आदिवासियों की जमीन पर दबंगों का कब्जा? न्याय की आस में भोपाल पहुंचे परिवार
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उमरिया के चंदवार गांव के आदिवासी परिवारों का दावा—सरकार से मिली 2-3 एकड़ जमीन पर दबंगों ने जमाया कब्जा
मुख्यमंत्री को ज्ञापन देकर लगाई न्याय की गुहार
भोपाल/उमरिया। आदिवासी हितों और उनके अधिकारों को लेकर सरकार की योजनाओं के बीच उमरिया जिले से सामने आया एक मामला कई सवाल खड़े कर रहा है। मैनपुर जनपद की ग्राम पंचायत चंदवार के आदिवासी परिवारों ने अपनी जमीन पर कथित कब्जे का आरोप लगाते हुए राजधानी भोपाल का रुख किया है।
पीड़ित परिवारों के अनुसार, शासन की ओर से उन्हें जीवन-यापन और खेती के लिए करीब 2 से 3 एकड़ जमीन आवंटित की गई थी। ग्रामीणों का दावा है कि ग्राम पंचायत क्षेत्र में स्थित शासकीय भूमि, खसरा क्रमांक 6, जिसका कुल क्षेत्रफल करीब 27 हेक्टेयर बताया जा रहा है, में उनके हिस्से की जमीन पर गांव के कुछ प्रभावशाली लोगों ने कथित तौर पर कब्जा कर रखा है।
न्याय की मांग लेकर राजधानी पहुंचे आदिवासी
अपनी शिकायत लेकर आदिवासी परिवार भोपाल पहुंचे और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित संबंधित जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन सौंपकर मामले में कार्रवाई और अपनी जमीन वापस दिलाने की मांग रखी।
पीड़ितों का कहना है कि यदि उनकी शिकायत पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई और जमीन से संबंधित समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो वे आगे मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने की चेतावनी भी दे रहे हैं।
योजनाएं कई, लेकिन जमीन पर हक कब?
सरकार आदिवासी और गरीब परिवारों के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित कर रही है, लेकिन चंदवार के इन परिवारों का आरोप है कि उन्हें अपने अधिकारों का वास्तविक लाभ नहीं मिल पा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रभावशाली लोगों के दबाव के कारण उनकी जमीन का मामला लंबे समय से उलझा हुआ है।
अब बड़ा सवाल यह है कि जिन आदिवासी परिवारों को शासन ने जीवन-यापन के लिए जमीन दी, क्या वे अपनी ही जमीन पर खेती और कब्जे का अधिकार हासिल कर पाएंगे?
कब मिलेगा इन गरीब आदिवासियों को न्याय?
चंदवार के इन परिवारों की शिकायत अब राजधानी तक पहुंच चुकी है। ऐसे में निगाहें जिला प्रशासन और शासन की कार्रवाई पर टिकी हैं। क्या प्रशासन मौके की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाएगा? क्या खसरा क्रमांक 6 की जमीन की सीमांकन और रिकॉर्ड के आधार पर जांच होगी? और सबसे बड़ा सवाल—अगर आरोप सही पाए जाते हैं, तो जिम्मेदारों पर कब कार्रवाई होगी?
इन सवालों के जवाब अब प्रशासनिक जांच और कार्रवाई से ही सामने आएंगे।