देश

69 हजार शिक्षक भर्ती पर सुप्रीम कोर्ट सख्त:राज्य से मांगी पूरी चयन सूची, 6 अक्टूबर को फिर सुनवाई

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 1 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
69 हजार शिक्षक भर्ती पर सुप्रीम कोर्ट सख्त:राज्य से मांगी पूरी चयन सूची, 6 अक्टूबर को फिर सुनवाई

69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती से जुड़े मामले की बुधवार को भी सुप्रीम कोर्ट में करीब साढ़े तीन घंटे सुनवाई हुई। जस्टिस एसवीएन भट्टी और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने राज्य सरकार से भर्ती की विस्तृत सूची तैयार कर कोर्ट में प्रस्तुत करने को कहा है। इसमें अभ्यर्थी का नाम, क्रमांक, कैटेगरी, ATRE में मिले अंक और क्वालिटी प्वाइंट शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं।

सुनवाई के दौरान जिला वरीयता, EWS आरक्षण, B.Ed-BTC विवाद, उत्तर कुंजी में एक अंक के लाभ और चयनित अभ्यर्थियों को सुरक्षित रखने समेत कई मुद्दों पर पक्षकारों ने अपनी दलीलें रखीं। मामले की अगली सुनवाई 6 अक्टूबर को होगी। जिला वरीयता पर बहस से कोर्ट ने रोका सुनवाई के दौरान अधिवक्ता पटवालिया जिला वरीयता के मुद्दे पर अपनी दलील रखना चाहते थे।

आरक्षित वर्ग की ओर से अधिवक्ता मनदीप कालरा ने इस पर आपत्ति जताई। पटवालिया ने कोर्ट को बताया कि वह आरक्षित वर्ग की ओर से ही पेश हो रहे हैं और जिला वरीयता पर अपना पक्ष रखना चाहते हैं। इस पर पीठ ने कहा कि जब उनका नंबर आएगा, तब वह अपनी बात रखें। इसके बाद जस्टिस एसवीएन भट्टी ने उन्हें उस समय बहस करने से रोक दिया।

EWS को लेकर कोर्ट ने कहा-लिस्ट दोबारा बनी तो शामिल करेंगे EWS कैटेगरी की ओर से पेश अधिवक्ता ने कहा कि यदि भर्ती की सूची दोबारा तैयार होती है तो EWS अभ्यर्थियों को भी उसमें शामिल किया जाए। इस पर पीठ ने कहा कि कोर्ट समझ रही है कि उस समय EWS को लाभ नहीं दिया गया था। यदि सूची दोबारा तैयार होती है और लखनऊ हाईकोर्ट का फैसला बरकरार रहता है, तो EWS को भी शामिल किया जाएगा।

EWS की ओर से राज्य सरकार द्वारा विरोध किए जाने की बात उठाई गई। इस पर पीठ ने कहा कि इस मुद्दे पर बाद में सुनवाई की जाएगी। सुनवाई के दौरान पीठ हुआ नाराज पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि वह सभी पक्षों को इस मामले में पूरा दिन सुन रही है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि यदि कोर्ट की दो लाइन नहीं सुनी जाएंगी तो यह नहीं चलेगा।

सुनवाई के दौरान जस्टिस एनवी अंजारिया ने टिप्पणी की कि कोर्ट की ओर से लिस्ट redraw करने की अनुमति दिए जाने के कारण ही यह पूरा विवाद शुरू हुआ, वरना इतना कुछ नहीं होता। चयनित पक्ष बोला-लिस्ट री-ड्रॉ हुई तो चयनित शिक्षक बाहर न हों चयनित अभ्यर्थियों की ओर से अधिवक्ता अमित पवन ने कहा कि यदि 69 हजार भर्ती की सूची redraw की जाती है तो पहले से चयनित शिक्षकों को भर्ती प्रक्रिया से बाहर नहीं किया जाना चाहिए।

उन्होंने 18 नवंबर 2020 के रामशरण मौर्य फैसले का हवाला देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने उस समय 69 हजार शिक्षक भर्ती के विज्ञापन में B.Ed को शामिल किए जाने को वैध माना था। उनका तर्क था कि B.Ed अभ्यर्थी भर्ती के लिए पात्र थे। अमित पवन ने NCTE के नोटिफिकेशन और रामशरण मौर्य फैसले का संदर्भ देते हुए कहा कि B.Ed-BTC मामले में सुप्रीम कोर्ट के देवेश शर्मा फैसले से पहले तक B.Ed अभ्यर्थियों की स्थिति वैध थी और उस समय न्यायालय पहुंचे अभ्यर्थियों के मामले को उसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

राज्य बोला-आंकड़ा बताने में समय लगेगा अमित पवन ने कोर्ट में कहा कि 69 हजार चयनित अभ्यर्थियों में करीब 40 हजार B.Ed धारक हैं। उन्होंने कहा कि यह संख्या आधे से अधिक है और कोर्ट राज्य सरकार से इसका आंकड़ा स्पष्ट करा सकती है। इस पर पीठ ने राज्य सरकार के AOR अंकित गोयल से संख्या पूछी। उन्होंने कहा कि इस समय सटीक आंकड़ा बताना संभव नहीं है और इसे उपलब्ध कराने में समय लगेगा।

हालांकि, उन्होंने संख्या लगभग इतनी ही होने की बात कही। आरक्षित वर्ग की ओर से पेश अधिवक्ता ने B.Ed अभ्यर्थियों की संख्या करीब 36 हजार बताई। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि राज्य के AOR को यदि व्हाट्सऐप मैसेज आ गया होता तो शायद वह अब तक सटीक आंकड़ा बता चुके होते। राज्य ने कहा-B.Ed कोई मुद्दा नहीं राज्य सरकार की ओर से AOR अंकित गोयल ने कहा कि 69 हजार शिक्षक भर्ती में B.Ed और BTC कोई मुद्दा नहीं है।

उनके अनुसार लखनऊ हाईकोर्ट की डबल बेंच के सामने भी B.Ed का मुद्दा नहीं था और न ही उसे इस मामले में टैग या डिस्कस किया गया था। अमित पवन ने भी कहा कि लखनऊ हाईकोर्ट की डबल बेंच में B.Ed का मुद्दा नहीं था। उन्होंने कहा कि देवेश शर्मा का सुप्रीम कोर्ट का आदेश इस भर्ती पर प्रभावी नहीं होता और इस भर्ती में रामशरण मौर्य का फैसला लागू होता है।

इस पर पीठ ने कहा कि कानून के हिसाब से जो सही होगा, वही किया जाएगा। कोर्ट ने राज्य से मांगी भर्ती की मूल सूची सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा कि 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती की मूल चयन सूची तो बनाई गई होगी। कोर्ट ने राज्य से उस सूची के कुछ पेज उपलब्ध कराने को कहा। पीठ ने कहा कि सूची के आधार पर यह देखा जाएगा कि ATRE में किस अभ्यर्थी ने कितने प्रतिशत अंक हासिल किए हैं।

कोर्ट यह भी देखना चाहती है कि एक हजार अभ्यर्थियों में कितने ऐसे हैं जिन्होंने ATRE में 65 प्रतिशत से कम अंक हासिल किए हैं। इस पर राज्य सरकार के नोडल काउंसलर अंकित गोयल ने बताया कि केवल सहायक अध्यापक लिखित परीक्षा में 60 या 65 प्रतिशत अंक हासिल करने से चयन नहीं होता। चयन में एकेडमिक के 60 प्रतिशत अंक भी शामिल होते हैं।

कोर्ट ने मांगी चार अहम जानकारियों वाली सूची अंकित गोयल ने पूछा कि क्या केवल 64 और 65 प्रतिशत अंक हासिल करने वाले अभ्यर्थियों का विवरण देना है। इस पर कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसा नहीं है। सहायक अध्यापक लिखित परीक्षा में 60 और 65 प्रतिशत अंक वाली संबंधित रेंज के सभी अभ्यर्थियों का विवरण उपलब्ध कराया जाए।

उत्तर कुंजी में एक अंक के लाभ पर कोर्ट ने उठाया सवाल उत्तर कुंजी के मुद्दे पर अधिवक्ता अमित भदौरिया ने कहा कि उनके याचिकाकर्ताओं ने याचिका और कंटेम्प्ट दोनों दाखिल किए थे, लेकिन इसी मामले के कारण सुनवाई रुकी हुई है। इस पर पीठ ने सवाल किया कि जब परीक्षा सभी अभ्यर्थियों ने दी थी और कोई प्रश्न गलत था तो उसका एक अंक केवल कुछ अभ्यर्थियों को ही क्यों दिया गया?

यदि प्रश्न गलत था तो उसका लाभ सभी को मिलना चाहिए था। पीठ ने पूछा कि गलती सार्वजनिक होने के बावजूद इसका लाभ सीमित अभ्यर्थियों को क्यों मिला। अमित भदौरिया ने बताया कि जिन अभ्यर्थियों ने उस एक अंक के कारण न्याय के लिए कोर्ट का रुख किया था, उन्हें ही इसका लाभ मिला। उस समय कोर्ट की ओर से कहा गया था कि 'पंडोरा बॉक्स' नहीं खोला जाना चाहिए।

इसलिए जो अभ्यर्थी पहले ही ज्वाइन कर चुके हैं, उन्हें अतिरिक्त अंक का लाभ न देकर केवल उन अभ्यर्थियों तक इसे सीमित रखा गया जो एक अंक के कारण चयन से बाहर रह गए थे। सीनियर अधिवक्ता को बिना अनुमति बोलने पर कोर्ट ने रोका सुनवाई के दौरान चयनित पक्ष की अधिवक्ता शोभा गुप्ता ने बीच में अपनी बात रखने की कोशिश की।

इस पर पीठ ने उन्हें रोकते हुए कहा कि उन्होंने बोलने से पहले अनुमति नहीं ली। कोर्ट ने कहा कि वह सीनियर हैं और उनसे ऐसी गलती की अपेक्षा नहीं है। करीब 3:50 बजे सुनवाई समाप्त हुई। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 6 अक्टूबर को निर्धारित की है।

📡 स्रोत: NewsData.io

📰 पूरी खबर पढ़ें (NewsData.io पर जाएं)
J
JKS News Desk

वॉयस ऑफ क्रांति की संपादकीय टीम आपके लिए भोपाल, मध्यप्रदेश और देश की सटीक और विश्वसनीय समाचार प्रस्तुत करती है।