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आतंकी पोर्न वेबसाइट्स पर सीक्रेट चैटिंग कर रहे:पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स इसी पर मैसेज भेजते; एन्क्रिप्टेड ऐप्स के जरिए पहचान छिपाने की कोशिश

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 30 अगस्त 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
आतंकी पोर्न वेबसाइट्स पर सीक्रेट चैटिंग कर रहे:पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स इसी पर मैसेज भेजते; एन्क्रिप्टेड ऐप्स के जरिए पहचान छिपाने की कोशिश

पाकिस्तान में बैठे आतंकी सीक्रेट चैटिंग के लिए अब पोर्न वेबसाइट्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। सुरक्षा अधिकारियों ने रविवार को बताया कि आतंकी संगठन और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI इसका सबसे ज्यादा यूज कर रहे हैंञ आतंकी इसके जरिए जम्मू-कश्मीर में भर्ती किए गए लोगों तक मैसेज पहुंचा रहे हैं।

ताकि पारंपरिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर निगरानी से बचा जा सके। अधिकारियों ने बताया कि इन पोर्नोग्राफी प्लेटफॉर्म पर रियल-टाइम चैट टूल मौजूद होते हैं। जो आसपास डेट (पार्टनर) ढूंढने में मदद करने के नाम पर काम करते हैं। लेकिन हैंडलर्स इनका इस्तेमाल आतंकी गतिविधि के लिए कर रहे हैं।

चीन, फ्रांस के ऐप भी आतंकियों के फेवरेट, एजेंसियां जांच कर रहीं सुरक्षा एजेंसियों ने कई खास डिजिटल टूल्स की जांच शुरू की है। आतंकी हैंडलर कोटेक्स और कोनियन जैसे टोर आधारित मैसेजिंग ऐप्स का भी इस्तेमाल कर रहे हैं। ये ऐप्स डेटा को एन्क्रिप्टेड नोड्स के जरिए भेजते हैं और यूजर की पहचान छिपाते हैं।

अधिकारियों के मुताबिक, भारत में कोनियन की एपीके फाइल तक पहुंच पर रोक है। एपीके यानी एंड्रॉयड पैकेज किट वह फाइल फॉर्मेट है, जिसका इस्तेमाल एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम मोबाइल ऐप्स को बांटने और इंस्टॉल करने के लिए करता है।

इसके अलावा, आतंकी फ्रांस बेस्ड ऐसे ऐप का भी इस्तेमाल कर रहे हैं, जिसमें सिम कार्ड या फोन नंबर की जरूरत के बिना एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग की सुविधा है। इससे यूजर की पहचान करना मुश्किल हो जाता है। एजेंसियां वियतनाम आधारित ऐप्स की भी निगरानी कर रही हैं।

इसके साथ ही मूनचैट जैसे गुमनाम प्लेटफॉर्म भी जांच के दायरे में हैं। मूनचैट में पीजीपी-एन्क्रिप्टेड वर्जन शामिल हैं, जिनके चीनी मूल के होने का शक है और इनमें पारंपरिक रजिस्ट्रेशन की जरूरत नहीं होती। मूनचैट के कई वर्जन ऐसे हैं, जिनका इस्तेमाल आसपास मौजूद सिंगल लोगों को खोजने के लिए किया जाता है।

भारत में पोर्न एप्स VPN के जरिए डाउनलोड हो रहे अधिकारियों के मुताबिक, भारत में पोर्नोग्राफी वाले कई ऐप्स पर रोक है। इसके बावजूद इन्हें वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क यानी वीपीएन के जरिए गैरकानूनी तरीके से डाउनलोड किया जा रहा है। वीपीएन इंटरनेट पर एक सुरक्षित और एन्क्रिप्टेड कनेक्शन बनाता है।

यह इंटरनेट प्रोटोकॉल एड्रेस छिपाता है और ऑनलाइन ट्रैफिक को एन्क्रिप्ट करता है, जिस

📡 स्रोत: Dainik Bhaskar

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