अभिव्यक्ति गरबा महोत्सव का तीसरा दिन आज:फिल्मी और पारंपरिक गीतों पर थिरकेंगे प्रतिभागी, फूड स्टॉल भी रहेंगे आकर्षण
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →भेल दशहरा मैदान में चल रहे पांच दिवसीय अभिव्यक्ति गरबा महोत्सव-2026 का तीसरा दिन गुरुवार को उत्साह और रंग-बिरंगे अंदाज के बीच मनाया जाएगा। मंगलवार को गणेशजी की आरती के साथ शुरू हुए महोत्सव के पहले दिन बड़ी संख्या में प्रतिभागी पहुंचे थे। फिल्मी और पारंपरिक गीतों पर गरबा देर रात तक चला।
गरबा सर्कल में जगह नहीं मिलने पर कुछ प्रतिभागी बाहर भी थिरकते नजर आए। प्रतिभागियों के उत्साह और भीड़ के बीच आयोजन स्थल पर पारंपरिक नृत्य के साथ अलग-अलग थीम की ड्रेस भी आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। खास थीम और पारंपरिक परिधानों का आकर्षण महोत्सव में प्रतिभागी केवल पारंपरिक गुजराती परिधानों में ही नहीं, बल्कि अलग-अलग थीम के जरिए भी अपनी पहचान बना रहे हैं।
पहले दिन 25 किलो की काठियावाड़ी ड्रेस पहनकर पहुंची युवती चर्चा में रही। वहीं, पीकॉक, अर्धनारीश्वरी, श्रीनाथजी और शिव परिवार जैसी थीम में सजे प्रतिभागियों ने भी ध्यान खींचा। पुष्पा के गेटअप और तिरंगा लेकर पहुंचे पूर्व सैनिक ने भी आयोजन में अलग रंग जोड़ा। तीसरे दिन भी प्रतिभागियों के खास परिधानों और रचनात्मक थीम पर नजर रहेगी।
110 फीट के सर्कल में गरबा और डांडिया लगातार बढ़ रही भागीदारी को देखते हुए इस बार गरबा सर्कल का आकार 100 फीट से बढ़ाकर 110 फीट किया गया है। महोत्सव से पहले हुई ग्राउंड रिहर्सल में 4000 से ज्यादा प्रतिभागियों ने गरबा, डांडिया और तीन ताली का अभ्यास किया था। आयोजन के दौरान प्रतिभागी मास्टर्स की काउंटिंग और गीतों की लय के साथ सामूहिक नृत्य करते नजर आ रहे हैं।
फिल्मी गीतों के साथ पारंपरिक गरबा गीतों पर भी उत्साह देखने को मिल रहा है। गरबा के साथ खान-पान के स्टॉल भी आकर्षण भेल दशहरा मैदान में गरबा के साथ खाने-पीने के शौकीनों के लिए भी कई विकल्प मौजूद हैं। पहले दिन मथुरा, वृंदावन, बनारस, मुंबई, आगरा और दिल्ली के व्यंजनों के स्टॉल लगाए गए थे।
गोरखपुर के प्रसिद्ध पान का स्टॉल भी आकर्षण रहा। गरबा के बीच प्रतिभागी और दर्शक खान-पान के स्टॉल पर भी पहुंच रहे हैं। इस तरह आयोजन में नृत्य के साथ अलग-अलग शहरों के स्वाद का संगम भी देखने को मिल रहा है। गरबा के जरिए सामाजिक संदेश भी अभिव्यक्ति गरबा महोत्सव में प्रतिभागी अपनी ड्रेस और थीम के माध्यम से सामाजिक संदेश भी दे रहे हैं।
पहले दिन बेजुबान जानवरों पर अत्याचार बंद करने का संदेश देने वाली प्रस्तुति देखने को मिली। पारंपरिक नृत्य और उत्सव के बीच ऐसे संदेश आयोजन को सामाजिक सरोकारों से भी जोड़ रहे हैं। पांच दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव में आने वाले दिनों में भी प्रतिभागियों के अलग-अलग अंदाज आकर्षण का केंद्र बने रहेंगे।
📡 स्रोत: NewsData.io