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30 साल में हिमालय की 7,339 वर्ग किमी बर्फ पिघली:2010 के बाद सबसे तेज गिरावट; 63 हजार ग्लेशियरों का बदला चेहरा, मंदाकिनी-पिंडर भी तेजी से सिकुड़े

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 1 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
30 साल में हिमालय की 7,339 वर्ग किमी बर्फ पिघली:2010 के बाद सबसे तेज गिरावट; 63 हजार ग्लेशियरों का बदला चेहरा, मंदाकिनी-पिंडर भी तेजी से सिकुड़े

हिमालय के ग्लेशियर लगातार सिकुड़ रहे हैं। पिछले 3 दशकों में बर्फ का बड़ा हिस्सा गायब हो चुका है और अब इसका असर सिर्फ पहाड़ों तक सीमित नहीं है। ग्लेशियरों में हो रहे बदलाव आने वाले समय में पानी की उपलब्धता और हिमालयी इलाकों में आपदा के खतरे को भी प्रभावित कर सकते हैं।

इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट (ICIMOD) की 1990 से 2020 तक के आंकड़ों पर आधारित रिपोर्ट में सामने आया है कि पूरे हिंदू कुश हिमालय में ग्लेशियरों का क्षेत्रफल 11.6% घट गया। खास बात ये है कि 2010 के बाद ग्लेशियरों के सिकुड़ने की रफ्तार और तेज हुई है।

उत्तराखंड से जुड़े ऊपरी गंगा क्षेत्र में भी तीन दशक में ग्लेशियरों का क्षेत्रफल 18.6% कम हुआ है। हालांकि, कई इलाकों में ग्लेशियरों की संख्या बढ़ी है, लेकिन फिर भी बर्फ से ढका कुल क्षेत्रफल घट गया।

आखिर ग्लेशियरों की संख्या बढ़कर भी उनका आकार क्यों घट रहा है, किन ऊंचाइयों पर सबसे ज्यादा बर्फ पिघली और उत्तराखंड के ग्लेशियरों की तस्वीर कितनी चिंताजनक है?

जानने के लिए पढ़िए पूरी रिपोर्ट। 2010 के बाद बर्फ पिघलने की रफ्तार और तेज रिपोर्ट में सबसे चिंता वाली बात पिछले दशक की है। 1990 से 2000 के बीच ग्लेशियरों की संख्या में मामूली 0.3% बढ़ोतरी हुई, लेकिन इसका मतलब ग्लेशियरों का बढ़ना नहीं था। बड़े ग्लेशियरों के टूटकर छोटे ग्लेशियरों में बदलने से संख्या बढ़ी।

दूसरी तरफ क्षेत्रफल लगातार घटता रहा। 2000 से 2010 के बीच ग्लेशियरों की संख्या 0.8% घटी और क्षेत्रफल करीब 4% कम हुआ। 2010 से 2020 के दौरान संख्या में गिरावट बढ़कर 1.7% और क्षेत्रफल में कमी करीब 4.9% हो गई। पूरे 30 वर्षों में ग्लेशियरों की संख्या 2.2% और क्षेत्रफल 11.6% घटा।

संख्या बढ़ती दिखे तो भी खुश होने की वजह नहीं इस रिपोर्ट का एक बेहद दिलचस्प निष्कर्ष यह है कि छोटे ग्लेशियरों की संख्या कई जगह बढ़ी है, लेकिन उनका कुल क्षेत्रफल घट रहा है। इसकी वजह ग्लेशियरों का टुकड़ों में बंटना और सिकुड़ना है। 2020 में 0.5 वर्ग किमी से छोटे ग्लेशियरों की संख्या 47,452, यानी कुल ग्लेशियरों का 74% थी।

लेकिन ये इतने ज्यादा होने के बावजूद कुल ग्लेशियर क्षेत्रफल का सिर्फ 13% और अनुमानित बर्फ भंडार का 24% रखते हैं। इसके उलट 10 वर्ग किमी या उससे बड़े ग्लेशियर सिर्फ 702, यानी कुल संख्या का लगभग 1% हैं, लेकिन वे कुल

📡 स्रोत: Dainik Bhaskar

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