अब आपकी लोकेशन तय करेगी McDonald's के बर्गर की कीमत, अमीरों से ज्यादा होगी वसूली!
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →
आज के समय में जंक फूड कौन खाना पसंद नहीं करता है और वहीं बात अगर बर्गर, फ्राइज की हो तो ज्यादातर लोग इसे खाना पसंद करते हैं.
ऐसे में क्या आप भी McDonald's से बर्गर मंगवाते हैं तो अब आने वाले समय में बर्गर की कीमत हर जगह एक जैसी रहे ऐसा जरूरी नहीं है.
क्योंकि अब कंपनी बर्गर की कीमत तय करने के लिए टैक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने की दिशा में काम कर रही है.
दरअसल, अब कंपनी AI और डेटा की मदद से अलग-अलग रेस्टोरेंट के हिसाब से मेन्यू की कीमतें तय की करने के लिए जरूरी कदम उठा रही है. यानी अब हर जगह बर्गर की कीमत एक ही रहे ऐसा जरूरी नहीं है.
कीमत अब लोकेशन और ग्राहक कितने रुपये तक की खरीदारी कर सकते हैं, इसके आधार पर तय की जा सकती है.
AI का मुख्य काम क्या रहेगा?
McDonald's अब इलाके के हिसाब से बर्गर की कीमत तय करने की दिशा में काम कर रहा है, जैसे अगर किसी इलाके में लोग ज्यादा पैसे खर्च करने को तैयार है तो वहां पर बर्गर की कीमत ज्यादा हो सकती है और वहीं अगर किसी इलाके में ग्राहक ज्यादा महंगा बर्गर खरीदने को तैयार नहीं होते हैं तो ऐसे इलाकों में रेट वहां के हिसाब से तय किए जा सकते हैं.
इसके अलावा AI अलग-अलग रेस्टोरेंट का पुराना बिक्री डेटा भी देखेगा और ये भी देखेगा कि वहां पर किस चीज की ज्यादा डिमांड है.
इसलिए दो अलग-अलग इलाकों में बर्गर की कीमत में अंतर देखने को मिल सकता है.
भारत में लागू हो गया है ये सिस्टम?
रॉयटर्स की रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिलहाल ये AI सिस्टम भारत में लागू नहीं हुआ है ये अमेरिका में McDonald's के रेस्टोरेंट में इस्तेमाल किया जा रहा है.
लेकिन अभी तक भारत में इसके लागू होने की कोई बात सामने नहीं आई है.
लाखों ट्रांजैक्शन के डेटा पर नजर
सबसे अहम बात तो यह है कि McDonald's का AI सिस्टम बड़ी संख्या में रेस्टोरेंट्स ट्रांजैक्शन का डेटा देखता है.
इसका मकसद यह है कि इससे पता ये चलेगा कि कौन से
📡 स्रोत: ABP Live Vyapar
💡 पृष्ठभूमि (Background)
मैकडॉनल्ड्स ने जमीनी स्तर पर AI और डेटा एनालिटिक्स का उपयोग कर बर्गर की कीमत तय करने की योजना बनाई है, जिससे कीमतें स्थान, मांग और ग्राहक प्रोफ़ाइल के आधार पर बदल सकती हैं। यह कदम वैश्विक फास्ट‑फूड उद्योग में मूल्य निर्धारण के नए मानदंड स्थापित कर सकता है। ऐसे गतिशील मूल्य निर्धारण से उपभोक्ताओं को अलग‑अलग कीमतें मिल सकती हैं, जिससे कुछ वर्गों के लिए महँगी हो सकती है, जबकि अन्य को सस्ती दर मिल सकती है। यह परिवर्तन उपभोक्ता व्यवहार, प्रतिस्पर्धा और नियामक नीतियों पर गहरा प्रभाव डाल सकता है, और फा