आखिरी सावन सोमवार- भोर में खुले महाकाल के पट:भस्म आरती में गूंजा हर-हर महादेव; शाम को नगर भ्रमण पर निकलेंगे बाबा
भगवान शिव को प्रिय सावन महीने के चौथे सोमवार को आज भी देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन पहुंचे हैं। विश्व प्रसिद्ध बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक महाकालेश्वर के दर्शन के लिए भक्तों की कतारें लगी हुई हैं। भस्म आरती के लिए मंदिर के कपाट तड़के 2:30 बजे खोले गए।
मंदिर के पट खुलने के बाद सभा मंडप में शिव के गण वीरभद्र के कान में स्वस्ति वाचन कर आज्ञा ली गई, फिर चांदी का पट खोलकर कर्पूर आरती की गई। नंदी हॉल में नंदी का स्नान, ध्यान और पूजन किया गया। जल से भगवान महाकाल का अभिषेक करने के बाद दूध, दही, घी, शक्कर, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से पूजन किया गया।
रजत चंद्र, त्रिशूल, मुकुट और आभूषणों के साथ भांग, चंदन और ड्रायफ्रूट का श्रृंगार कर भस्म चढ़ाई गई। शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुंडमाल और रुद्राक्ष की माला के साथ-साथ फूलों की माला धारण कराई गई। फल और मिठाई का भोग लगाया गया। इसके बाद शुरू दर्शन का सिलसिला रात 10 बजे होने वाली शयन आरती तक चलेगा।
जय श्री महाकाल से गूंजा मंदिर परिसर उज्जैन में रात करीब 3 बजे से ही श्रद्धालुओं की कतारें लग गई थीं। भस्म आरती के दौरान चलायमान दर्शन व्यवस्था के तहत बिना परमिशन वाले श्रद्धालुओं को भी दर्शन मिले। इस दौरान पूरा मंदिर परिसर ‘हर-हर महादेव’ और ‘जय श्री महाकाल’ के जयकारों से गूंज उठा।
भस्म आरती के बाद श्रद्धालु गणेश मंडपम और कार्तिकेय मंडपम से बाबा के दर्शन कर रहे हैं। शाम 4 बजे प्रजा का हाल जानने निकलेंगे महाकाल शाम 4 बजे भगवान महाकाल की राजसी सवारी निकलेगी। पूजा-अर्चना के बाद बाबा को पालकी में विराजित कर नगर भ्रमण कराया जाएगा।
मंदिर के मुख्य द्वार पर सशस्त्र पुलिस बल के जवान पालकी में विराजित भगवान चंद्रमौलेश्वर स्वरूप को सलामी देंगे। आज बाबा महाकाल बैलगाड़ी के नंदी पर श्री उमा-महेश स्वरूप में दर्शन देंगे। पालकी पर श्री चंद्रमौलेश्वर, गजराज पर श्री मनमहेश, गरुड़ रथ पर श्री शिव तांडव और नंदी रथ पर श्री उमा-महेश के मुखारविंद रहेंगे।
सवारी में घुड़सवार पुलिस दल, सशस्त्र बल, होमगार्ड, भजन-झांझ मंडली और पुलिस बैंड भी शामिल रहेगा। महाकाल से रामघाट और फिर मंदिर लौटेगी सवारी सवारी महाकाल मंदिर से महाकाल चौराहा, गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार, कहारवाड़ी, रामघाट पहुंचेगी। यहां शिप्रा नदी के जल से भगवान का अभिषेक और पूजन किया जाएगा।
इसके बाद बाबा मंदिर लौट आएंगे।
📡 स्रोत: NewsData.io