“आदि बाजार और आदि चित्रा” में जनजातीय कारीगरों और हस्तशिल्प को मिला बढ़ावा
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जनजातीय सहकारी विपणन विकास संघ की पहल, ऑड्रे हाउस में “आदि बाजार और आदि चित्रा” का आयोजन, जनजातीय कारीगरों और हस्तशिल्प को बढ़ावा देना उद्देश्य, पारंपरिक कला, संस्कृति और पकवान की दिखी झलक।
Short Headline: “आदि बाजार और आदि चित्रा” में जनजातीय कारीगरों और हस्तशिल्प को मिला बढ़ावा
ट्राइफेड मेला, रांची, डीडी
जनजातीय सहकारी विपणन विकास संघ की पहल ऑड्रे हाउस में “आदि बाजार और आदि चित्रा” का आयोजन
जनजातीय कारीगरों और हस्तशिल्प को बढ़ावा देना उद्देश्य
पारंपरिक कला, संस्कृति और पकवान की दिखी झलक
एंकर जनजातीय सहकारी विपणन विकास संघ, ट्राइफेड की ओर से रांची के ऑड्रे हाउस में आदि बाजार और आदि चित्रा का आयोजन किया गया है। इसमें विभिन्न राज्यों से आए जनजातीय कारीगर पारंपरिक हस्तशिल्प और उत्पादों के साथ पहुंचे हैं। यहां पारंपरिक कला, संस्कृति और पकवान की झलक देखने को मिल रही है।
होल्ड अप साउंड रिपोर्ट
वीओ 01. ट्राइफेड की ओर से रांची में आयोजित सात दिवसीय आदि बाजार और आदि चित्रा के माध्यम से जनजातीय कला, संस्कृति और शिल्प को बढ़ावा मिल रहा है। चार अक्टूबर तक आयोजित इस प्रदर्शनी में नागालैंड, असम, तेलंगाना, बिहार समेत विभिन्न राज्यों के जनजातीय कारीगर और शिल्पकार पारंपरिक उत्पादों के साथ पहुंचे हैं।
बाइट- दो आर्टिजन
वीओ 02. आयोजन में पहुंचे कारीगर अपने-अपने क्षेत्रों की विशिष्ट कला और परंपराओं को उत्पादों के माध्यम से प्रस्तुत कर रहे हैं। लकड़ी, बांस, धातु, वस्त्र और अन्य प्राकृतिक सामग्रियों से तैयार हस्तशिल्प लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
बाइट- दो आर्टिजन
वीओ 03. ट्राइफेड की इस पहल से जनजातीय कारीगरों और शिल्पकारों को तो बाजार उपलब्ध हो ही रहा है। साथ ही मेला परिसर में स्थानीय लोग पारंपरिक स्वादिष्ट व्यंजन भी बना रहे हैं, जो लोगों को खूब लुभा रहे हैं।
बाइट- दो आर्टिजन
अंतिम वीओ आदि चित्रा के माध्यम से जनजातीय चित्रकला और कलात्मक अभिव्यक्तियों को भी लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। बाजार में आने वाले लोग विभिन्न राज्यों की जनजातीय संस्कृति और हस्तशिल्प से रूबरू हो रहे हैं।
रांची से सहयोगी विकास कुमार के साथ प्रणय प्रबोध की रिपोर्ट।