आतंकवाद पर नहीं चलेगी दोहरी नीति: UNGA में एस. जयशंकर
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सितंबर 27, नई दिल्ली: संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच से विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने आतंकवाद समेत कई वैश्विक मुद्दों पर भारत का रुख सामने रखा।
एस. जयशंकर ने कहा कि अगर आतंकवाद को किसी देश या सरकार का समर्थन प्राप्त है, तो यह वैश्विक व्यवस्था के लिए सीधी चुनौती है।
उन्होंने विकासशील देशों के सामने मौजूद 4F संकट का भी मुद्दा उठाया। इसमें खाद्यान्न, ईंधन, उर्वरक और वित्त शामिल हैं।
विदेश मंत्री ने कहा कि जारी युद्धों और बढ़ती प्रतिस्पर्धा की सबसे बड़ी कीमत उन देशों को चुकानी पड़ रही है, जो इन टकरावों से दूर हैं।
उन्होंने वाणिज्यिक जहाजों पर हो रहे हमलों पर चिंता जताई और भारतीय समुद्री यात्रियों तथा निर्दोष नागरिकों की मौत को अस्वीकार्य बताया।
एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र में सुधारों की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि मानवता के एक बड़े हिस्से को फैसले लेने की प्रक्रिया से बाहर नहीं रखा जा सकता।
उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आपूर्ति श्रृंखलाओं के हथियार के रूप में इस्तेमाल समेत कई मुद्दों पर भी भारत का पक्ष रखा।
रूस-यूक्रेन युद्ध और खाड़ी तथा पश्चिम एशिया के संकटों का जिक्र करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि रणभूमि से किसी समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल सकता।
उन्होंने कहा कि समस्याओं के समाधान के लिए बातचीत और कूटनीति ही रास्ता है।
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ में सर्जिकल स्ट्राइक का जिक्र करते हुए आतंकवाद के खिलाफ भारत की जीरो टॉलरेंस नीति दोहराई थी।
💡 पृष्ठभूमि (Background)
यह खबर विदेश मंत्री एस. जयशंकर के संयुक्त राष्ट्र महासभा में आतंकवाद पर दोहरी नीति न अपनाने के बयान के बारे में है। वे कहते हैं कि यदि किसी सरकार को आतंकवाद का समर्थन मिलता है तो यह वैश्विक व्यवस्था के लिए सीधी चुनौती है। यह विषय इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत की विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर इसका गहरा असर पड़ता है। जनता के लिए इसका मतलब है कि आतंकवाद के खिलाफ कड़ी कार्रवाई से देश की सुरक्षा बढ़ेगी और वैश्विक शांति में योगदान मिलेगा। इसके अलावा, 4F संकट पर चर्चा से विकासशील देशों के ल