आवासीय में कारोबार:नियमितीकरण नीति बनने तक सीलिंग रोकने की मांग; प्रशासन बोला- कोर्ट के निर्देशों का पालन जरूरी
रहवासी भूखंडों पर व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर प्रशासन और व्यापारी आमने-सामने हैं। व्यापारी मिक्स्ड लैंड यूज और नियमितीकरण की नीति बनने तक कार्रवाई रोकने की मांग कर रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि टैक्स या फीस जमा करने से लैंड यूज का उल्लंघन वैध नहीं होता।
नगर निगम कमिश्नर संस्कृति जैन के मुताबिक, रहवासी लैंडयूज के कमर्शियल उपयोग पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार कार्रवाई हो रही है। इसे रोकना संभव नहीं है। व्यापारी VS प्रशासन व्यापारियों ने रखे 8 तर्क, प्रशासन ने नियम-कानून का हवाला देकर दिए जवाब टैक्स और अनुमति 1. व्यापारी : कारोबार अवैध कैसे?
नगर निगम ने वर्षों कमर्शियल टैक्स-ट्रेड लाइसेंस फीस, बिजली कंपनी ने कमर्शियल बिजली बिल लिया, फिर कारोबार अवैध कैसे? प्रशासन: इससे लैंड यूज वैध नहीं होता कमर्शियल टैक्स, ट्रेड लाइसेंस या बिजली कनेक्शन से लैंड यूज परिवर्तन या अवैध निर्माण को कानूनी मान्यता नहीं मिलती। 2.
व्यापारी : अनुमति देने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय हो इन अनुमतियों में शामिल अधिकारियों की जवाबदेही तय कर कार्रवाई क्यों नहीं की गई? प्रशासन : हर अनुमति का कानून अलग बिजली कनेक्शन, संपत्तिकर और ट्रेड लाइसेंस अलग व्यवस्थाएं हैं। ये टीएंडसीपी के लैंड यूज परिवर्तन या निगम की संशोधित भवन अनुमति का विकल्प नहीं हैं।
नियमितीकरण 3. व्यापारी : गुजरात मॉडल लाएं गुजरात की 2022 की नीति की तरह इम्पैक्ट फीस, पेनल्टी या कंपाउंडिंग चार्ज लेकर मौजूदा निर्माण और कारोबार नियमित किए जाएं। प्रशासन : नई नीति तक यही नियम सरकार नई नियमितीकरण नीति बनाती है तो उसके अनुसार निर्णय होगा। तब तक निगम मौजूदा कानून-नियमों के तहत कार्रवाई करेगा। 4.
व्यापारी : वर्षों पुराने कारोबार समेटने के लिए पर्याप्त समय दें वर्षों पुराने कारोबार समेटने या वैकल्पिक जगह खोजने के लिए नोटिस की अवधि कम है। फैसले तक राहत या पर्याप्त समय मिले। प्रशासन : पक्ष रखने का मौका दिया कार्रवाई से पहले दस्तावेज और पक्ष रखने का मौका दिया।
चेतावनी के बाद अंतिम नोटिस जारी किया, इसके बाद ही सीलिंग हो रही है। लैंड यूज 5. व्यापारी : मिक्स्ड लैंड यूज लागू हो दिल्ली व अन्य बड़े शहरों की तरह 60 या 80 फीट से अधिक चौड़ी सड़कों के किनारे भूखंडों के ग्राउंड फ्लोर पर कारोबार की अनुमति मिले।
प्रशासन : ये निगम के अधिकार में नहीं आवासीय भूखंड का लैंड यूज बदलने का अधिकार निगम के पास नहीं। वह व्यावसायिक गतिविधि की अनुमति नहीं दे सकता। 6. व्यापारी : पहले मिक्स्ड लैंड यूज-नियमितीकरण का समाधान, फिर सीलिंग सरकार पहले मिक्स्ड लैंड यूज, नियमितीकरण और वैकल्पिक कमर्शियल स्पेस पर फैसला करे।
तब तक प्रतिष्ठानों की सीलिंग रोकी जाए। प्रशासन : कोर्ट के आदेश सर्वोपरि सुप्रीम और हाईकोर्ट के निर्देशों की अनदेखी कर कार्रवाई नहीं रोकी जा सकती। नई नीति तक मौजूदा कानून-नियमों के अनुसार कार्रवाई होगी। मास्टर प्लान और असर 7.
व्यापारी : रोजगार प्रभावित होंगे कार्रवाई के दायरे में 60 हजार से अधिक प्रतिष्ठान आने का दावा है। पूंजी और लाखों कर्मचारियों की आजीविका प्रभावित होगी। प्रशासन : रहवासियों के अधिकार जरूरी कारोबार से कॉलोनियों का स्वरूप बदल रहा है। रहवासियों की शांति, सुरक्षा, पार्किंग और सुविधाओं पर असर रोकना हमारी जिम्मेदारी है। 8.
व्यापारी : मास्टर प्लान क्यों नहीं भोपाल में 2005 के बाद नया मास्टर प्लान लागू नहीं हुआ। आबादी बढ़ी, लेकिन कमर्शियल स्पेस नहीं बढ़ा। इसलिए दुकानें खुलीं। प्रशासन : देरी से उल्लंघन वैध नहीं होता नया मास्टर प्लान नहीं आने से आवासीय भूमि व्यावसायिक नहीं हो जाती।
मौजूदा मास्टर प्लान, भवन अनुमति और भूमि विकास नियमों का पालन जरूरी है।
📡 स्रोत: NewsData.io