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AI से खोजी जाएंगी बिहार की खेल प्रतिभाएं

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 1 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
AI से खोजी जाएंगी बिहार की खेल प्रतिभाएं

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AI से खोजी जाएंगी बिहार की खेल प्रतिभाएं

BSSA और IIT मद्रास में समझौता हुआ। ‘मशाल’ कार्यक्रम के आंकड़ों का AI व खेल विज्ञान से विश्लेषण कर प्रतिभाओं की पहचान और प्रदर्शन का वैज्ञानिक आकलन होगा।

01 अक्टूबर , पटना ( पटना , बिहार) : बिहार में खेल प्रतिभाओं की पहचान और खिलाड़ियों के प्रदर्शन का वैज्ञानिक आकलन करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है। बिहार राज्य खेल प्राधिकरण (BSSA) और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (IIT मद्रास) के बीच बुधवार को समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर हुआ। इसके तहत कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), खेल विज्ञान और उन्नत डेटा विश्लेषण तकनीक का उपयोग कर राज्य की खेल प्रतिभाओं की पहचान तथा खिलाड़ियों के प्रदर्शन का वैज्ञानिक मूल्यांकन किया जाएगा।

बिहार राज्य खेल प्राधिकरण के महानिदेशक-सह-मुख्य कार्यकारी अधिकारी रवीन्द्रण शंकरण ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य खेल प्रतिभाओं की पहचान को आंकड़ों और वैज्ञानिक विश्लेषण से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि ‘मशाल’ कार्यक्रम के तहत राज्यभर के स्कूली बच्चों से जुटाए गए आंकड़ों का उपयोग बिहार के लिए वैज्ञानिक खेल मानक तैयार करने में किया जाएगा।

‘मशाल’ कार्यक्रम में बच्चों की लंबाई, वजन, दौड़, कूद और फेंक समेत सात शारीरिक एवं प्रदर्शन संबंधी मापदंडों का डेटा जुटाया गया है। IIT मद्रास इन आंकड़ों का उन्नत सांख्यिकी और AI की सहायता से विश्लेषण करेगा। इसके आधार पर बच्चों के विकास एवं फिटनेस मानक, एथलेटिक क्षमता सूचकांक, जिला स्तर पर प्रतिभा मानचित्र और निर्णय-सहायक डैशबोर्ड विकसित किए जाएंगे। इससे ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में छिपी खेल प्रतिभाओं की पहचान अधिक वैज्ञानिक तरीके से करने में मदद मिलेगी।

समझौते के तहत भारोत्तोलन प्रशिक्षण केंद्र में AI आधारित सेंसर-रहित गति विश्लेषण प्रणाली भी विकसित की जाएगी। कैमरों की मदद से यह प्रणाली खिलाड़ी के शरीर पर सेंसर लगाए बिना उसकी तकनीक, संतुलन और भार उठाने की दिशा का विश्लेषण करेगी। इससे प्रशिक्षकों को खिलाड़ी के प्रदर्शन का अधिक वस्तुनिष्ठ आकलन प्राप्त होगा और प्रशिक्षण को आवश्यकतानुसार बेहतर ढंग से तैयार करने में सहायता मिलेगी।

BSSA के अनुसार, शुरुआती स्तर पर विकसित इस मॉडल को आगे चलकर भारोत्तोलन के अलावा अन्य खेलों में भी लागू किया जा सकता है। जिला स्तर पर उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर प्रशिक्षण केंद्रों, प्रशिक्षकों और खेल संसाधनों की जरूरत का आकलन करने में भी मदद मिलेगी।

प्राधिकरण के मुताबिक, बच्चों की पहचान-रहित जानकारी का उपयोग किया जाएगा और डेटा प्रबंधन में जिम्मेदार एवं सुरक्षित AI के सिद्धांतों का पालन किया जाएगा। विकसित डेटा, डैशबोर्ड, AI मॉडल और उपकरण BSSA की संपत्ति रहेंगे।

रवीन्द्रण शंकरण ने कहा कि ‘मशाल’ कार्यक्रम के माध्यम से जुटाए गए आंकड़ों को IIT मद्रास की AI और खेल विज्ञान विशेषज्ञता से जोड़कर वैज्ञानिक प्रतिभा पहचान तथा बेहतर प्रशिक्षण की दिशा में उपयोग किया जाएगा। उनका लक्ष्य राज्य के गांवों और दूरदराज के क्षेत्रों में मौजूद प्रतिभाओं को पहचानकर उन्हें आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराना है।

IIT मद्रास के प्रो. महेश वी. पंचाग्नुला ने कहा कि ‘मशाल’ कार्यक्रम से प्राप्त व्यापक डेटा और IIT मद्रास की AI एवं खेल विज्ञान विशेषज्ञता के समन्वय से ऐसा मॉडल विकसित किया जा सकता है, जिसे देश के अन्य हिस्सों में भी अपनाया जा सके।

समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर के दौरान BSSA के महानिदेशक-सह-मुख्य कार्यकारी अधिकारी रवीन्द्रण शंकरण, IIT मद्रास के प्रो. मनु संथानम, डीन (IC & SR), बाबजी श्रीनिवासन, प्रोफेसर एवं को-हेड, CESSA, डॉ. महेश वी. पंचाग्नुला, प्रोफेसर एवं एसोसिएट फैकल्टी इंचार्ज, IIT मद्रास इनक्यूबेशन सेल तथा BSSA के उप निदेशक हिमांशु सिंह मौजूद रहे।

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Caption : BSSA और IIT मद्रास में समझौता हुआ। ‘मशाल’ कार्यक्रम के आंकड़ों का AI व खेल विज्ञान से विश्लेषण कर प्रतिभाओं की पहचान और प्रदर्शन का वैज्ञानिक आकलन होगा।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।