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36 सेकेंड में रक्सौल का राहुल नेपाल में बहा:पिता ने कुश से पुतला बनाकर किया अंतिम संस्कार, पत्नी बोली-आखिरी बार चेहरा तक नहीं देख पाई

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 2 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
36 सेकेंड में रक्सौल का राहुल नेपाल में बहा:पिता ने कुश से पुतला बनाकर किया अंतिम संस्कार, पत्नी बोली-आखिरी बार चेहरा तक नहीं देख पाई

"हमरा राजा (पति) के नेपाल भेजनी रोजी-रोटी कमाए खातिर... अब ऊही नेपाल के पानी हमरा राजा के खा गईल। सात दिन हो गइल, बाकिर न ऊ घरे लौट के अइलन, न हम उनका के आखिरी बेर देख पइनी। ना उनका के छू पइनी, ना अपना आंख के सामने विदाई दे पइनी...

अब त बस उनका के याद करके रोए के अलावा कुछुओ नइखे बचल।” ये शब्द पूर्वी चंपारण के रक्सौल की रहने वाली सिया (बदला हुआ नाम) के हैं। सात दिन पहले नेपाल की त्रासदी में उसका पति राहुल लापता हुआ था। तब से वह हर आहट पर दरवाजे की ओर देखती रही कि शायद राहुल लौट आया हो, लेकिन सात दिन बाद भी न राहुल लौटा, न उसकी बॉडी घर पहुंची।

आखिरकार 1 सितंबर मंगलवार की रात राहुल के पिता धर्म सिंह ने बेटे की बॉडी की जगह कुश से उसका प्रतीकात्मक शव बनाया और मुखाग्नि दे दी। एक पिता ने बेटे का चेहरा आखिरी बार देखे बिना ही अंतिम संस्कार कर दिया। रस्में पूरी हो गईं, लेकिन परिवार का दिल अब भी राहुल को मरा हुआ मानने को तैयार नहीं है।

दरअसल, रक्सौल प्रखंड की पंटोका पंचायत के भारतम्ही वार्ड-3 निवासी धर्म सिंह के 26 साल के बेटे राहुल कुमार सिंह 26 अगस्त को नेपाल के रसुवागढ़ी स्थित त्रिशूली क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ की चपेट में आए थे। राहुल करीब 6 महीने से नेपाल में एंडीज कंपनी के अंदर चल रहे 216 मेगावाट के प्रोजेक्ट में काम कर रहे थे।

उनकी ड्यूटी सुरंग के अंदर थी। राहुल से पत्नी की आखिरी बार कब और क्या बात हुई थी? पिता ने क्या सोचकर इतना बड़ा फैसला लिया? क्या अब भी घरवाले राहुल का इंतजार कर रहे हैं? चाचा ने अपनी आंखों के सामने हादसा देखा- इस दौरान क्या-क्या हुआ? पढ़िए इस रिपोर्ट में... पहले घटना से जुड़ी तस्वीरें देखिए...

चाचा बोले-36 सेकेंड में दो फ्लोर पानी में डूबा राहुल के चाचा विश्वंभर सिंह भी उसी कंपनी में काम करते हैं। उन्होंने हादसे का आंखों देखा हाल बताते हुए कहा, “उस समय मैं सुरंग के ऊपर की तरफ था।राहुल मेरे सामने नीचे की तरफ काम कर रहा था। अचानक इतनी तेजी से पानी आया कि महज 36 सेकेंड में पूरा पावर हाउस पानी से भर गया।

दो फ्लोर तक पानी पहुंच गया था।” विश्वंभर सिंह ने बताया, “राहुल नीचे एक नंबर एमआईबी के पास था। पानी के साथ मलबा आया। जिसकी वजह से डीटी फट गई और उससे राहुल को गंभीर चोट लग गई। चोट लगते ही उसने जोर से चिल्लाया, ये आवाज मैंने आखिरी बार उसकी सुनी थी। इसके बाद मैं बार-बार उसे आवाज लगा रहा था, लेकिन वो कुछ नहीं बोला।

चोट के कारण शायद वह बाहर नहीं निकल पाया और उसी मलबे में दब गया।” उनके मुताबिक, पानी जिस तेजी से सुरंग में घुसा, उससे किसी को संभलने तक का मौका नहीं मिला। पानी के साथ कंक्रीट और भारी मलबा भी अंदर पहुंचा। देखते ही देखते पावर हाउस का बड़ा हिस्सा पानी और मलबे में तब्दील हो गया।

सुरंग में 114 लोग थे, 113 किसी तरह निकले हादसे के वक्त प्रोजेक्ट में कुल 114 लोग काम कर रहे थे। बाढ़ का पानी तेजी से बढ़ते देख सभी लोग जान बचाने के लिए बाहर की ओर भागे। विश्वंभर सिंह के अनुसार, 114 में से 113 लोग किसी तरह बाहर निकलने में सफल रहे, लेकिन राहुल अंदर ही फंस गया।

घटना के बाद यह पता नहीं चल सका कि राहुल कहां है। बचाव दल को उसकी तलाश के लिए सुरंग के अंदर कई बार भेजा गया। विश्वंभर सिंह कहते हैं, “सुरंग के अंदर चार से पांच बार रेस्क्यू टीम गई और राहुल को खोजने की कोशिश की गई, लेकिन उसका शव बरामद नहीं हो पाया। अब सिर्फ राहुल ही लापता है।

हमने जो अपनी आंखों से देखा, उससे लगता है कि उसकी मौत हो चुकी है।” ‘हमलोग भी रेस्क्यू टीम के साथ राहुल को खोजने गए’ विश्वंभर ने बताया, बाढ़ का पानी अचानक इतनी तेजी से आया कि वहां मौजूद लोगों के पास बचने के लिए कुछ ही सेकेंड थे। वे लोग भागकर बाहर निकले।

इसके बाद उन्होंने रेस्क्यू टीम के साथ दोबारा सुरंग में जाने की कोशिश की, ताकि राहुल को खोजा जा सके। करीब दो दिन तक गेट के पास लगातार बचाव का प्रयास किया गया, लेकिन पानी के साथ भारी मात्रा में मलबा अंदर जमा हो गया था। इसी मलबे में राहुल के दबे होने की आशंका थी। मलबा काफी अंदर तक भरा था, इसलिए राहुल का शव ऊपर नहीं आ सका।

पिता ने कुश से बनाया बेटे का प्रतीकात्मक शरीर राहुल की तलाश में जब सात दिन बाद भी कोई सफलता नहीं मिली तो परिवार के सामने सबसे कठिन फैसला था। शव नहीं था, लेकिन बेटे के अंतिम संस्कार की रस्में पूरी करनी थीं। हिंदू परंपरा के अनुसार शव नहीं मिलने की स्थिति में कुश से प्रतीकात्मक शरीर बनाकर अंतिम संस्कार किया जा सकता है।

मंगलवार को पिता धर्म सिंह ने कुश से राहुल का प्रतीकात्मक शव तैयार किया। विधि-विधान के साथ अंतिम संस्कार किया और उसी प्रतीकात्मक शरीर को मुखाग्नि देकर बेटे को अंतिम विदाई दी। यह अंतिम विदाई अपने आप में बेहद दर्दनाक थी। न बेटे का शव था, न आखिरी बार चेहरा देखने का मौका और न ही पिता को अपने बेटे को कंधा देने का सुख।

दो साल पहले हुई थी शादी राहुल की शादी करीब दो साल पहले हुई थी। अभी उनको कोई संतान नहीं है। पति के लौटने की आस लगाए बैठी पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल है। घर में राहुल की तस्वीर और उसकी यादें हैं, लेकिन वह खुद नहीं है।

बिलखते हुए पत्नी ने कहा, “नेपाल के पानी हमरा राजा के खा गईल...” राहुल की पत्नी से आखिरी बार बात 26 अगस्त की सुबह हुई थी। जब वो काम पर निकला था, तो कहा था रात में घर आकर बात करेगा। पत्नी के ये शब्द सुनकर वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं।

राहुल के परिवार के लिए सबसे बड़ी त्रासदी यह है कि वे न तो बेटे को आखिरी बार देख पाए और न ही उसके शव को अंतिम विदाई दे सके। अंतिम संस्कार के बाद भी परिवार कहता है- शायद राहुल लौट आए मंगलवार को अंतिम संस्कार हो गया, लेकिन परिवार के अंदर राहुल के लौटने की उम्मीद पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।

परिजनों का कहना है कि जब तक उन्हें राहुल का शव नहीं मिलता, मन किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच पा रहा। नेपाल में आई भीषण बाढ़ के कई दिन बाद भी मलबे से शव मिलने का सिलसिला जारी है। कई शवों की स्थिति ऐसी है कि पहचान करना मुश्किल हो रहा है।

लापता लोगों के परिजन हर बरामद शव के साथ अपने अपनों की खबर मिलने की उम्मीद और डर के बीच जी रहे हैं। बता दें कि नेपाल में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ के बाद बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के कम से कम 15 लोग अब भी लापता हैं। इनमें से पांच लोग एक ही परिवार के हैं।

अधिकारियों के मुताबिक, नेपाल में अचानक आई बाढ़ के बाद से इन लोगों से संपर्क नहीं हो पाया है। ADM बोले- लिस्ट बनाकर उच्चाधिकारियों को भेजी गई एडीएम सह आपदा पदाधिकारी मुकेश कुमार सिन्हा ने बताया कि अब तक आठ लोगों के लापता होने की सूचना मिली है।

हालांकि, परिजनों की ओर से आधिकारिक आवेदन नहीं दिया गया है, फिर भी सभी लापता लोगों की सूची तैयार कर संबंधित अधिकारियों को भेज दी गई है। प्रशासन लगातार संपर्क में है। जैसे ही कोई सूचना मिलेगी, तत्काल परिजनों को दी जाएगी।

📡 स्रोत: NewsData.io

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