304 नगरीय निकायों में निर्वाचन प्रक्रिया पूरी, आदर्श आचार संहिता हटाई, उपाध्यक्ष के चुनाव सम्पन्न।
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जयपुर, 22 सितंबर। राज्य निर्वाचन आयोग ने प्रदेश के 309 में से 304 नगरीय निकायों में निर्वाचन प्रक्रिया पूरी होने के बाद मंगलवार को तत्काल प्रभाव से आदर्श आचार संहिता समाप्त कर दी है। आयोग के मुख्य निर्वाचन अधिकारी राजेश वर्मा ने इस संबंध में आदेश जारी किए हैं।
राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने मंगलवार को जयपुर में मीडिया से बातचीत में कहा कि प्रदेश में नगरीय निकाय चुनाव शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित तरीके से संपन्न हुए हैं। उन्होंने बताया कि जयपुर, जोधपुर और कोटा नगर निगम तथा सुकेत और खाटूश्याम नगर पालिका को छोड़कर शेष नगरीय निकायों से आचार संहिता हटा दी गई है।
जयपुर, जोधपुर और कोटा नगर निगम तथा सुकेत नगर पालिका में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के चुनाव 25 और 26 सितंबर को होंगे। वहीं खाटूश्याम नगर पालिका में भी निर्वाचन प्रक्रिया पूरी होने तक आदर्श आचार संहिता लागू रहेगी।
इस बीच 304 नगरीय निकायों में उपाध्यक्ष पदों के लिए चुनाव और मतदान की प्रक्रिया पूरी हुई। भरतपुर, अजमेर, अलवर, उदयपुर, भीलवाड़ा और बीकानेर नगर निगमों में उप महापौर पद के चुनाव में भाजपा के उम्मीदवार विजयी रहे। जबकि पाली नगर निगम में कांग्रेस उम्मीदवार के हाथ में उपमहापौर की सीट आईं।
बीकानेर में भाजपा के पंकज गहलोत, उदयपुर में दिनेश भट्ट, भीलवाड़ा में राधेश्याम सोमाणी, अलवर में अजय पूनियां, भरतपुर में अम्बिका सैनी और अजमेर में हेमंत सांखला निर्वाचित हुए। पाली में कांग्रेस के महबूब टी ने उप महापौर पद पर जीत दर्ज की।
जयपुर नगर निगम के महापौर पद के निर्वाचन के लिए नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद दो अभ्यर्थी अंतिम रूप से चुनाव मैदान में हैं। भाजपा के सुनील कोठारी और कांग्रेस की सुनीता गुप्ता मावर के बीच मुकाबला होगा। दोनों के बीच 25 सितंबर को सुबह 10 बजे से दोपहर दो बजे तक मतदान होगा।
💡 पृष्ठभूमि (Background)
यह खबर बताती है कि राजस्थान के 309 नगरीय निकायों में से 304 में चुनाव पूरी तरह से हो चुका है और साथ ही राज्य निर्वाचन आयोग ने तत्काल प्रभाव से ‘आदर्श आचार संहिता’ को समाप्त कर दिया है। यह कदम चुनावी प्रक्रियाओं को सरल और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है। इस निर्णय का महत्व इसलिए है क्योंकि यह चुनावी नियमों में बदलाव कर, उम्मीदवारों और पार्टी के लिए अनुपालन को आसान बना रहा है, जिससे चुनावी माहौल में विश्वास बढ़ेगा। जनता पर इसका असर यह होगा कि चुनाव में भाग लेने वाले नागरिकों के लिए नियम