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अजा एकादशी व्रत आज:मान्यता: राजा हरिश्चंद्र ने भी किया था भाद्रपद कृष्ण एकादशी का व्रत; घर के मंदिर में कलश स्थापना के बाद करें भगवान विष्णु की पूजा

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 8 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
अजा एकादशी व्रत आज:मान्यता: राजा हरिश्चंद्र ने भी किया था भाद्रपद कृष्ण एकादशी का व्रत; घर के मंदिर में कलश स्थापना के बाद करें भगवान विष्णु की पूजा

आज (सोमवार, 7 सितंबर) भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी है। इसे अजा एकादशी कहते हैं। एकादशी व्रत भगवान विष्णु की कृपा पाने की कामना से किया जाता है। यह व्रत श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के बाद आता है। माना जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने से भक्त की मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में सुख-शांति आती है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं.

मनीष शर्मा के मुताबिक, अजा एकादशी के दिन व्रत रखने वाले भक्त सुबह जल्दी उठकर स्नान करते हैं और भगवान विष्णु की पूजा करते हैं। पूरे दिन नियम और संयम का पालन करते हैं। रात में जागरण करके भगवान विष्णु के मंत्रों का जप किया जाता है। अगले दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान के बाद फिर से भगवान की पूजा करते हैं।

जरूरतमंद लोगों को भोजन कराने के बाद भक्त स्वयं खाना खाते हैं। अजा एकादशी की पूजा घर के पूजा स्थान पर या पूर्व दिशा में किसी साफ जगह पर की जा सकती है। सबसे पहले उस स्थान पर गंगाजल का छिड़काव करें और वहां गेहूं रखें। इसके ऊपर तांबे का लोटा यानी कलश रखें। कलश में साफ पानी भरें। इसके ऊपर अशोक के पत्ते या डंठल वाले पान रखें और फिर नारियल रख दें।

इस तरह कलश की स्थापना करें। इसके बाद कलश के पास भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर रखें। भगवान विष्णु और कलश की विधि-विधान से पूजा करें। पूजा में दीपक जलाएं और भगवान विष्णु को मिठाई, तुलसी के पत्ते, फल, फूल आदि अर्पित करें। पूजा में ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप करें। भगवान के सामने एकादशी व्रत करने का संकल्प लें।

इसके बाद पूरे दिन अन्न का त्याग करें। भूखे रहना संभव न हो, तो एक समय फलाहार करें। दूध और फलों का रस भी पी सकते हैं। दिनभर भगवान विष्णु का ध्यान करें और उनके मंत्रों का जप करें। रात में जागरण करने की परंपरा है। हालांकि, व्रत अपनी शारीरिक क्षमता और स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर ही रखना चाहिए।

अजा एकादशी का व्रत अगले दिन द्वादशी तिथि पर पूजा के बाद पूरा किया जाता है। सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और भगवान विष्णु की पूजा करें। इसके बाद जरूरतमंद लोगों को भोजन कराएं और अपनी श्रद्धा के अनुसार दान करें। दान और भोजन कराने के बाद स्वयं भोजन करके व्रत का पारण किया जाता है। पूजा में स्थापित किए गए कलश को भी अगले दिन हटा लें।

इसके बाद कलश का पानी पूरे घर में छिड़क दें और बचा हुआ पानी तुलसी के पौधे में डाल दें। मान्यता है कि अजा एकादशी पर भगवान विष्णु का व्रत और पूजा करने से व्यक्ति के जाने-अनजाने में किए गए पापों के फल खत्म होते हैं। इस व्रत के प्रभाव से जीवन में सुख-शांति और सफलता आती है। कहा जाता है कि अजा एकादशी की कथा सुनने मात्र से ही यज्ञ के बराबर पुण्य प्राप्त होता है।

अजा एकादशी की एक कथा राजा हरिश्चंद्र से भी जुड़ी हुई है। राजा हरिश्चंद्र ने भी अजा एकादशी का व्रत किया था। व्रत और भगवान विष्णु की पूजा के प्रभाव से उन्हें अपना खोया हुआ राज्य वापस मिल गया था। राजा का मृत पुत्र भी फिर से जीवित हो गया था। इसी वजह से अजा एकादशी को बहुत प्रभावशाली व्रत माना जाता है।

📡 स्रोत: NewsData.io

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