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आदित्यपुर के नितेश ने बनाया ‘मदद साथी’, क्यूआर कोड से बचेगी जान

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 2 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
आदित्यपुर के नितेश ने बनाया ‘मदद साथी’, क्यूआर कोड से बचेगी जान

सरायकेला-खरसावां जिले के आदित्यपुर के नितेश ने बनाया ‘मदद साथी’, क्यूआर कोड से बचेगी जान, हादसे में पहचान से लेकर परिजनों तक पहुंचेगी सूचना, गोल्डन ऑवर में मदद पहुंचाने की पहल, तकनीक से हादसे के वक्त मदद की कोशिश।

Short Headline: आदित्यपुर के नितेश ने बनाया ‘मदद साथी’, क्यूआर कोड से बचेगी जान

क्यूआर कोड, सरायकेला-खरसावां, अनूप

क्यूआर कोड से बचेगी जान आदित्यपुर के नितेश ने बनाया ‘मदद साथी’

हादसे में पहचान से लेकर परिजनों तक सूचना

गोल्डन ऑवर में मदद पहुंचाने की पहल तकनीक से हादसे के वक्त मदद की कोशिश

एंकर क्यूआर कोड... अब सिर्फ पेमेंट के काम नहीं आएगा, बल्कि हादसे की स्थिति में किसी की जान बचाने में भी मदद कर सकता है। आदित्यपुर के नितेश कुमार सिंह ने ‘मदद साथी’ नाम से ऐसी डिजिटल व्यवस्था तैयार की है, जिसमें वाहन पर लगे क्यूआर कोड को स्कैन करते ही घायल की पहचान और उसके परिजनों की जानकारी मिल सकेगी।

होल्ड अप साउंड रिपोर्ट

वीओ 1 सरायकेला-खरसावां जिला के आदित्यपुर के रहने वाले नितेश कुमार सिंह ने सड़क हादसों में मदद पहुंचाने के लिए ‘मदद साथी’ नाम से डिजिटल सिस्टम तैयार किया है। वाहन पर लगे क्यूआर कोड को स्कैन करते ही घायल की पहचान, परिजनों का संपर्क और जरूरी मेडिकल जानकारी सामने आ सकेगी। इस पहल के पीछे की सोच बता रहे हैं नितेश कुमार सिंह।

बाइट- नितेश कुमार सिंह, ‘मदद साथी’ के निर्माता

वीओ 2 हादसे के बाद हर सेकंड कीमती होता है और कई बार घायल अपनी पहचान बताने की स्थिति में नहीं होता।

ऐसे में मोबाइल से क्यूआर कोड स्कैन कर मददगार परिवार तक सूचना पहुंचाने की कोशिश कर सकेगा।

इस व्यवस्था से मिलने वाली जानकारी के बारे में नितेश कुमार सिंह बता रहे हैं।

बाइट- नितेश कुमार सिंह वीओ 3 गोल्डन ऑवर को ध्यान में रखते हुए यह व्यवस्था खास तौर पर अकेले सफर करने वालों के लिए मददगार हो सकती है। मकसद है कि पहचान और संपर्क में लगने वाला समय बचे और घायल को जल्द इलाज मिल सके। इस पहल की उपयोगिता पर विकास कुमार, सतीश शर्मा, अजय कुमार और अभिषेक मिश्रा ने भी अपनी बात रखी।

बाइट- विकास कुमार बाइट- सतीश शर्मा बाइट- अजय कुमार/अभिषेक मिश्रा

अंतिम वीओ तकनीक का इस्तेमाल अब सिर्फ सुविधा के लिए नहीं, बल्कि जरूरत के वक्त मदद पहुंचाने के लिए भी किया जा रहा है। ‘मदद साथी’ इसी सोच के साथ क्यूआर कोड को पहचान, संपर्क और आपात सहायता से जोड़ने की कोशिश है।

डीडी न्यूज़ के लिए सरायकेला-खरसावां से अनूप मिश्रा की रिपोर्ट।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।