विदेश

AIR Show-विश्वनाथ मंदिर के सामने सेना के हेलीकॉप्टर का टच-एंड-गो:एयर शो के पहले परखी जा रही व्यवस्था, 22, 24 और 25 अक्टूबर को है नमो घाट पर प्रस्तावित

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 17 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
AIR Show-विश्वनाथ मंदिर के सामने सेना के हेलीकॉप्टर का टच-एंड-गो:एयर शो के पहले परखी जा रही व्यवस्था, 22, 24 और 25 अक्टूबर को है नमो घाट पर प्रस्तावित

वाराणसी में आजमाई 22, 24 और 25 अक्टूबर को सेना का भव्य एयर शो होना है। इसके पहले वाराणसी में लगातार एयर फोर्स अपनी व्यवस्थाओं को परख रही है। इसी क्रम में वाराणसी के विश्वनाथ धाम के सामने गंगा में टच एंड गो सेना के चिनूक हेलीकॉप्टर ने किया है। दोपहर बाद यह हेलीकॉप्टर काशी विश्वनाथ धाम परिक्षेत्र में उड़ान भरता नजर आया और गंगा की तरफ उतरना शुरू किया और गंगा के करीब आकर दो मिनट बाद वापस आकाश की ऊंचाइयों में पहुंच गया।

विश्वनाथ धाम के सामने सेना का चिनूक पहुंचा वाराणसी में होने वाले एयर शो की तैयारियां 84 घाटों और गंगा के उसपार 10 घाटों पर चल रही है। सभी जगह बैरिकेडिंग की जा रही है। तीन दिन पहले जहां रविदास घाट पर सेना के हेलीकॉप्टर ने व्यवस्थाएं परखीं थीं और सील कमांडों गंगा की धारा में हेलीकॉप्टर से क्रूज पर उतरे थे।

वहीं शुक्रवार की दोपहर बाद सेना का हेलीकॉप्टर विश्वनाथ धाम परिक्षेत्र में पहुंचा और हवा में कई चक्कर लगाया। यहां सेना का चिनूक हेलीकॉप्टर पहुंचा था। गंगा में नीचे उतरा किया टच एंड गो कुछ ही देर बाद सेना का चिनूक हेलीकॉप्टर गंगा में नीचे उतरा और टच एंड जो का रिहर्सल कर वापस हवा में लौट गया और नज़रों से ओझल हो गया।

सेना अपनी लगातार तैयारियां परख रही है। क्या हैं चिनूक हेलिकॉप्टर्स?

चिनूक हैवी-लिफ्ट, मल्टी-रोल हेलिकॉप्टर्स हैं। इनका इस्तेमाल सेना की टुकड़ियों, तोपखानों, इक्विपमेंट्स और फ्यूल ले जाने और आपदा बचाव कामों में भी होता है। रेगुलर और स्पेशल आर्मी दोनों फोर्सेज चिनूक यूज करती हैं। सेना के ऑपरेशन में इनका इस्तेमाल कई कामों में होता है। इसका नाम अमेरिका के ओरेगॉन और वाशिंगटन स्टेट के चिनूक मूल के लोगों पर पड़ा है।

इसे अमेरिकी कंपनी बोइंग बनाती है। इसका इंजन हनीवेल इंटरनेशनल इंक बनाती है। चिनूक को दुनिया का सबसे तेज मिलिट्री हेलिकॉप्टर माना जाता है, जिसकी मैक्सिमम स्पीड 315 किलोमीटर प्रति घंटे है। शुरुआत में चिनूक को 36 पैसेंजर को कैरी करने के लिए डिजाइन किया गया था, लेकिन वियतनाम युद्ध के दौरान एक ही चिनूक पर 147 लोगों को लाया गया था।

अब चिनूक करीब 50 लोगों और 10 टन यानी करीब 10 हजार किलो तक का वजन कैरी कर सकता है। बोइंग के मुताबिक, भारत अमेरिका समेत चिनूक को दुनिया के 19 से ज्यादा देश इस्तेमाल कर रहे हैं। अमेरिका और ब्रिटेन चिनूक का सबसे ज्यादा इस्तेमाल करने वाले देश हैं।

📡 स्रोत: NewsData.io

📰 पूरी खबर पढ़ें (NewsData.io पर जाएं)
J
JKS News Desk

वॉयस ऑफ क्रांति की संपादकीय टीम आपके लिए भोपाल, मध्यप्रदेश और देश की सटीक और विश्वसनीय समाचार प्रस्तुत करती है।