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Airbus Deal में Namal Rajapaksa गिरफ्तार, अदालत ने 18 सितंबर तक न्यायिक हिरासत में भेजा

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 25 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
Airbus Deal में Namal Rajapaksa गिरफ्तार, अदालत ने 18 सितंबर तक न्यायिक हिरासत में भेजा

कोलंबो, पांच सितंबर श्रीलंका एयरलाइन के लिए एयरबस विमानों की खरीद में कथित भ्रष्टाचार के मामले में देश के पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे के बड़े बेटे नमल राजपक्षे को गिरफ्तार किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, नमल राजपक्षे (40) को शुक्रवार को भ्रष्टाचार या रिश्वतखोरी के आरोपों की जांच करने वाले आयोग (सीआईएबीओसी) के समक्ष पेश होने के लिए कहा गया था। उन्होंने बताया कि आयोग ने पांच घंटे से अधिक समय तक उनसे पूछताछ की, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर मजिस्ट्रेट असंगा एस.

बोदेरागामा के समक्ष पेश किया गया। मजिस्ट्रेट ने उन्हें 18 सितंबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया। विपक्षी दल श्रीलंका पोडुजाना पेरामुना (एसएलपीपी) के नेता नमल राजपक्षे से उनके पिता के राष्ट्रपति पद पर रहने के दौरान श्रीलंका एयरलाइंस के लिए बड़े आकार के एयरबस विमानों की खरीद से जुड़े आरोपों के संबंध में पूछताछ की गई।

आरोप है कि इस सौदे में नमल को आठ लाख अमेरिकी डॉलर का लाभ मिला और ‘कमीशन’ की रकम विभिन्न बैंक खातों में जमा कराई गई। दो साल पहले नेशनल पीपुल्स पावर (एनपीपी) सरकार के सत्ता में आने के बाद से राजपक्षे परिवार के किसी सदस्य को न्यायिक हिरासत में भेजे जाने का यह पहला मामला है। नमल राजपक्षे ने उत्तर-मध्य शहर अनुराधापुरा में 12 सितंबर को सरकार के खिलाफ एक बड़ी जनसभा आयोजित करने की योजना का ऐलान किया था।

उनकी पार्टी ने आरोप लगाया कि उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजना इस जनसभा को विफल करने और सरकार के खिलाफ उनके अभियान को कुचलने की सुनियोजित साजिश है। नमल राजपक्षे के और भी नजदीकी रिश्तेदार विभिन्न अनियमितताओं के आरोपों का सामना कर रहे हैं। हालांकि, उनका कहना है कि उनके खिलाफ की जा रही कार्रवाई राजनीति से प्रेरित है।

📡 स्रोत: NewsData.io

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🎙️ वॉयस ऑफ क्रांति का मत

नमल राजपक्षे की गिरफ्तारी हमें यह सिखाती है कि सत्ता के पथ पर चलने वाले भी कानून के आगे समान हैं। जब भ्रष्टाचार की गहराई से सामना होता है, तो न्यायिक प्रक्रिया ही एकमात्र मार्ग है। समाज को चाहिए कि वह पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा दे, ताकि ऐसे कांडों की पुनरावृत्ति न हो। यह घटना हमें याद दिलाती है कि हर नागरिक का कर्तव्य है कि वह सत्य और न्याय की रक्षा करे, न कि सत्ता के प्रलोभन में खो जाए।

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