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आठ दशक पहले हुए युद्ध के परिणाम संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की संरचना को लगातार प्रभावित कर रहे हैं: भारत

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 23 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
आठ दशक पहले हुए युद्ध के परिणाम संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की संरचना को लगातार प्रभावित कर रहे हैं: भारत

भारत ने कहा है कि आठ दशक पहले हुए युद्ध के परिणाम संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की संरचना को लगातार प्रभावित कर रहे हैं और इससे संयुक्त राष्ट्र की वैधता कम हो रही है। भारत ने परिषद को अधिक प्रतिनिधिपूर्ण और समकालीन वैश्विक वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करने वाला बनाने के लिए सुधारों का आह्वान किया है।

संयुक्त राष्ट्र महासभा को कल संबोधित करते हुए, संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने कहा कि 80 साल से अधिक पहले लड़ा गया कोई भी युद्ध वर्तमान विश्व व्यवस्था को निर्धारित नहीं कर सकता।

श्री हरीश ने युद्ध में भारत के योगदान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि लगभग 25 लाख भारतीयों ने इस संघर्ष में भाग लिया था, जिनमें से लगभग 90 हजार ने सैन्य सेवा में अपने प्राणों की आहुति दी। उन्होंने बंगाल के अकाल का भी जिक्र किया और चालीस लाख से अधिक लोगों की मृत्यु का कारण औपनिवेशिक युद्धकालीन नीतियों को बताया।

भारत ने संयुक्त राष्ट्र में धार्मिक अल्पसंख्यकों के प्रति पाकिस्तान के बर्ताव की कड़ी आलोचना की। 1999 के कारगिल युद्ध का जिक्र करते हुए, भारतीय राजनयिक ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान ने युद्ध में मारे गए अपने सैनिकों के शवों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था।

उन्होंने कहा कि भारतीय सेना ने कई पाकिस्तानी सैनिकों को सैन्य सम्मान के साथ और इस्लामी रीति-रिवाजों के अनुसार दफनाया था। भारत के स्थायी मिशन की प्रथम सचिव भाविका मंगलानंदन ने पाकिस्तान से आग्रह किया कि वह भारतीय केंद्र शासित प्रदेश पर टिप्पणी करने के बजाय अपने कब्जे वाले जम्मू और कश्मीर के क्षेत्रों में हो रहे घटनाक्रमों पर ध्यान केंद्रित करे।

🎙️ वॉयस ऑफ क्रांति का मत

संगठनात्मक बदलाव से ही समाज में स्थिरता आती है। जब हम अपने संस्थानों को समकालीन वास्तविकताओं के अनुरूप ढालते हैं, तो हम सभी के लिए न्याय और समानता का मार्ग प्रशस्त करते हैं। भारत की तरह, हर नागरिक को अपनी आवाज़ उठानी चाहिए—कानूनी मार्ग, संवाद, और सहमति से विवादों का समाधान करके। इस प्रकार हम न केवल अपने अधिकारों की रक्षा करते हैं, बल्कि एक समावेशी और सशक्त समाज की नींव भी रखते हैं।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।