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आधी रात गंडक से आती है सरसराहट की आवाज:डर से सो नहीं पा रहे, खाने में सिर्फ चूरा-मिट्ठा; बिहार के बाढ़ में समा गए 109 घर-स्कूल

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 21 अगस्त 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
आधी रात गंडक से आती है सरसराहट की आवाज:डर से सो नहीं पा रहे, खाने में सिर्फ चूरा-मिट्ठा; बिहार के बाढ़ में समा गए 109 घर-स्कूल

आधी रात नदी की धारा से ऐसी सरसराहट की आवाज आती है, लगता है पूरा परिवार ही नदी में समा जाएगा।

गंडक के डर से रातभर जागकर तंबू में गुजार रहे हैं, दो दिन पहले अफसर लोग आए थे, चूरा-मिट्ठा दे गए, वही खाकर बच्चे और पूरा परिवार रह रहे हैं। 40 सालों में हमने जो कुछ भी बनाया, सब बह गया.., हमारा घर, खेत, बच्चों का स्कूल सब गंडक में समा गए। हमें कम से कम बसने के लिए स्थायी जमीन चाहिए।

बगहा के चिरुअही पंचायत के रहने वाले महेश साह ने दैनिक भास्कर से बातचीत में ये बातें कही। दरअसल बगहा में बीते 3 दिनों से गंडक नदी अपनी धारा बदल रही है, जिससे कटाव तेज हो गया है, अब तक 109 घर और एक स्कूल कटाव के कारण नदी में समा गए हैं। अंचलाधिकारी नंदलाल राम ने बताया कि ऊंचे स्थानों पर लोगों को बसाया जा रहा है।

जल्दी ही सबकुछ ठीक कर लिया जाएगा। ऐसे सवाल है कि बगहा में गंडक नदी की धारा हर साल क्यों बदल जाती है? बीते पांच सालों में कितने घर नदी में समा गए? प्रशासन ने अब तक कोई परमानेंट तैयारियां क्यों नहीं की? जिनके घर नदी में गए, वे किस हाल में हैं हैं? पढ़िए पूरी रिपोर्ट... बाढ़ और कटाव से जुड़ी तस्वीरें...

बगहा अनुमंडल के मधुबनी प्रखंड की चिउरही पंचायत में गंडक नदी का कटाव लगातार तेज होता जा रहा है। ग्रामीण सुरेश ने बताया कि नदी की धारा अब गांव के घरों और खेतों को निगलने के बाद पैक्स गोदाम के करीब पहुंच गई है। सरकारी स्कूल का पूरा भवन नदी में समा चुका है।

हमलोगों को डर है कि कटाव नहीं रुका तो गंडक की धारा धनहा-रतवल मुख्य मार्ग तक पहुंच सकती है। हमारे गांव में कटाव की भयावहता आपको साफ दिखेगी। कहीं खेत का नामोनिशान नहीं है, कहीं घरों की जगह सिर्फ मलबा और पानी नजर आ रहा है।

जिन परिवारों के पास कभी अपनी जमीन और घर था, वे अब प्लास्टिक के तंबू में रहने को मजबूर हैं। 40 साल से बसे थे, फिर उजड़ गया घर-खेत वहीं कटाव की मार झेल रहे 85 वर्षीय महेश साह और उनकी 80 वर्षीय पत्नी शिवकली देवी की जिंदगी में यह पहली बार नहीं है, जब उन्हें अपना घर छोड़ना पड़ा है।

दोनों के पांच बेटे हैं और करीब 28 नाती-पोते हैं। करीब तीन एकड़ खेती योग्य जमीन, फसल और उनका आवास गंडक में समा चुका है। महेश साह बताते हैं कि पिछले 40 वर्षों से वे चिउरही के रेवहिया में रह रहे थे। इससे पहले भी गंडक के कटाव के कारण उन्हें करीब 10 जगहों से विस्थापित होना पड़ा था। रेवहिया उनके लिए 11वां ठिकाना था।

यहां वे खेती-बाड़ी कर परिवार का पालन-पोषण कर रहे थे। महेश साह कहते हैं, “पहले खेत कटा और फिर घर कट गया। अब हम लोग भूखे रहने पर मजबूर हैं। 40 साल से यहां बसे हुए थे, कभी कोई दिक्कत नहीं हुई। अपनी खेती के अलावा दूसरे लोगों की जमीन भी रेहन और बटाई पर लेकर खेती करते थे।

आज हालत यह है कि प्लास्टिक के तंबू में किसी तरह जिंदगी काट रहे हैं। गंडक के डर से रातभर जागना पड़ता है।” स्कूल नदी में समाया, बच्चों की पढ़ाई पर संकट गंडक के कटाव ने सिर्फ लोगों के घर और खेत नहीं छीने हैं, बल्कि बच्चों की पढ़ाई भी संकट में डाल दी है। सरकारी स्कूल का पूरा भवन नदी में समा चुका है।

अब बच्चों के सामने सवाल है कि वे पढ़ने कहां जाएं। पांचवीं कक्षा के छात्र नितेश कुमार के लिए घर और खेत के साथ स्कूल का छिन जाना भी बड़ी चिंता है। 11 साल के नितेश कुमार ने कहा कि, "स्कूल कट गया है। हम लोग कैसे पढ़ेंगे और कहां जाएंगे? घर, खेत और स्कूल सब कट गया है।

अब हम कैसे रहेंगे और पढ़ाई कहां करेंगे?" शादी के बाद बनाया था घर, अब बच्चों के भविष्य की चिंता 42 वर्षीय सीमा देवी का परिवार भी कटाव की मार झेल रहा है। सीमा देवी कहती हैं, "20 साल पहले मेरी शादी चिउरही में हुई थी। तब से मैं अपने ससुराल में रह रही हूं। मेरे पति किसान हैं और खेती-बाड़ी करके परिवार चलाते हैं।

हमारा जीवन सुखी चल रहा था। अब घर कट गया और खेत भी घट गया। समझ नहीं आ रहा कि जीवन कैसे कटेगा। बाल-बच्चों को कैसे पढ़ाएंगे और उनका भविष्य कैसे बनाएंगे। प्रशासन से हमारी मांग है कि हमें पुनर्वास दिया जाए। मेरे पांच बच्चे हैं, उन्हें कैसे पढ़ाऊंगी, कैसे पालूंगी?

गंडक नदी ने हमारी सारी खुशियां छीन ली हैं।" स्कूल के बाद पैक्स गोदाम पर मंडराया खतरा चिउरही में कटाव की रफ्तार का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सरकारी स्कूल के बाद अब नदी की धारा पैक्स गोदाम के करीब पहुंच गई है। ग्रामीणों को डर है कि अगर कटाव इसी तरह जारी रहा तो अगला निशाना धनहा-रतवल मुख्य मार्ग हो सकता है।

ग्रामीण दीनानाथ यादव, शिवनाथ, राजेश राम और पलक भारती का कहना है कि कटाव रोकने के लिए लगाए गए जिओ बैग भी गंडक की तेज धारा में बह जा रहे हैं।

मंगलवार को एसडीएम चांदनी कुमारी ने कटाव स्थल का निरीक्षण किया था और आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया था, लेकिन इसके बाद भी कटाव जारी है। 109 घर और एक स्कूल नदी में विलीन मधुबनी के अंचलाधिकारी नंदलाल राम के अनुसार, अब तक चिउरही पंचायत में 109 घर और एक सरकारी स्कूल नदी में विलीन हो चुके हैं।

कटाव प्रभावित परिवारों के लिए राशन और पॉलीथिन शीट की व्यवस्था की जा रही है। सीओ नंदलाल राम ने कहा, "पुनर्स्थापन के लिए पॉलीथिन शीट और राशन की व्यवस्था की जा रही है। पुनर्वास के लिए ऊंचे स्थानों पर लोगों को बसाया जा रहा है। गृहक्षति मद में जो भी सहायता होगी, वह नियमानुसार दी जाएगी।

अभी तक 109 घरों का सनहा प्राप्त हुआ है। कुछ और लोगों के घर कटे हैं, इसलिए यह संख्या बढ़ सकती है।" सिसई में भी पहले उजड़ चुके हैं सैकड़ों घर गंडक का यह कटाव नया संकट नहीं है। वर्ष 2022-23 में सिसई पंचायत के वीरता गांव में करीब 300 घर नदी में विलीन हो गए थे।

वर्ष 2025 में सिसई के नरहवा में भी करीब 135 घर कटाव की चपेट में आए थे। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रभावित परिवारों के स्थायी पुनर्वास का आश्वासन तो मिला, लेकिन अब तक उन्हें स्थायी ठिकाना नहीं मिल सका है।

📡 स्रोत: NewsData.io

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