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आवास प्लस सर्वे को लेकर इंदार पंचायत में विवाद, ग्रामीणों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष जांच की मांग की

लेखक: Ranu Parihar अंतिम अपडेट: 11 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति

शिवपुरी। जनपद पंचायत बदरवास की ग्राम पंचायत इंदार में आवास प्लस सर्वे को लेकर चल रहा विवाद अब जिला प्रशासन तक पहुंच गया है। सर्वे के नाम पर सरपंच पति रामसेवक परिहार और रोजगार सहायक अवधेश रघुवंशी पर पैसे लेने के लगाए गए आरोपों को ग्रामीणों ने निराधार बताया है। बुधवार 10 सितंबर को ग्राम पंचायत इंदार के ग्रामीणों ने जिलाधीश के नाम ज्ञापन सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच कराने और एकतरफा कार्रवाई नहीं करने की मांग की।

ग्रामीणों ने ज्ञापन में कहा कि सरपंच पति और रोजगार सहायक ने आवास प्लस सर्वे के नाम पर किसी से कोई राशि नहीं ली है। ग्रामीणों का कहना है कि पूरे मामले में केवल शिकायतकर्ताओं के कथनों के आधार पर कार्रवाई करने के बजाय अन्य ग्रामवासियों के बयान भी लिए जाने चाहिए, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।

ज्ञापन के अनुसार 6 सितंबर को कुछ लोगों ने पंचायत कार्यालय पहुंचकर आरोप लगाया था कि कार्यालय बंद रहता है और आवास सर्वे के लिए उनसे एक हजार रुपए लिए गए, लेकिन उनके नाम आवास प्लस सूची में शामिल नहीं किए गए। ग्रामीणों ने इसके जवाब में कहा कि उक्त दिन रविवार था और सामान्य तौर पर शासकीय कार्यालय बंद रहते हैं। उनका दावा है कि शिकायतकर्ताओं के नाम पात्र हितग्राही होने के कारण सूची में शामिल हैं।

इसके बाद 8 सितंबर को जनसुनवाई में भी सर्वे के नाम पर राशि लिए जाने की शिकायत सामने आई। ग्रामीणों के अनुसार, शिकायतों में कभी एक हजार, कभी दो हजार और शपथ पत्रों में पांच-पांच हजार रुपए लिए जाने की बात कही गई है। ग्रामीणों ने इन बयानों में अंतर का हवाला देते हुए आरोपों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाया है।

ग्रामीणों ने आवास प्लस सर्वे की ऑनलाइन प्रक्रिया का हवाला देते हुए कहा कि इस बार स्वयं के मोबाइल से आवेदन करने का विकल्प उपलब्ध था। उनका तर्क है कि ऐसी व्यवस्था में हितग्राही स्वयं आवेदन कर सकता था, इसलिए दूसरे व्यक्ति को राशि देकर सर्वे कराने की आवश्यकता नहीं थी। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की कि जांच के दौरान इस प्रक्रिया और पात्र हितग्राहियों की सूची को भी आधार बनाया जाए तथा पात्र लोगों के नाम सूची से बाहर न किए जाएं।

ज्ञापन में ग्रामीणों ने पूरे विवाद के पीछे पंचायत चुनाव की संभावित राजनीतिक रंजिश का भी आरोप लगाया है। उनका कहना है कि पंचायत में चल रहे विकास कार्यों में भी बाधा डालने और सरपंच पति तथा रोजगार सहायक की छवि खराब करने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि इन राजनीतिक आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

ग्रामीणों ने विवाद की एक वजह पंचायत द्वारा शासकीय भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को भी बताया है। ज्ञापन में दावा किया गया है कि पंचायत ने करीब 140 बीघा शासकीय भूमि को लगभग 25 से 30 परिवारों के कब्जे से मुक्त कराया और वहां गौशाला निर्माण का कार्य किया। इसके अलावा शासकीय तालाब से अतिक्रमण हटाकर उसके जीर्णोद्धार की कार्रवाई किए जाने का भी उल्लेख किया गया है।

ग्रामीणों ने अलुआ वाले रास्ते पर स्थित तालाब की भूमि, शांति धाम की भूमि सहित अन्य शासकीय जमीनों को भी अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग की है। उनका आरोप है कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई से नाराज लोगों द्वारा अब आवास प्लस सर्वे को लेकर शिकायतें की जा रही हैं। ग्रामीणों का दावा है कि इन शिकायतों के माध्यम से पंचायत पर दबाव बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

ज्ञापन में एक पुराने आपराधिक प्रकरण का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें ग्रामीणों के अनुसार सरपंच पति के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए गए थे और बाद में न्यायालयीन प्रक्रिया में मामला उनके पक्ष में रहा। इस संबंध में ज्ञापन में किए गए दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

ग्रामीणों ने जिलाधीश से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, शिकायतकर्ताओं के साथ अन्य ग्रामवासियों के बयान भी लिए जाएं और आवास प्लस योजना के पात्र हितग्राहियों के हितों को प्रभावित न होने दिया जाए। ज्ञापन के बाद इंदार पंचायत में आवास प्लस सर्वे को लेकर चल रहा विवाद और पंचायत की स्थानीय राजनीति एक बार फिर चर्चा में आ गई है।

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Ranu Parihar

रानू परिहार शिवपुरी के वरिष्ठ पत्रकार हैं, जो लंबे समय से जनसमस्याओं और सामाजिक मुद्दों को अपनी पत्रकारिता के माध्यम से सामने लाते हैं। वे जमीनी स्तर की खबरों और जनसरोकार से जुड़े विषयों को प्रमुखता से उठाते हैं।