आईआईटी बॉम्बे छात्र साहिल वाकोडे की मौत पर राहुल गांधी ने परिवार से की बात, जानें क्या कहा?
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लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने आईआईटी बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोडे के परिजनों से फोन पर बातचीत कर उन्हें समर्थन का भरोसा दिया है.
साहिल की पिछले सप्ताह आईआईटी बॉम्बे के पवई परिसर में कथित आत्महत्या के बाद परिवार ने संस्थान के प्रशासन और कुछ अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं. मामले की जांच फिलहाल मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच कर रही है.
राहुल गांधी ने परिजनों को दिया हरसंभव मदद का भरोसा
महाराष्ट्र कांग्रेस ने गुरुवार को बताया कि राहुल गांधी ने साहिल वाकोडे के परिजनों से फोन पर बातचीत की.
उन्होंने परिवार के प्रति समर्थन जताते हुए न्याय की लड़ाई में हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया.
रिपोर्टों के अनुसार, राहुल गांधी ने साहिल के माता-पिता से वीडियो कॉल के जरिए भी बातचीत की.
इस मामले को लेकर गुरुवार दोपहर यूथ कांग्रेस की ओर से प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की जानी है.
इसमें साहिल वाकोडे मामले को लेकर आगे की रणनीति और आंदोलन की दिशा की घोषणा किए जाने की संभावना है.
परिवार ने आईआईटी बॉम्बे प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप
साहिल की मौत के बाद उसके परिवार ने आईआईटी बॉम्बे प्रशासन और कुछ अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं.
परिवार ने प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला समेत संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है. मुंबई क्राइम ब्रांच मामले की जांच कर रही है. परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों की जांच जारी है.
आईआईटी बॉम्बे ने पहले जारी अपनी जानकारी को लेकर बाद में खेद जताया था और कहा था कि साहिल की मौत से पहले की परिस्थितियों की जांच जारी है. संस्थान ने प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला को डीन के पद से भी हटा दिया है.
परीक्षा के दौरान मोबाइल और चैटजीपीटी के इस्तेमाल का मामला
साहिल वाकोडे ऊर्जा विज्ञान एवं इंजीनियरिंग विभाग में द्वितीय वर्ष का छात्र था.
संस्थान के अनुसार, परीक्षा के दौरान उसके पास मोबाइल फोन पाया गया था और वह चैटजीपीटी की मदद से सवालों के जवाब हासिल करने की कोशिश कर रहा था.
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📡 स्रोत: ABP Live
💡 पृष्ठभूमि (Background)
साहिल वाकोडे, आईआईटी बॉम्बे के छात्र, की मृत्यु पर राहुल गांधी ने परिवार को फोन पर समर्थन दिया। यह घटना आईआईटी के पवई परिसर में कथित आत्महत्या के बाद हुई, जहाँ परिवार ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इस खबर की महत्ता इसलिए है क्योंकि यह उच्च शिक्षा संस्थानों में छात्र कल्याण और मानसिक स्वास्थ्य पर प्रकाश डालती है, और राजनीतिक हस्तक्षेप से सामाजिक जागरूकता बढ़ती है। आम जनता पर इसका असर यह हो सकता है कि छात्र और अभिभावक मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं और संस्थागत जवाबदेही के प्रति अधिक सतर्क हों, तथा इस