आवासीय में कमर्शियल पर कार्रवाई में डबल स्टैंडर्ड:नगर निगम खुद कठघरे में... रहवासी क्षेत्रों में इसके कमर्शियल कॉम्प्लेक्स
जो नगर निगम इन दिनों शहर में मास्टर प्लान और मप्र भूमि विकास नियमों के उल्लंघन का हवाला देकर शहर की करीब 62 हजार कमर्शियल गतिविधियों की जांच कर रहा है, उसके खुद के कमर्शियल कॉम्प्लेक्स आवासीय जमीन, ओपन लैंड और प्राकृतिक नाले पर बने हुए हैं। इनमें से किसी के भी लैंडयूज चेंज व बिल्डिंग परमिशन का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।
शहर में लैंडयूज और बिल्डिंग परमिशन के उल्लंघन को लेकर निगम की लापरवाही व अनदेखी का नतीजा है कि बड़े पैमाने पर रहवासी क्षेत्र में कमर्शियल गतिविधियां चल रही हैं और यह आम लोगों की परेशानी का सबब बन गईं हैं।
निगम की लापरवाही का ही दूसरा उदाहरण यह है कि खुद नगर निगम ने अपने शॉपिंग कॉम्प्लेक्स बनाते समय नियमों के पालन का ध्यान नहीं रखा। मंजूर शॉपिंग सेंटरों को भी नोटिस अधिकृत आवासीय कॉलोनियों और टाउनशिप के स्वीकृत ले-आउट में आबादी की दैनिक जरूरतों के लिए कन्वीनिएंट शॉपिंग का प्रावधान होता है।
कई कॉलोनियों में 3 से 5% जमीन दुकानों और अन्य सुविधाओं के लिए निर्धारित है। इन स्थानों पर व्यापारियों ने कमर्शियल बिल्डिंग परमिशन लेकर और निर्धारित शुल्क जमा कर निर्माण किया है। इसके बावजूद निगम की सर्वे टीम ने कई स्थानों पर स्वीकृत ले-आउट और बिल्डिंग परमिशन की जांच किए बिना नोटिस जारी कर दिए।
शहर में करीब 62 हजार कमर्शियल संस्थानों/दुकानों को नोटिस और सीलिंग की तैयारी माता मंदिर: आवासीय ले-आउट की ओपन लैंड पर बनाया हर्षवर्धन नगर में माता मंदिर के पास करीब 40 साल पहले आवासीय ले-आउट में ओपन लैंड के रूप में दर्ज जमीन पर बहुमंजिला कमर्शियल कॉम्प्लेक्स। यहां कुल 91 दुकानें और ऑफिस चैंबर्स हैं।
दुकानें आवंटित कर दी गईं और ऊपरी हिस्से में 25 साल तक निगम का जोन ऑफिस चलता रहा। यह ऑफिस हाल ही में खाली किया गया है। इस कॉम्प्लेक्स के निर्माण के लिए लैंडयूज चेंज और बिल्डिंग परमिशन नहीं ली गई।
अरेरा कॉलोनी: नाले पर दुकानें जिस अरेरा कॉलोनी से बावड़िया के रहवासी इलाके तक कमर्शियल को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा है, वहीं साढ़े 10 नंबर से 12 नंबर स्टॉप के बीच प्राकृतिक नाले पर स्लैब डालकर 1980 के दशक में 205 दुकानें बनाई। नाले के ऊपर बने इस मार्केट के कारण नाले की सफाई नहीं हो पाती है, दुकानें हैं।
किसी दिन बड़े हादसे की वजह बन सकती हैं। बैरागढ़: रेरा पहुंचा मामला बैरागढ़ में निगम ने पीएचई से मिली जमीन पर दुकानें बना दीं। सीहोर नाके पर एचएफए के मकानों के साथ शॉपिंग कॉम्प्लेक्स का मामला रेरा चला गया है। नीलबड़: मेन रोड पर नगर निगम ने सड़क किनारे दुकानें बनाकर आवंटित कीं। भू-उपयोग आवासीय है।
इसके बावजूद निगम ने खुद कमर्शियल निर्माण कराया। कुल 206 दुकानें। भास्कर एक्सपर्ट - वीपी कुलश्रेष्ठ, सेक्रेटरी जनरल, इंस्टीट्यूट ऑफ टाउन प्लानर्स ऑफ इंडिया अनुमति की परंपरा ही नहीं नगर निगम में किसी भी निर्माण के लिए अनुमति लेने की परंपरा ही नहीं थी। कहीं भी खुली जमीन पर दुकानें और शॉपिंग कॉम्प्लेक्स बना दिए गए।
नियमों में आवासीय क्षेत्रों में डॉक्टर, वकील, चार्टर्ड अकाउंटेंट और आर्किटेक्ट, प्राइमरी स्कूल, क्रेच, डे-केयर सेंटर तथा डिस्पेंसरी जैसी गतिविधियां शामिल हो सकती हैं। निगम के सर्वे में इन गतिविधियों का वर्गीकरण नहीं किया गया। इससे पूरी कार्रवाई सवालों के घेरे में आ गई है।
इन कॉम्प्लेक्स की पड़ताल करा रहे हैं, इन्हें नियमित कराएंगे पुराने समय में शहर की जरूरत के अनुसार हुए इन निर्माण में प्रक्रिया का पालन हुआ या नहीं, हम इसकी पड़ताल करा रहे हैं। इन्हें नियमित कराया जाएगा। इसी तरह जो कमर्शियल कॉम्प्लेक्स नियमानुसार बने हैं, उन पर हम कोई कार्रवाई नहीं करेंगे।
जिनको नोटिस दिए गए हैं, वे दस्तावेज के साथ जवाब दे दें तो नोटिस निरस्त कर दिए जाएंगे। - संस्कृति जैन, कमिश्नर, नगर निगम
📡 स्रोत: NewsData.io