राजनीति

2014 से 2026: बुनियादी चुनौतियों से अहम मुद्दों तक, PM मोदी के भाषण में 'देश पहले'

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 16 अगस्त 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
2014 से 2026: बुनियादी चुनौतियों से अहम मुद्दों तक, PM मोदी के भाषण में 'देश पहले'

PM Narendra Modi Freedom Day Speeches: साल 2014 में पहली बार लाल किले के प्राचीर से देश को बतौर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संबोधित किया था. तब से अबतक 13वीं बार प्रधानमंत्री मोदी स्वंतत्रता दिवस के मौके पर राष्ट्र को संबोधित कर चुके हैं. इतने सालों में देश में मूल भूत सुविधाओं के साथ-साथ तकनीक की दुनिया में काफी तब्दीली आई है. इतने सालों में प्रधानमंत्री के भाषण में भी कई बदलाव आए हैं. बात शौचालय के विकास से निकलकर सेमीकंडक्टर के विकास तक आ चुकी है.

मोदी सरकार के शुरुआती सालों में भाषण अक्सर ऐसी समस्याओं के बारे में होते थे, जो आज मामूली सी नजर आती है. शौचालय, बिजली, गरीबी, सड़कें, बैंक खाते, खाद की कमी ऐसे तमाम मुद्दे पहले के भाषणों में हुआ करते थे. तब देश में इस तरह की समस्याएं बेहद ही जटिल हुआ करती थी. उस समय जब पीएम मोदी इन मुद्दों पर बात करते थे, तो उनका लहजा बेहद ही गंभीर, जरूरी काम वाला होता था. चुनौती यह थी कि जो चीजें खराब थीं, उन्हें ठीक किया जाए. उन लोगों तक पहुंच बनाई जाए, जो बेहद ही पीछे छूट गए थे.

साल दर साल गुजरे, पीएम मोदी के भाषण की शब्दावली में भी तब्दीली आने लगी. बातचीत सुविधाओं की पहुंच से निकलकर आशा आकांक्षओं की ओर अग्रसर होने लगी. कमियों को दूर करने से लेकर समस्याओं को हल करने के ऐसे सिस्टम बनाने की ओर बढ़ चुकी हैं, जहां विकसित भारत के रास्ते की ओर बढ़ा जा सके.

शौचालय के इंतजाम से लेकर सेमीकंडक्टर के विकास की ओर बढ़ता भारत

साल 2014 के भाषण पर नजर डालें तो उनके मुद्दों में शौचालय जैसे मुद्दे थे. तब उन्होंने अपने भाषण में कहा था कि क्या हम अपनी माताओं और बहनों की गरीमा के लिए शौचालयों का इंतजाम नहीं कर सकते?

अब अगर

📡 स्रोत: ABP Live

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