20 साल के निचले स्तर पर गिरे हीरों के दाम, फिर भी क्यों सस्ते नहीं हो रहे डायमंड के गहने?
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हीरों कि कीमत में अब इतनी गिरावट आ गई है कि अब डायमंड रिंग और नेकलेस खरीदना बजट में रह सकता है. लेकिन जब ग्राहक दुकान पर पहुंचते है तब बिल देखकर तस्वीर कुछ अलग नजर आती है.
हीरों की थोक कीमतें 2021 के अपने उच्च स्तर से करीब 30-40 प्रतिशत नीचे गिर चुकी हैं.
बाजार में कमजोर मांग, बढ़ते स्टाक डायमंड कि बढ़ती उपलब्धता ने प्राकृतिक हीरों कि कीमतों के ऊपर दबाव बनाया है.
डि बीरस कि हीरा उद्योग की बढ़ी कंपनी भी इस आंकड़े को दिखाते है.
साल 2026 कि शुरुआत में कंपनी की औसत रफ डायमंड बिक्री कीमत सालाना आधार पर 32 प्रतिशित घटकर 105 डॅालर प्रति कैरेट रह गई.
वहीं दूसरी ओर उसका औसत रफ डायमंड प्राइस इंडेक्स भी 16 प्रतिशत नीचे आ गया.
फिर ज्वेलरी का बिल कम क्यों नहीं हुआ
इसका कारण केवल यह है कि ज्वेलरी कि कीमत केवल हीरे से तय नहीं की जाती.
किसी रंग या नेकलेस की कीमत में डायमंड के अलावा सोना या प्लेटिनम, डिजाइन ,मेकिंग और दूसरे रिटेल खर्च भी शामिल रहते हैं. भारत में सोने की ऊंची कीमत इस अंतर को और भी ज्यादा बढ़ा रही है.
वर्लड गोल्ड काउंसल के अनुसार अगस्त साल 2026 में सोने की कीमत 12 प्रतिशत बढ़कर 1,58,854 प्रति ग्राम हो गई थी.
सितंबर के महीने में इसमें कुछ गिरावट देखने को मिली लेकिन इससे कोई फर्क नहीं पड़ा.
यानी कि अगर ज्वेलरी में इस्तेमाल होने वाले डायमंड की कीमत घटती भी है, तो महंगे सोने और अन्य खर्चो के कारण पूरी ज्वेलरी कि कीमत उसी अनुपात में कम हो यह जरूरी नहीं हैं.
हर डायमंड की कीमत में एक जैसी गिरावट नहीं
डायमंड मार्केट में भी सभी पत्थरों की कीमत समान गति से नहीं बदली है.
बड़े और बेहतर क्वालिटी वाले प्राकृतिक हीरों की मांग मजबूत बनी हुई है,जबकि छोटे और कम क्वालिटी वाले डायमंड्स पर हीरों का दबाव ज्यादा है.
इसलिए किसी ग्राहक को मिलने वाला फायदा इस बात पर भी निर्भर करता है कि वह किस आकार, रंग, क्लैरिटी और ग्रेड का हीरा खरीद रहा है.
लेब- ग्रोन डायमंड ने बदला पू
📡 स्रोत: ABP Live Vyapar