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अगर तुमने...ब्रिक्स से लौटते ही जिनपिंग ने ट्रंप को क्या धमकी दे डाली?

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 23 सितंबर 2026 👁️ 1 बार पढ़ा गया
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
अगर तुमने...ब्रिक्स से लौटते ही जिनपिंग ने ट्रंप को क्या धमकी दे डाली?

चीन ने अमेरिका को ताइवान के मुद्दे पर यह वार्निंग दी है जिसमें चीन ने कहा कि अगर अमेरिका ने ताइवान को नए हथियारों की बिक्री की मंजूरी दी तो इसी महीने होने वाले संभावित ट्रंप जिंनपिंग समिट को रद्द किया जा सकता है। यानी जिस मुलाकात को दुनिया के दो सबसे ताकतवर नेताओं के बीच तनाव कम करने की कोशिश माना जा रहा था, उसी मुलाकात पर अब ताइवान का ब्रेक लगने का खतरा पैदा हो गया है। और सवाल यह है कि ब्रिक्स के मंच पर जिनपिंग ने भारत के साथ रिश्ते सुधारने का संदेश दिया। लेकिन दिल्ली से निकलते ही अमेरिका को इतनी बड़ी चेतावनी क्यों?

क्या ताइवान चीन की वो लाल रेखा है जिस पर बीजिंग अमेरिका से भी सीधी टक्कर लेने को तैयार है और क्या ट्रंप इस बार भी चीन के दबाव के आगे झुकेंगे? इसे भी पढ़ें: जाते-जाते भारत में बड़ा धमाका कर गए जिनपिंग, पूरी दुनिया हैरान!

चीन ने अमेरिका को क्या चेतावनी दी। रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका ताइवान को नए हथियार देने पर विचार कर रहा है। यही बात चीन को नागवार गुजर रही है। बीजिंग ने वाशिंगटन को संकेत दिया है कि अगर अमेरिका ने ताइवान को नए हथियारों की बिक्री को मंजूरी दी तो इस महीने प्रस्तावित ट्रंप जिंपिंग शिखर बैठक रद्द हो सकती है। यानी चीन ने सीधे तौर पर ताइवान को हथियार देने के मुद्दे पर आगामी अमेरिकी चीनी शिखर बैठक से जोड़ दिया है और यहीं से इस पूरे घटनाक्रम की सबसे बड़ी खबर शुरू होती है। अब यह जानिए कि चीन के लिए ताइवान इतना अहम क्यों है?

यह समझना भी जरूरी है कि आखिर चीन के मामले में ताइवान की बड़ी भूमिका क्यों हो जाती है और चीन क्यों आक्रामक हो जाता है। इसे भी पढ़ें: BRICS Summit को सफल बनाने के लिए PM Modi ने सदस्य देशों के नेताओं का जताया आभार बीजिंग ताइवान को अपने क्षेत्र का हिस्सा मानता है और एकीकरण को अपना दीर्घकालिक राष्ट्रीय लक्ष्य बताता है।

चीन लगातार अमेरिका से कहता रहा है कि ताइवान के साथ सैन्य सहयोग और हथियारों की बिक्री उसकी संप्रभुता के मामले में बाहरी दखल है। चीन के विदेश मंत्रालय ने भी बार-बार कहा है कि अमेरिका को ताइवान को हथियारों की किसी भी सप्लाई को रोकना चाहिए और वन चाइना प्रिंसिपल का पालन करना चाहिए। यानी बीजिंग की नजर में ताइवान सिर्फ कोई सामान्य हथियार सौदे का मुद्दा नहीं है।

यह चीन की सबसे संवेदनशील सुरक्षा और संप्रभुता से जुड़ी लाल रेखा है। इसे भी पढ़ें: BRICS में PM Modi की वैश्विक चुनौतियों पर चेतावनी, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रमुख समाचार मई 2026 में जब ट्रंप और जिमपिंग की बीजिंग में हाई लेवल बैठक हुई थी। तब भी ताइवान सबसे संवेदनशील मुद्दों में शामिल था।

चीनी सरकारी मीडिया के मुताबिक जिंनपिंग ने ट्रंप को चेतावनी दी थी कि अगर ताइवान के मुद्दे को गलत तरीके से संभाला गया तो अमेरिका और चीन के बीच टकराव हो सकता है। यानी जिनपिंग का संदेश सिर्फ इतना नहीं था कि हमें हथियारों की बिक्री पसंद नहीं बल्कि संदेश इससे ज्यादा गंभीर था कि ताइवान पर गलत कदम उठाया गया तो चीन अमेरिका संबंध सीधे संघर्ष की तरफ जा सकते हैं।

📡 स्रोत: NewsData.io

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