आवास पंचायत में विकास कार्यों में अनियमितता के आरोप, कलेक्टर से उच्चस्तरीय जांच की मांग
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करैरा। ग्राम पंचायत आवास में विभिन्न निर्माण एवं विकास कार्यों तथा शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन में वित्तीय अनियमितता और नियमविरुद्ध लाभ दिए जाने के आरोप लगाए गए हैं। ग्राम आवास निवासी विवेक रायकरवार ने कलेक्टर को शिकायत सौंपकर मामले की उच्चस्तरीय जांच और संबंधित अभिलेखों के भौतिक सत्यापन की मांग की है।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि पंचायत के कुछ विकास कार्यों में अभिलेखों और ऑनलाइन पोर्टल पर भुगतान दर्शाया गया है, जबकि मौके पर कार्य अपेक्षित गुणवत्ता या मात्रा के अनुरूप नहीं दिखाई देते। शिकायत में सीसी रोड, नाली निर्माण, स्ट्रीट लाइट, खेल मैदान, चेकडैम, तालाब, हैंडपंप, कुआं, चौपाल एवं चबूतरा, बाउंड्रीवाल, कूड़ेदान, श्मशान और साफ-सफाई सहित विभिन्न कार्यों की जांच की मांग की गई है।
शिकायतकर्ता ने प्रत्येक कार्य की स्वीकृत राशि और वास्तविक खर्च का मिलान कराने के साथ माप पुस्तिका (एमबी), बिल-वाउचर, सामग्री खरीदी, मजदूरी भुगतान, जियो-टैग फोटो और कार्य पूर्णता प्रमाण-पत्र की जांच कराने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि दस्तावेजों में दर्ज जानकारी और मौके की वास्तविक स्थिति का भौतिक सत्यापन होने पर कथित अनियमितताओं की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।
प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के हितग्राहियों की पात्रता की दोबारा जांच की मांग भी शिकायत में की गई है। आवेदन में ऐसे हितग्राहियों की पात्रता की जांच कराने का आग्रह किया गया है, जिनके नाम पर पूर्व से भूमि दर्ज होने तथा लगभग एक एकड़ अथवा करीब पांच बीघा या उससे अधिक भूमि होने की जानकारी सामने आने का दावा किया गया है। शिकायतकर्ता ने कहा है कि जांच में कोई हितग्राही निर्धारित पात्रता मानदंडों के अनुसार अपात्र पाया जाता है तो संबंधित हितग्राही के साथ लाभ स्वीकृत कराने वाले अधिकारी-कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जाए।
शिकायत में पंचायत की कैशबुक, मस्टर रोल, माप पुस्तिका, बिल-वाउचर और बैंक भुगतान रिकॉर्ड का आपस में मिलान कराने की मांग की गई है। इसके अलावा स्वतंत्र तकनीकी अधिकारी से मौके पर निर्माण कार्यों की माप कराकर उसे माप पुस्तिका में दर्ज विवरण से मिलाने का आग्रह किया गया है। सामग्री खरीदी के बिल और भुगतान रिकॉर्ड की जांच की मांग भी की गई है।
शिकायतकर्ता ने जांच शुरू होने के साथ पंचायत की कैशबुक, मस्टर रोल, माप पुस्तिका, बिल-वाउचर, बैंक भुगतान रिकॉर्ड, जियो-टैग फोटो और पीएमएवाई-जी से जुड़े मूल अभिलेख सुरक्षित रखने की मांग की है, ताकि जांच के दौरान रिकॉर्ड से छेड़छाड़ की आशंका न रहे।
विवेक रायकरवार ने कहा है कि उनका उद्देश्य बिना जांच किसी व्यक्ति पर आरोप लगाना नहीं, बल्कि उपलब्ध जानकारी और धरातलीय स्थिति के आधार पर वित्तीय अनियमितताओं की आशंका की निष्पक्ष जांच कराना है। उन्होंने समयबद्ध जांच का प्रस्ताव देते हुए सात दिन में मूल एवं डिजिटल अभिलेख सुरक्षित करने, 15 दिन में मौके का प्रथम भौतिक निरीक्षण कराने और 30 दिन में प्राथमिक निष्कर्ष की लिखित जानकारी देने की मांग की है।
शिकायतकर्ता ने कहा है कि सीसी रोड, नाली, स्ट्रीट लाइट, चेकडैम, तालाब, कुआं, बाउंड्रीवाल, चबूतरा सहित अन्य विकास कार्यों की गुणवत्ता और वास्तविक मात्रा का स्वतंत्र तकनीकी परीक्षण कराया जाए। साथ ही रिकॉर्ड में दर्ज कार्यों और मौके की स्थिति का मिलान कर यह स्पष्ट किया जाए कि स्वीकृत राशि के अनुरूप काम वास्तव में हुआ है या नहीं।
शिकायत में कहा गया है कि निष्पक्ष जांच से आरोपों की वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी। यदि किसी स्तर पर अनियमितता प्रमाणित होती है तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।