'आखिर हो क्या रहा है?' शिवसेना सांसदों के खिलाफ याचिका पर SC में बोले कपिल सिब्बल
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को शिवसेना के दो गुटों के बीच सांसदों के विलय को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई की तारीख तय कर दी है.
याचिका में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में उद्धव ठाकरे गुट के छह सांसदों के विलय को लोकसभा अध्यक्ष द्वारा दी गई मंजूरी को चुनौती दी गई है.
जस्टिस पी एस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने याचिका की सुनवाई के लिए 8 दिसंबर 2026 की तारीख तय की.
इससे पहले खंडपीठ को बताया गया था कि लोकसभा अध्यक्ष कार्यालय की ओर से इस मामले में कोई उपस्थित नहीं हुआ है.
याचिकाकर्ता शिवसेना (यूबीटी) के नेता अरविंद सावंत की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कार्यवाही में हो रही देरी पर चिंता जताई.
उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई में ही नोटिस जारी कर दिया था, लेकिन लोकसभा अध्यक्ष कार्यालय की ओर से अभी तक इस मामले में कोई उपस्थिति दर्ज नहीं कराई गई है.
सिब्बल ने सवाल किया, इस मामले में उनके सामने आने के लिए हमें और कितने महीने इंतजार करना पड़ेगा? जुलाई में नोटिस जारी किया गया था. आखिर चल क्या रहा है?
मामले को अंतिम सुनवाई के लिए लिस्टेड किया गया
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने मामले की सुनवाई स्थगित कर दी और यह कहते हुए इसे अंतिम निपटारे के लिए लिस्टेड कर दिया कि लोकसभा अध्यक्ष कार्यालय को नोटिस जारी किया जा चुका है.
सुप्रीम कोर्ट ने 22 जुलाई को एक याचिका पर लोकसभा अध्यक्ष कार्यालय और अन्य लोगों से जवाब मांगा था.
इस याचिका में शिंदे के नेतृत्व वाले शिवसेना गुट में उद्धव गुट के छह सांसदों के विलय को लोकसभा अध्यक्ष द्वारा दी गई मंजूरी को चुनौती दी गई है.
सुप्रीम कोर्ट ने सावंत की याचिका की सुनवाई करने के लिए सहमत होते हुए कोई भी अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया था.
लोकसभा अध्यक्ष ने दी थी विलय को मंजूरी
मानसून सत्र से पहले, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 18 जुलाई को शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसदों के शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय को मंजूरी दे दी थी.
इन छह सांसदों के विलय के बाद शिवसेना सांसदों की संख्या बढ़कर 13
📡 स्रोत: ABP Live