530 से अधिक दोषियों पर एफआईआर, 223 करोड़ रूपये की संचित निधि में वापसी
एसएफआईसी द्वारा वर्ष 2011 से अब तक के वित्तीय लेनदेन का नियमित डेटा विश्लेषण किया जा रहा है। इस प्रक्रिया में कुल 315 करोड़ रूपये की राशि को 'संदिग्ध श्रेणी' में चिन्हित कर जांच के अधीन रखा गया है।
पुरानी अवधि के आंकड़ों के विश्लेषण से अद्यतन हुई इस राशि पर त्वरित कार्रवाई करते हुए शासन द्वारा 61 करोड़ रूपये के प्रमाणित गबन की वसूली पूरी कर ली गई है। इसके साथ ही 162 करोड़ रूपये शासकीय बैंक खाते से सरकारी खजाने में जमा कराया गया है।
मामलों की गंभीरता को देखते हुए आयुक्त कोष एवं लेखा द्वारा पुलिस महानिदेशक से निवेदन किया गया था कि जांच में प्रमाणित गबन के प्रकरणों में पुलिस एफ.आई.आर. दर्ज करते समय भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की कठोर एवं सुसंगत धाराएं जोड़े।
इसके बाद पुलिस स्तर से आरोपियों के खिलाफ अत्यंत प्रभावी कार्रवाई संभव हो सकी है। वित्तीय प्रणालियों को पूरी तरह सुरक्षित बनाने के लिए बीते 3 वर्षों में कई निरोधात्मक उपाय लागू किए गए हैं।
मैन्युअल सिस्टम खत्म कर ई-जीपीएफ और ई-डीपीएफ के लिए महालेखाकार कार्यालय और पेंशन संचालनालय से ऑनलाइन अप्रूवल की इलेक्ट्रॉनिक व्यवस्था शुरू की गई है। इसके अलावा टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन, डिजिटल सिग्नेचर, वेतन भत्तों में कैपिंग सिस्टम, आधार आधारित भुगतान, रोम्स पोर्टल और आरबीआई के ई-कुबेर प्लेटफॉर्म को अनिवार्य किया गया है।