70-80-90 प्रतिशत प्रोबेशन वेतन व्यवस्था पर हाईकोर्ट की रोक, कर्मचारियों को पूर्ण वेतन और एरियर का रास्ता साफ
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →मध्यप्रदेश के नवनियुक्त तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों से जुड़ा मामला, शासन की व्यवस्था को हाईकोर्ट में चुनौती के बाद मिली राहत
भोपाल। मध्यप्रदेश में प्रोबेशन अवधि के दौरान तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को न्यूनतम वेतनमान का 70, 80 और 90 प्रतिशत भुगतान किए जाने की व्यवस्था को लेकर कर्मचारियों को हाईकोर्ट से महत्वपूर्ण राहत मिली है। हाईकोर्ट के विभिन्न आदेशों में इस व्यवस्था को चुनौती देने वाले कर्मचारियों को पूर्ण वेतन और बकाया राशि के भुगतान का रास्ता साफ हुआ है।
मामला सामान्य प्रशासन विभाग की 12 दिसंबर 2019 की व्यवस्था से जुड़ा है, जिसके तहत संबंधित श्रेणी के कर्मचारियों को प्रोबेशन के पहले, दूसरे और तीसरे वर्ष में न्यूनतम वेतनमान का क्रमश: 70, 80 और 90 प्रतिशत भुगतान किए जाने का प्रावधान था। हाईकोर्ट के पूर्व के आदेशों में इस व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए समान कार्य के लिए समान वेतन के सिद्धांत को आधार बनाया गया।
31 अक्टूबर 2025 को इंदौर खंडपीठ ने W.A. No. 2977/2025, इंडोर म्युनिसिपल कॉरपोरेशन बनाम विनिता तिवारी एवं अन्य मामले में संबंधित व्यवस्था के खिलाफ दिए गए फैसले को बरकरार रखा। न्यायालय ने कहा कि निर्धारित प्रक्रिया से नियुक्त कर्मचारी प्रोबेशन अवधि में भी पद के न्यूनतम वेतनमान के हकदार हैं और केवल प्रोबेशन के आधार पर 70, 80 और 90 प्रतिशत भुगतान का प्रावधान उचित नहीं ठहराया जा सकता।
इसके बाद भी इसी मुद्दे पर अलग-अलग कर्मचारियों की ओर से याचिकाएं दायर होती रहीं। 8 सितंबर 2026 के एक मामले में हाईकोर्ट ने पूर्व के फैसलों का उल्लेख करते हुए 70, 80 और 90 प्रतिशत वेतन व्यवस्था से जुड़े प्रावधानों को चुनौती देने वाले कर्मचारियों को राहत दी। न्यायालय के समक्ष पूर्व के आदेशों में प्रोबेशन अवधि के लिए पूर्ण वेतन और बकाया राशि के भुगतान का उल्लेख किया गया।
इसी क्रम में कर्मचारियों की ओर से कृष्ण कुमार नाथ के नेतृत्व में वीरेन्द्र कुमार अहिरवार, मुस्कान ठाकुर, राहुल किरार, दिनेश अहिरवार, बुलबुल चौरसिया, सतेंद्र कुशवाहा, हेमंत कुमार पंछेश्वर, अंकुश माहुले, आशुतोष ब्रम्हे, विकास ब्रम्हे, राजकुमार इवने, राहुल सिंह, रोहित सिंह शाक्य, फैजल खान, निकिता अहिरवार, रज्जूपाल, ब्रजेश साहू, जाहिदा बी, अरविंद प्रजापति, शाल्वी दुबे, मनेश पवार, नाजरा फारूक, प्रीति बडेरिया और नीतू राठौर सहित 25 याचिकाकर्ताओं द्वारा भी इस व्यवस्था को चुनौती दिए जाने की जानकारी दी गई है।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि कर्मचारियों से नियमित कर्मचारियों के समान कार्य लिया जाता है, लेकिन प्रोबेशन के दौरान कम वेतन दिया जाना समान कार्य-समान वेतन के सिद्धांत के विपरीत है। उनका दावा है कि हाईकोर्ट के आदेशों के बाद प्रोबेशन अवधि में कम भुगतान किए गए वेतन की अंतर राशि और उस पर ब्याज के भुगतान का रास्ता खुला है।
इस मामले में कर्मचारियों की नजर अब आगे की न्यायिक प्रक्रिया पर है। शासन की ओर से यदि संबंधित आदेश को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी गई है, तो अंतिम स्थिति सुप्रीम कोर्ट के आगामी आदेशों पर निर्भर करेगी। ऐसे में प्रदेश के प्रभावित कर्मचारियों के लिए यह मामला अभी पूरी तरह अंतिम रूप से समाप्त नहीं हुआ है।
हाईकोर्ट के अब तक के आदेशों से इतना स्पष्ट है कि 70, 80 और 90 प्रतिशत भुगतान वाली प्रोबेशन व्यवस्था पर न्यायिक स्तर पर गंभीर सवाल उठे हैं और कई मामलों में कर्मचारियों को पूर्ण वेतन तथा बकाया भुगतान की राहत दी गई है।