भोपाल

आरटीई फीस प्रतिपूर्ति का इंतजार बरकरार, निजी स्कूलों की आर्थिक मुश्किलें बढ़ीं

लेखक: Santosh Yogi अंतिम अपडेट: 13 अक्टूबर 2026 👁️ 3 बार पढ़ा गया
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति

सत्र 2024-25 की राशि अब तक नहीं मिलने से नाराज स्कूल संचालक, भुगतान नहीं होने पर अगले सप्ताह से बच्चों की पढ़ाई को लेकर पुनर्विचार की चेतावनी

भोपाल। शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश पाने वाले बच्चों की फीस प्रतिपूर्ति की राशि को लेकर संचालकों की चिंता बढ़ती जा रही है। निजी स्कूल संचालकों के अनुसार, सत्र 2024-25 की फीस प्रतिपूर्ति अब तक नहीं मिली है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा 11 अक्टूबर को नरसिंहपुर में सांदीपनि विद्यालय के उद्घाटन समारोह के दौरान दोपहर 12 बजे सिंगल क्लिक के माध्यम से राशि अंतरित किए जाने का कार्यक्रम निर्धारित था, लेकिन राशि का अंतरण नहीं हो सका।

स्कूल संचालकों का कहना है कि फीस प्रतिपूर्ति में लगातार देरी से विद्यालयों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है। स्कूलों के नियमित खर्च, कर्मचारियों के वेतन और अन्य व्यवस्थाओं का संचालन करना मुश्किल होता जा रहा है। उनका कहना है कि आरटीई के तहत प्रवेशित बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी निभाने के लिए समय पर प्रतिपूर्ति मिलना जरूरी है।

भुगतान नहीं हुआ तो पढ़ाई को लेकर पुनर्विचार की चेतावनी

प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि इस सप्ताह फीस प्रतिपूर्ति की राशि जारी नहीं की गई, तो अगले सप्ताह से आरटीई के तहत प्रवेशित बच्चों की पढ़ाई जारी रखने के संबंध में पुनर्विचार किया जा सकता है। एसोसिएशन का कहना है कि लंबे समय तक भुगतान लंबित रहने से स्कूलों के लिए व्यवस्था बनाए रखना लगातार कठिन हो रहा है।

बताया गया है कि फीस प्रतिपूर्ति के लिए राज्य शिक्षा केंद्र की ओर से नरसिंहपुर में आवश्यक तैयारियां भी की गई थीं, लेकिन इसके बावजूद राशि का अंतरण नहीं हो पाया। अब निजी स्कूल संचालक शासन से जल्द भुगतान जारी होने की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

फीस प्रतिपूर्ति में देरी का मुद्दा निजी स्कूलों के साथ-साथ आरटीई के तहत प्रवेशित बच्चों की पढ़ाई से भी जुड़ा है। ऐसे में संचालकों की मांग है कि शासन लंबित राशि जारी करने के संबंध में जल्द निर्णय ले, ताकि विद्यालयों का संचालन प्रभावित न हो और बच्चों की शिक्षा निर्बाध जारी रह सके।

💡 पृष्ठभूमि (Background)

यह खबर निजी स्कूलों की आर्थिक मुश्किलों पर प्रकाश डालती है, जहाँ आरटीई फीस प्रतिपूर्ति का भुगतान अभी तक नहीं हुआ है। यह विषय महत्वपूर्ण है क्योंकि शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत सरकार द्वारा प्रतिपूर्ति न मिलने से स्कूलों की वित्तीय स्थिति बिगड़ रही है, जिससे शिक्षण गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है। आम जनता पर इसका असर यह हो सकता है कि निजी स्कूलों में शिक्षा की लागत बढ़ेगी, जिससे परिवारों को अधिक खर्च उठाना पड़ेगा और कुछ स्कूल बंद भी हो सकते हैं, जिससे छात्रों के लिए विकल्प सीमित हो सकते हैं।

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Santosh Yogi

संतोष योगी भोपाल के वरिष्ठ पत्रकार हैं जो भोपाल जिला एवं आसपास की घटनाओं को प्रमुखता से कवर करते हैं।