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28 अगस्त को रक्षाबंधन और चंद्र ग्रहण:भारत में नहीं दिखेगा ग्रहण, इसलिए सूतक भी नहीं रहेगा, पूरे दिन किए जा सकेंगे रक्षाबंधन से जुड़े धर्म-कर्म

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 20 अगस्त 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
28 अगस्त को रक्षाबंधन और चंद्र ग्रहण:भारत में नहीं दिखेगा ग्रहण, इसलिए सूतक भी नहीं रहेगा, पूरे दिन किए जा सकेंगे रक्षाबंधन से जुड़े धर्म-कर्म

शुक्रवार, 28 अगस्त को रक्षाबंधन, श्रावणी पूर्णिमा यानी सावन महीने की अंतिम तिथि पूर्णिमा है। इसी दिन आंशिक चंद्र ग्रहण भी लगेगा। हालांकि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए देश में इस ग्रहण का सूतक काल मान्य नहीं है। रक्षाबंधन से जुड़े धर्म-कर्म पूरे दिन बिना किसी बाधा के किए जा सकेंगे।

रक्षाबंधन सावन पूर्णिमा पर जाता है। इस साल यह पूर्णिमा 27 अगस्त की सुबह करीब 9.08 बजे शुरू होगी और 28 अगस्त की सुबह 9.48 बजे तक रहेगी। 28 अगस्त का सूर्योदय सावन पूर्णिमा तिथि में ही होगा, इसी वजह से रक्षाबंधन 28 को मनाया जाएगा। एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि इस बार भद्रा सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो जाएगी।

इसलिए पूरे दिन भद्रा को लेकर भी कोई बाधा नहीं रहेगी। कब लगेगा चंद्र ग्रहण? 28 अगस्त को होने वाला ग्रहण आंशिक चंद्र ग्रहण है। भारतीय समय अनुसार यह ग्रहण सुबह लगभग 8.04 बजे के आसपास रहेगा। ग्रहण का पेनुम्ब्रल चरण भारतीय समयानुसार सुबह लगभग 6.53 बजे शुरू होगा और लगभग 11.22 बजे खत्म होगा।

यह ग्रहण यूरोप, पश्चिमी एशिया, अफ्रीका, उत्तरी अमेरिका, दक्षिणी अमेरिका, प्रशांत महासागर, अटलांटिक महासागर, हिंद महासागर, अंटार्कटिका के क्षेत्रों में दिखाई देगा। ग्रहण की खासियत यह होगी कि पृथ्वी की गहरी छाया चंद्रमा के लगभग 93 प्रतिशत हिस्सा पर पड़ेगी।

इसी कारण यह सामान्य आंशिक ग्रहण की तुलना में काफी गहरा दिखाई देगा और दुनिया के कई हिस्सों में चंद्रमा का बड़ा भाग लाल-नारंगी रंग का नजर आ सकता है। भारत में ग्रहण के समय चंद्रमा क्षितिज के नीचे होगा। इसलिए देश में इस ग्रहण को प्रत्यक्ष रूप से देख पाना संभव नहीं होगा।

चंद्र ग्रहण से नौ घंटे पहले सूतक शुरू हो जाता है, इस दौरान भोजन, पूजा-पाठ नहीं किए जाते हैं, मंदिरों के कपाट बंद रहते हैं, लेकिन भारत में ग्रहण नहीं दिखेगा, इसलिए हमारे यहां सूतक भी नहीं रहेगा। रक्षाबंधन में रक्षा सूत्र का क्या महत्व है? रक्षाबंधन के पीछे रक्षा सूत्र बांधने की मान्यता है।

बहन भाई की कलाई पर राखी यानी रक्षा सूत्र बांधकर उसके सुख, स्वास्थ्य और सुरक्षा की कामना करती है। भाई भी बहन की रक्षा करने का संकल्प लेता है। राखी बांधने की परंपरा के साथ रोली या कुमकुम से तिलक, चावल लगाना, आरती उतारना, मिठाई खिलाना और उपहार देना भी जुड़ा है। रक्षाबंधन को अलग-अलग पौराणिक कथाएं हैं।

एक प्रसिद्ध कथा भगवान श्रीकृष्ण और द्रौपदी से जुड़ी है। मान्यता है कि श्रीकृष्ण की उंगली से रक्त निकलने पर द्रौपदी ने अपने वस्त्र का एक टुकड़ा बांध दिया था। एक अन्य कथा में राजा बलि और माता लक्ष्मी का प्रसंग है।

वरदान की वजह से भगवान विष्णु राजा बलि के यहां रहने चले गए थे, तब माता लक्ष्मी ने राजा बलि को रक्षा सूत्र बांधकर भाई बनाया था। इसके बाद राजा बलि के यहां से विष्णु जी अपने धाम लौट आए थे।

📡 स्रोत: NewsData.io

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