आगरा में ‘समर्थ शिक्षक-सशक्त भारत’ राष्ट्रीय सम्मेलन का हुआ समापन
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आगरा में डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के जेपी सभागार में राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद की ओर से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का समापन हो गया। ‘समर्थ शिक्षक-सशक्त भारत’ थीम पर आयोजित सम्मेलन के समापन समारोह का शुभारंभ राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय और एनसीटीई के चेयरपर्सन प्रोफेसर पंकज अरोड़ा ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।इस सम्मेलन में चंडीगढ़, दिल्ली, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख सहित विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 250 से अधिक शिक्षकों और प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
सम्मेलन में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुसार शिक्षकों को बेहतर प्रशिक्षण देने और उनकी क्षमताओं को बढ़ाने पर चर्चा हुई। इसके साथ ही राष्ट्रीय शिक्षक व्यावसायिक मानक और राष्ट्रीय मेंटरिंग मिशन को प्रभावी ढंग से लागू करने पर भी विचार-विमर्श किया गया।समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि भारत प्राचीन काल से ही ज्ञान, दर्शन और आध्यात्मिक चेतना की भूमि रहा है।
भारतीय संस्कृति में गुरु का विशेष स्थान है। गुरु-शिष्य परंपरा केवल शिक्षा देने तक सीमित नहीं थी, बल्कि यह जीवन के मूल्यों को समझने और अच्छे नागरिक बनाने का माध्यम भी रही है।उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 भारतीय शिक्षा व्यवस्था में बदलाव लाने की एक महत्वपूर्ण पहल है। इस नीति में बच्चों की रुचि, क्षमता और जरूरतों के अनुसार शिक्षा देने पर जोर दिया गया है।
साथ ही बच्चों में बुनियादी पढ़ने-लिखने और गणित की समझ विकसित करने को भी प्राथमिकता दी गई है।