“अगले बरस तू जल्दी आ…” जयकारों से गूंजा शाजापुर, 80 से अधिक गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन
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“गणपति बप्पा मोरया… अगले बरस तू जल्दी आ” के जयकारों से शाजापुर गूंज उठा। अनंत चतुर्दशी के अवसर पर गणपति बप्पा की विदाई का सिलसिला पूरे भक्तिभाव और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। शाजापुर में 80 से अधिक पंडालों और घरों में स्थापित गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया। पूजा-अर्चना और आरती के बाद श्रद्धालु ढोल-ताशों और पारंपरिक संगीत के साथ गणेश प्रतिमाओं को लेकर विसर्जन स्थलों की ओर रवाना हुए।
विसर्जन शोभायात्राओं में श्रद्धालु भक्ति गीत गाते और नाचते हुए नजर आए। जगह-जगह गुलाल उड़ाया गया और गणपति बप्पा के जयकारों से माहौल भक्तिमय बना रहा। गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए प्रशासन की ओर से निर्धारित स्थलों पर आवश्यक व्यवस्थाएं की गई थीं। शाजापुर अनुभाग में थाना लालघाटी क्षेत्र के अंतर्गत जादमी-भदोनी लखुंदर नदी, लोंदिया नाला ग्राम, भेरू डूंगरी और राघवेल जोड़-दुपाड़ा रोड लखुंदर नदी स्थल सहित थाना कोतवाली क्षेत्र के तालाब डेरा को विसर्जन के लिए निर्धारित किया गया था।
श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुचारू विसर्जन को लेकर पुलिस-प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था भी की गई।
बाइट - प्रियंका शुक्ला, एसपी, शाजापुर
🎙️ वॉयस ऑफ क्रांति का मत
गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन से हमें यह सीख मिलती है कि भक्ति के साथ-साथ पर्यावरणीय जिम्मेदारी भी अनिवार्य है। जब हम पवित्र वस्तुओं को जलाते हैं, तो जलवायु पर असर पड़ता है। इसलिए, परंपरा के साथ-साथ हरित विकल्प अपनाएँ—जैसे जैविक अवशेषों का उपयोग, जल संरक्षण के उपाय, और पुनर्नवीनीकरण सामग्री से बनी प्रतिमाएँ। इस प्रकार हम आध्यात्मिकता और प्रकृति के प्रति सम्मान दोनों को एक साथ निभा सकते हैं।