आपदा में केंद्र की 1500 करोड़ की घोषणा, एक साल बीतने के बाद भी हिमाचल को नहीं प्राप्त हुई राहत राशि: राजेश धर्माणी
कहा: मुख्यमंत्री ‘अपना परिवार सुखी परिवार’ योजना के अंतर्गत सालाना 10 लाख रुपये तक मिलेगी की कैशलेस उपचार की सुविधा
अगस्त 31, बिलासपुर (हिमाचल प्रदेश): नगर व ग्राम नियोजन, आवास, तकनीकी शिक्षा, व्यावसायिक एवं औद्योगिक प्रशिक्षण मंत्री राजेश धर्माणी ने आज लोक निर्माण विभाग विश्राम गृह, घुमारवीं में मुख्यमंत्री ‘अपना परिवार सुखी परिवार’ योजना के अंतर्गत ग्राम पंचायत पट्टा, सेऊ तथा बाड़ी मझेड़वां के पात्र लाभार्थियों के साथ जन संवाद किया।
इस अवसर पर बोलते हुए तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने कहा कि प्राकृतिक आपदा से हुए भारी नुकसान के बाद केंद्र सरकार ने हिमाचल प्रदेश के आपदा प्रभावित क्षेत्रों के लिए 1,500 करोड़ रुपये की विशेष वित्तीय सहायता प्रदान करने की घोषणा की थी। लेकिन अब तक यह राशि प्रदेश को प्राप्त नहीं हुई हैं, जिसका प्रदेश को इंतजार है।
सितंबर 2025 में घोषित इस सहायता राशि को लेकर प्रदेश सरकार लगातार केंद्र सरकार के समक्ष अपना पक्ष रख रही है। उन्होंने कहा कि यह राजनीति का विषय नहीं, बल्कि हिमाचल के अधिकार और आपदा प्रभावित परिवारों के दर्द से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि आरडीजी बंद किए जाने से हिमाचल के वित्तीय संसाधनों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।
इसके बावजूद प्रदेश सरकार ने अपने सीमित संसाधनों से आपदा प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता प्रदान की है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ‘अपना परिवार सुखी परिवार’ योजना प्रदेश सरकार की महत्वपूर्ण पहल है।
योजना का उद्देश्य ऐसे अति निर्धन परिवारों को सरकारी योजनाओं के साथ जोड़ना है, जो अभी तक विभिन्न कारणों से लाभ प्राप्त नहीं कर पाए हैं। उन्होंने कहा कि 2 अक्तूबर से योजना के पात्र लाभार्थियों को प्रतिमाह 1,500 रुपये की आर्थिक सहायता के साथ 300 यूनिट तक निःशुल्क बिजली उपलब्ध करवाई जाएगी।
इसके अतिरिक्त हिमकेयर योजना को बीमा आधारित बनाकर प्रत्येक परिवार को सालाना 10 लाख रुपये तक की कैशलेस उपचार सुविधा उपलब्ध करवाने की दिशा में भी प्रदेश सरकार कार्य कर रही है। राजेश धर्माणी ने कहा कि प्रदेश सरकार का उद्देश्य अंतिम छोर तक रहने वाले प्रत्येक पात्र परिवार को सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक संबल प्रदान करना है।
उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से आह्वान किया किया कि वह अपने पंचायत क्षेत्र में योजना की पात्रता रखने वाले किसी भी परिवार को लाभ से वंचित न रहने दें। उन्होंने निर्देश दिए कि 20 सितंबर से पहले सभी पात्र परिवारों का पंजीकरण सुनिश्चित किया जाए, ताकि पात्र परिवारों को योजना का लाभ समय पर मिल सके।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार शिक्षा और स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए निरंतर कार्यशील है। प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध करवाने के साथ-साथ आदर्श स्वास्थ्य संस्थानों के माध्यम से ग्रामीण एवं दूरदराज क्षेत्रों के लोगों को बेहतरीन स्वास्थ्य सेवाओं पर भी विशेष बल दिया जा रहा है।
राज्य सरकार का प्रयास है कि लोगों को शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में बेहतर एवं गुणवत्तापूर्ण सुविधाएं प्रदेश के भीतर ही उपलब्ध हो सके।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने पात्र और जरूरतमंद वर्गों को सहारा देने के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं। ‘मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना’ के तहत प्रदेश के लगभग 6,000 अनाथ बच्चों की शिक्षा, आवास और अन्य आवश्यकताओं का खर्च सरकार वहन कर रही है तथा 27 वर्ष आयु तक प्रतिमाह 4,000 रुपये की सहायता दी जा रही है।
विधवा और तलाकशुदा महिलाओं के बच्चों की शिक्षा के लिए ‘इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना’ तथा विद्यार्थियों की उच्च शिक्षा के लिए डॉ. वाई.एस. परमार विद्यार्थी ऋण योजना के तहत 20 लाख रुपये तक का शिक्षा ऋण 1 प्रतिशत ब्याज पर उपलब्ध करवाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि किसानों और पशुपालकों की आय बढ़ाने के लिए भी सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। भैंस के दूध का खरीद मूल्य 71 रुपये तथा गाय के दूध का 61 रुपये प्रति लीटर निर्धारित किया गया है।
वहीं गेहूं 40 रुपये, मक्की 30 रुपये, कच्ची हल्दी 150 रुपये और अदरक 30 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से खरीद के लिए समर्थन मूल्य घोषित किया गया है। उन्होंने कहा कि इन फैसलों का उद्देश्य मेहनतकश किसानों और जरूरतमंद परिवारों को आर्थिक संबल प्रदान करना है।
इस अवसर पर खंड विकास अधिकारी घुमारवीं अभिषेक शर्मा, पट्टा पंचायत के उपप्रधान रवि ठाकुर, बीडीसी सदस्य कुलदीप सिंह सहित बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित रहे।