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44वीं वाहिनी एसएसबी नरकटियागंज में मनाया गया पुलिस स्मृति दिवस

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 21 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
44वीं वाहिनी एसएसबी नरकटियागंज में मनाया गया पुलिस स्मृति दिवस

पुलिस स्मृति दिवस का इतिहास 21 अक्टूबर 1959 की घटना से जुड़ा है। उस दिन लद्दाख के हॉट स्प्रिंग्स क्षेत्र में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की एक टुकड़ी पर चीनी सैनिकों ने घात लगाकर हमला किया था।

21 अक्टूबर , बेतिया (प•चम्पारण , बिहार) : भारत-नेपाल सीमा की सुरक्षा में तैनात सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) की 44वीं वाहिनी, नरकटियागंज के प्रांगण में बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 को पुलिस स्मृति दिवस मनाया गया। कमांडेंट बलवंत सिंह नेगी के नेतृत्व में वाहिनी के सभी बलकार्मिकों ने शहीद पुलिसकर्मियों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की तथा उनकी स्मृति में मौन धारण किया।

इस अवसर पर कमांडेंट ने पिछले एक वर्ष के दौरान शहीद हुए पुलिस बलों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के जवानों के नाम पढ़कर सुनाए। उन्होंने बताया कि पुलिस स्मृति दिवस प्रत्येक वर्ष 21 अक्टूबर को उन वीर जवानों के सम्मान में मनाया जाता है, जिन्होंने देश की सेवा और सुरक्षा करते हुए अपने प्राणों का बलिदान दिया।

पुलिस स्मृति दिवस का इतिहास 21 अक्टूबर 1959 की घटना से जुड़ा है। उस दिन लद्दाख के हॉट स्प्रिंग्स क्षेत्र में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की एक टुकड़ी पर चीनी सैनिकों ने घात लगाकर हमला किया था। इस हमले में 10 पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे। इनमें सात जवान सीआरपीएफ के और तीन अन्य राज्यों के पुलिस बलों से संबंधित थे। घटना के लगभग तीन सप्ताह बाद, 13 नवंबर 1959 को शहीद जवानों के पार्थिव शरीर भारत को सौंपे गए थे।

इस घटना के बाद जनवरी 1960 में आयोजित राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के पुलिस महानिरीक्षकों के वार्षिक सम्मेलन में निर्णय लिया गया कि प्रत्येक वर्ष 21 अक्टूबर को पुलिस स्मृति दिवस के रूप में मनाया जाएगा।

इस दिवस का उद्देश्य देश की सुरक्षा और सेवा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले पुलिसकर्मियों की वीरता, कर्तव्यनिष्ठा और समर्पण को याद करना तथा उनके प्रति सम्मान व्यक्त करना है। इस वर्ष पुलिस स्मृति दिवस की 67वीं वर्षगांठ मनाई जा रही है।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।