राजनीति

AI का कमाल, चुनाव में बना प्रशासन का डिजिटल साथी

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 4 नवंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
AI का कमाल, चुनाव में बना प्रशासन का डिजिटल साथी

राजस्थान के दौसा जिले में पंचायत चुनाव के दौरान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI का अनूठा प्रयोग देखने को मिल रहा है। जिला निर्वाचन अधिकारी एवं कलेक्टर सौम्या झा की पहल पर तैयार किया गया AI आधारित 'दौसा बॉट' मतदानकर्मियों के लिए डिजिटल सहायक बनकर उभरा है। व्हाट्सएप के जरिए संचालित इस बॉट पर कर्मचारी निर्वाचन संबंधी नियमों, प्रक्रियाओं, प्रपत्रों और आधिकारिक निर्देशों से जुड़े सवाल पूछकर कुछ ही सेकंड में जवाब प्राप्त कर सकते हैं।

12 अक्टूबर से अब तक 683 अधिकारी-कर्मचारियों ने इसके जरिए 8,643 सवालों के जवाब हासिल किए हैं। नामांकन के दिन 29 अक्टूबर को बॉट ने एक ही दिन में 1,408 सवालों का समाधान किया। खास बात यह है कि रात 10 बजे से सुबह 6 बजे के बीच भी 10 प्रतिशत सवालों के जवाब दिए गए। यहां तक कि रात 3 बजे भी यह डिजिटल सहायक सक्रिय रहा।

दूसरे चरण में मिली सफलता के बाद अब तीसरे चरण के मतदान में भी यह मतदानकर्मियों की मदद करेगा।

दौसा, 4 नवंबर। चुनाव में अब मतदानकर्मियों को किसी नियम की जानकारी चाहिए तो न ट्रेनिंग की फाइलें पलटने की जरूरत है और न ही अधिकारियों के फोन का इंतजार करना होगा... बस मोबाइल में व्हाट्सएप खोलिए, सवाल पूछिए और कुछ ही सेकंड में नियमों के हवाले के साथ जवाब आपके सामने होगा... राजस्थान के दौसा जिले में पंचायत चुनाव के दौरान AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का ऐसा ही प्रयोग देखने को मिल रहा है...

जिला निर्वाचन अधिकारी एवं कलेक्टर सौम्या झा की पहल पर तैयार किया गया 'दौसा बॉट' मतदानकर्मियों का डिजिटल साथी बन गया है... दूसरे चरण के चुनाव में इसकी सफलता के बाद अब तीसरे चरण में भी यह कर्मचारियों की मदद करेगा... खास बात यह है कि यह डिजिटल साथी रात 3 बजे भी कर्मचारियों के सवालों का जवाब देता रहा...

चुनाव कराना केवल मतदान केंद्रों पर कर्मचारियों की तैनाती और मतदाताओं से मतदान करवाने तक सीमित नहीं होता... इसके पीछे नियमों, प्रक्रियाओं, प्रपत्रों और निर्वाचन आयोग के निर्देशों की एक विस्तृत व्यवस्था होती है... मतदान से पहले कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जाता है, लेकिन चुनाव के दिन कई बार ऐसी परिस्थितियां सामने आती हैं, जब किसी नियम या प्रक्रिया को लेकर तत्काल जानकारी की जरूरत पड़ जाती है...

कभी किसी प्रपत्र को भरने में उलझन होती है, तो कभी मतदान की किसी प्रक्रिया को लेकर असमंजस... कई बार कर्मचारियों को अधिकारियों से संपर्क करना पड़ता है या प्रशिक्षण के दौरान मिली जानकारी को दोबारा खोजना पड़ता है... चुनावी व्यस्तता के बीच इसमें समय भी लगता है... इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए दौसा जिला निर्वाचन अधिकारी एवं कलेक्टर सौम्या झा ने तकनीक का इस्तेमाल करते हुए एक नई पहल की...

इसका नाम रखा गया 'दौसा बॉट'... यह AI आधारित डिजिटल सहायक है, जिसे निर्वाचन संबंधी नियमों, आदेशों और आधिकारिक जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है...

'दौसा बॉट' की सबसे बड़ी खासियत इसकी आसान पहुंच है... इसे इस्तेमाल करने के लिए किसी अलग मोबाइल एप्लीकेशन को डाउनलोड करने की जरूरत नहीं है... न ही कर्मचारियों को किसी विशेष तकनीकी जानकारी की आवश्यकता है... मोबाइल में व्हाट्सएप खोलकर सामान्य बातचीत की तरह अपना सवाल लिखना है और बॉट कुछ ही पलों में उसका जवाब उपलब्ध करवा देता है...

यानी मतदानकर्मी मतदान प्रक्रिया, निर्वाचन संबंधी नियमों, जरूरी प्रपत्रों और प्रशासनिक निर्देशों से जुड़े सवाल सीधे पूछ सकते हैं... इससे उन्हें बार-बार अधिकारियों से संपर्क करने या प्रशिक्षण सामग्री में जानकारी तलाशने की जरूरत कम हो जाती है... इस डिजिटल सहायक की उपयोगिता का अंदाजा इसके इस्तेमाल के आंकड़ों से लगाया जा सकता है... 12 अक्टूबर से अब तक 683 अधिकारी-कर्मचारी 'दौसा बॉट' का उपयोग कर चुके हैं...

इन कर्मचारियों ने कुल 8 हजार 643 सवाल पूछकर उनके जवाब हासिल किए हैं... यानी औसतन प्रत्येक कर्मचारी ने करीब 13 सवालों के समाधान इस डिजिटल माध्यम से प्राप्त किए... इस नवाचार की उपयोगिता उस समय और अधिक सामने आई, जब चुनावी प्रक्रिया के महत्वपूर्ण दिन भी इसने लगातार सवालों के जवाब दिए... 29 अक्टूबर को नामांकन के दिन 'दौसा बॉट' सबसे ज्यादा सक्रिय रहा...

इस दिन एक ही दिन में 1 हजार 408 सवालों के जवाब दिए गए... इसकी रफ्तार का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पूछे गए आधे सवालों के जवाब महज 35 सेकंड में उपलब्ध हो गए... यानी जिस जानकारी के लिए कर्मचारियों को पहले फोन करना पड़ सकता था या दस्तावेजों में तलाश करनी पड़ सकती थी, वह जानकारी अब उनके मोबाइल पर कुछ ही सेकंड में मिल रही है...

खास बात यह भी है कि चुनावी कामकाज केवल दिन के समय तक सीमित नहीं रहता... कई बार कर्मचारियों को देर रात तक तैयारियां और प्रक्रियाएं पूरी करनी होती हैं... ऐसे में 'दौसा बॉट' ने समय की बाध्यता को भी पीछे छोड़ दिया... आंकड़े बताते हैं कि कुल जवाबों में करीब 10 प्रतिशत जवाब रात 10 बजे से सुबह 6 बजे के बीच दिए गए...

यहां तक कि रात 3 बजे भी कर्मचारी इस डिजिटल सहायक से सवाल पूछते रहे और उन्हें जवाब मिलता रहा... यानी जब सामान्य तौर पर कार्यालय बंद होते हैं और अधिकारियों से संपर्क करना आसान नहीं होता, उस समय भी यह डिजिटल साथी कर्मचारियों के लिए उपलब्ध रहा... इसकी एक और खासियत यह है कि कर्मचारी केवल लिखकर ही नहीं, बल्कि अपनी आवाज के जरिए भी सवाल पूछ सकते हैं...

आंकड़ों के अनुसार कर्मचारियों ने 495 सवाल वॉइस नोट के माध्यम से पूछे... वहीं 'दौसा बॉट' ने 1 हजार 801 प्रपत्र और आधिकारिक पत्र भी उपलब्ध करवाए... इससे स्पष्ट होता है कि इसका उपयोग केवल सामान्य सवालों के जवाब जानने तक सीमित नहीं है, बल्कि निर्वाचन संबंधी जरूरी दस्तावेजों और प्रक्रियाओं की जानकारी प्राप्त करने में भी किया जा रहा है...

दूसरे चरण के चुनाव में 'दौसा बॉट' का इस्तेमाल करने वाले कर्मचारियों के अनुभव भी इस पहल की उपयोगिता को सामने ला रहे हैं... चुनावी ड्यूटी के दौरान कई बार छोटी-छोटी जानकारियों के लिए भी तत्काल मार्गदर्शन की जरूरत होती है... ऐसे में व्हाट्सएप पर उपलब्ध यह सुविधा कर्मचारियों के लिए मददगार साबित हुई...

खासकर उन परिस्थितियों में, जब मतदान प्रक्रिया से जुड़े किसी नियम, प्रपत्र या आदेश को लेकर तत्काल जानकारी चाहिए हो... बॉट के माध्यम से संबंधित जानकारी आसानी से प्राप्त की जा सकती है...

इस नवाचार का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि निर्वाचन संबंधी जानकारी कर्मचारियों तक एक समान माध्यम से पहुंचती है... इससे अलग-अलग स्तर पर जानकारी तलाशने और बार-बार एक ही सवाल पूछे जाने की स्थिति को कम करने में मदद मिल सकती है... जिला निर्वाचन अधिकारी एवं दौसा कलेक्टर सौम्या झा की इस पहल ने चुनावी प्रबंधन में तकनीक के इस्तेमाल की नई संभावनाएं भी दिखाई हैं...

AI का उपयोग अब केवल बड़े संस्थानों या तकनीकी क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि जिला स्तर पर प्रशासनिक कामकाज को आसान बनाने में भी इसकी भूमिका सामने आ रही है... दौसा में तैयार किया गया यह डिजिटल सहायक बताता है कि अगर तकनीक को जरूरत के मुताबिक इस्तेमाल किया जाए तो सरकारी प्रक्रियाओं को अधिक सहज और सुलभ बनाया जा सकता है...

दूसरे चरण में मिले बेहतर उपयोग के बाद अब तीसरे चरण के पंचायत चुनाव में भी 'दौसा बॉट' को कर्मचारियों की सहायता के लिए इस्तेमाल किया जाएगा... प्रशासन का प्रयास है कि मतदानकर्मियों को जरूरी जानकारी समय पर मिले और चुनावी प्रक्रिया के दौरान आने वाली व्यावहारिक समस्याओं का समाधान आसानी से हो सके...

कुल मिलाकर दौसा का 'दौसा बॉट' चुनावी व्यवस्था में AI के व्यावहारिक इस्तेमाल का उदाहरण बनकर सामने आया है... 683 कर्मचारियों के 8 हजार 643 सवालों के जवाब, रात 3 बजे तक उपलब्धता और हजारों प्रपत्रों की आसान पहुंच... ये आंकड़े बताते हैं कि तकनीक किस तरह प्रशासनिक कामकाज को सरल बनाने में मददगार हो सकती है...

अब देखना होगा कि तीसरे चरण के चुनाव में यह डिजिटल साथी किस तरह मतदानकर्मियों की मदद करता है...

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।