225 किमी. ट्रेन का सफर कर झांसी पहुंचीं 'मां शेरावाली':झांसी स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर उतरीं तो भक्तों ने लगाए माता के जयकारे
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →झांसी में इस बार मां दुर्गा भी ट्रेन से सफर करके भक्तों के बीच पहुंचीं। 225 किलोमीटर दूर मध्य प्रदेश के सागर से शेरावाली माता की पांच फीट ऊंची प्रतिमा शनिवार को रात 1 बजे झांसी पहुंची। वीरांगना लक्ष्मीबाई रेलवे स्टेशन पर प्रतिमा उतरी तो उसे लेने पहुंचे युवाओं ने जयकारे लगाने शुरू कर दिए।
इसके बाद युवा मां की प्रतिमा को लेकर अपने मोहल्ले के पंडाल की ओर रवाना हो गए। पहले 2 तस्वीर देखिए… मौका शारदीय नवरात्र का है। झांसी में इस बार करीब 900 दुर्गा पंडाल सजाए जा रहे हैं। दुर्गा समितियां अपने-अपने अंदाज में मां की प्रतिमाएं स्थापित करने की तैयारियों में जुटी हैं। कोई थीम आधारित पंडाल तैयार करा रहा है तो कोई मां दुर्गा के नौ स्वरूपों को स्थापित करने की तैयारी कर रहा है।
लेकिन, तालपुरा के अंबेडकर नगर की नवयुवक दुर्गा समिति की प्रतिमा की कहानी कुछ अलग है। समिति के पदाधिकारियों ने मां की प्रतिमा को सड़क के बजाय ट्रेन से लाने का फैसला किया, ताकि रास्ते में उसे कोई नुकसान न पहुंचे। पिछले साल ही बना लिया था सागर से मूर्ति लाने का मन अंबेडकर नगर की नवयुवक दुर्गा समिति के अध्यक्ष विक्की मलोटिया ने बताया कि वह पिछले साल नवरात्र पर सागर गए थे।
वहां उन्होंने मां दुर्गा की कई प्रतिमाएं देखीं। सागर के कारीगरों की बनाई प्रतिमाएं उन्हें इतनी पसंद आईं कि तभी अगले नवरात्र में अपने मोहल्ले के पंडाल के लिए सागर से ही मूर्ति लाने का मन बना लिया। इस बार उन्होंने सागर के कारीगर को शेर पर सवार चार भुजाओं वाली मां दुर्गा की प्रतिमा बनाने का ऑर्डर दिया।
पांच फीट ऊंची प्रतिमा तैयार हो गई, लेकिन अब उसे सुरक्षित झांसी लाने की चुनौती थी। सड़क से आने में नुकसान का था डर विक्की मलोटिया ने बताया कि सागर से झांसी की दूरी करीब 225 किलोमीटर है। इतनी दूर सड़क मार्ग से पांच फीट ऊंची प्रतिमा लाने में उसके क्षतिग्रस्त होने का डर था। ऐसे में वह अपने चार दोस्तों के साथ सागर पहुंचे और रेलवे अधिकारियों से बातचीत की।
उन्होंने अधिकारियों से प्रतिमा को सुरक्षित झांसी तक पहुंचाने की व्यवस्था करने का अनुरोध किया। इसके बाद अधिकारियों ने खाली कोच में प्रतिमा रखवाकर झांसी तक पहुंचाने की व्यवस्था कर दी। शनिवार को जबलपुर-हजरत निजामुद्दीन एक्सप्रेस से प्रतिमा झांसी पहुंची। यहां पहले से मौजूद युवा मां की प्रतिमा को लेने के लिए स्टेशन पहुंचे थे।
प्रतिमा उतरते ही उन्होंने जयकारे लगाए और उसे पंडाल की ओर ले गए। बोले आयोजक- सागर की कारीगरी और श्रृंगार ने मन मोह लिया विक्की मलोटिया ने बताया कि सागर में बनी प्रतिमा की बनावट और श्रृंगार उन्हें काफी पसंद आया। प्रतिमा लेने से पहले जब वह सागर गए थे, तब कारीगर का काम देखकर ऐसा लगा, मानो उसने मूर्ति में जान डाल दी हो।
उन्होंने कहा कि झांसी में भी कारीगर सुंदर प्रतिमाएं बनाते हैं और उनका काम किसी से कम नहीं है। हालांकि, सागर की प्रतिमा की कारीगरी और श्रृंगार की गुणवत्ता उन्हें खास लगी। इसी वजह से इस बार अपने मोहल्ले के पंडाल के लिए सागर से मां दुर्गा की प्रतिमा मंगवाई।
📡 स्रोत: NewsData.io