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80 की उम्र में 930 KM पैदल चलेंगे दिग्विजय:उज्जैन से अयोध्या तक ‘सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा’, बोले- अब भी 50 जैसा महसूस करता हूं

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 6 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
80 की उम्र में 930 KM पैदल चलेंगे दिग्विजय:उज्जैन से अयोध्या तक ‘सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा’, बोले- अब भी 50 जैसा महसूस करता हूं

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह 20 अक्टूबर से ‘सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा’ शुरू करेंगे। उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर से शुरू होने वाली यह यात्रा 930 किमी का सफर तय कर अयोध्या पहुंचेगी। खास बात यह भी है कि दिग्विजय सिंह ने 2017 में अपनी नर्मदा परिक्रमा विजयादशमी के दिन शुरू की थी।

इस बार भी उन्होंने यात्रा की शुरुआत के लिए विजयादशमी का दिन चुना है। यात्रा शुरू होने से पहले उन्होंने कहा कि मैं अगर 80 की उम्र में केवल 50 साल का महसूस करता हूं, तो किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए।साथ ही हिंदू’ शब्द, सनातन धर्म, RSS-VHP और राम मंदिर के चंदे-चढ़ावे को लेकर कई बातें कहीं हैं।

5 दिन उज्जैन में जिले, पार्थिव शिवलिंग बनाएंगे उज्जैन कांग्रेस शहर अध्यक्ष मुकेश भाटी के मुताबिक- दिग्विजय सिंह 19 अक्टूबर की रात उज्जैन आएंगे। 20 अक्टूबर की सुबह सबसे पहले चिंतामन मंदिर जाएंगे। फिर बालाजी गार्डन में पार्थिव शिवलिंग बनाएंगे। इसके बाद महाकाल मंदिर में दर्शन करने के बाद करीब 1 से 2 बजे के बीच यात्रा प्रारंभ करेंगे।

जिले में यात्रा 5 दिन रहेगी। पहला पड़ाव कानीपुरा में रहेगा। इसके बाद सिंदुरिया, तराना, कनासिया होते हुए यात्रा शाजापुर जिले में प्रवेश करेगी। हर पड़ाव पर उनके साथ चलने के लिए हजारों लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराया है। 65-70 दिन की यात्रा, रोज 15KM चलने की तैयारी यात्रा की लंबाई करीब 930 किमी है।

इसे 65–70 दिन में पूरा करने का लक्ष्य है। रोज करीब 15 किमी पैदल चलने की योजना है। दिग्विजय सिंह यात्रा की तैयारी के लिए रोज करीब 8 किमी पैदल अभ्यास कर रहे हैं। यात्रा में 2-3 हजार लोगों के शामिल होने की तैयारी है। इसे गैर-राजनीतिक रखने की बात कही गई है और राजनीतिक दलों के झंडे-बैनर नहीं रखने की बात सामने आई है।

यात्रा का ध्येय वाक्य “यतो धर्मस्ततो जयः” रखा गया है। वीडियो में बताया यात्रा का उद्देश्य यात्रा से पहले दिग्विजय सिंह ने एक वीडियो जारी किया है। जिसमें उन्होंने यात्रा के उद्देश्य बताए हैं। कहा कि यात्रा में सनातन धर्म की उनकी परिभाषा के साथ राम मंदिर के चंदे-चढ़ावे, RSS-VHP और भाजपा की भूमिका से जुड़े आरोप भी प्रमुख मुद्दे होंगे।

अयोध्या पहुंचकर इन आरोपों को लेकर याचिका दायर करने की बात भी उन्होंने कही है। ‘हिंदू’ फारसी शब्द, वेद-उपनिषद-पुराणों में नहीं दिग्विजय सिंह ने कहा- “आज हिंदू धर्म की बात कोई नहीं कर रहा, सनातन धर्म की बात हो रही है। जब से मैंने ‘सनातन धर्म’ कहना चालू किया, लोग इसकी बात कर रहे हैं।” उन्होंने कहा- “‘हिंदू’ जो शब्द है, यह फारसी शब्द है।

हमारे ग्रंथों में, वेद में, उपनिषद में, पुराणों में कहीं भी हिंदू शब्द का उपयोग नहीं हुआ है। यह सनातन धर्म है।” सिंह ने आरोप लगाया कि RSS और विश्व हिंदू परिषद ने सनातन धर्म को बिगाड़ा है। उनके मुताबिक सावरकर के साथ RSS और VHP ने सनातन को ‘हिंदुत्व’ का नाम दिया, जिससे हिंदू-मुस्लिम, हिंदू-सिख और हिंदू-ईसाई समाज के बीच दूरी बढ़ी।

राम शिलाओं से मंदिर के चंदे तक घपले का आरोप राम मंदिर से जुड़े चंदे को लेकर सिंह ने आरोप लगाया कि पहले राम शिलाओं के लिए चंदा इकट्ठा किया गया और उसमें घपला हुआ। इसके बाद राम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे में भी गड़बड़ी की गई। भगवान राम की चढ़ोतरी को लेकर उन्होंने कहा- “हमारी आस्था के प्रतीक भगवान राम के चढ़ावे में पैसे खा गए।” सिंह ने इस मामले में विश्व हिंदू परिषद से जुड़े लोगों को जिम्मेदार बताया।

उन्होंने आरोप लगाया कि VHP के माध्यम से आने वाली चढ़ावे की राशि भाजपा के चुनावी चंदे में जा रही है। साथ ही भाजपा और RSS के बड़े भवनों में भी इस पैसे के इस्तेमाल का आरोप लगाया। चंपत राय पर निशाना- ‘RSS के एजेंट’ सिंह ने चंपत राय पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा- “यह चंपत राय, जो कि RSS के एक्टिविस्ट हैं, इनका कोई धर्म से लेना-देना नहीं है।

सनातनी परंपराओं के ये अनुकूल नहीं हैं।” सिंह ने उन्हें RSS का एजेंट बताते हुए आरोप लगाया कि विश्व हिंदू परिषद के माध्यम से आने वाली चढ़ावे की राशि भाजपा के चुनावी चंदे में जा रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा और RSS के बड़े-बड़े भवनों में पैसा जा रहा है। सिंह के मुताबिक, “इसके खिलाफ मैं लड़ाई लड़ रहा हूं, लड़ूंगा।

और यही मेरा मुख्य उद्देश्य होगा।” गांधी के ‘ईश्वर-अल्लाह’ वाले भजन को बताया सनातन दिग्विजय सिंह ने सनातन धर्म की अपनी व्याख्या के लिए महात्मा गांधी का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि गांधी ने सनातन धर्म और सनातनी परंपराओं का सम्मान किया। उन्होंने ‘रघुपति राघव राजाराम, सबको सम्मति दे भगवान, ईश्वर अल्लाह तेरे नाम’ का उल्लेख करते हुए कहा कि यही सनातन धर्म है, जिसे महात्मा गांधी ने अपनाया।

यात्रा प्रभारी सचिन वत्स ने कहा कि यह केवल पदयात्रा नहीं, बल्कि महाकाल की नगरी से श्रीराम की नगरी तक सनातन की उस आत्मा को तलाशने का प्रयास है, जिसमें सत्य, सेवा, करुणा, समरसता और हर व्यक्ति के सम्मान की भावना है।

📡 स्रोत: NewsData.io

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