अजाक्स संगठन ने पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप, न्यायालय के आदेशों की अवहेलना का दावा
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भोपाल। मध्यप्रदेश अनुसूचित जाति-जनजाति अधिकारी एवं कर्मचारी संघ (अजाक्स) ने प्रेसवार्ता के माध्यम से पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
संगठन के प्रांताध्यक्ष संतोष वर्मा (आईएएस) ने आरोप लगाया कि न्यायालय के आदेश के बावजूद अजाक्स भवन में बैरिकेडिंग कर संगठन के पदाधिकारियों एवं सदस्यों को प्रवेश से रोका जा रहा है तथा प्रतिवादी पक्ष को पुलिस संरक्षण दिया जा रहा है।
संगठन की ओर से थाना टीटी नगर में दिए गए आवेदन में बताया गया कि व्यवहार वाद क्रमांक आरसीएसए/1414/2025 में न्यायालय द्वारा 3 सितंबर 2026 को आदेश पारित करते हुए मुकेश मौर्य को संगठन के पंजीयन क्रमांक एवं नाम का उपयोग करने, संगठन के कार्य संचालन में हस्तक्षेप करने तथा अजाक्स भवन में अनधिकृत प्रवेश करने से प्रतिबंधित किया गया है।
अजाक्स का आरोप है कि इसके बावजूद पुलिस के सहयोग से अजाक्स भवन के बाहर बैरिकेडिंग लगाकर वादी पक्ष के पदाधिकारियों एवं सदस्यों को कार्यालय में प्रवेश से रोका गया और संगठन के कार्यक्रम में भी व्यवधान उत्पन्न किया गया। संगठन ने पुलिस से न्यायालय के आदेश का पालन कराने तथा बैरिकेडिंग हटाने की मांग की है।
एफआईआर दर्ज करने के न्यायालयीन आदेश का भी हवाला अजाक्स ने 6 सितंबर 2026 को थाना टीटी नगर में दिए एक अन्य आवेदन में आपराधिक प्रकरण क्रमांक UNCR/10566/2025 का उल्लेख किया है।
संगठन के अनुसार न्यायालय ने 1 सितंबर 2026 के आदेश में प्रतिवादी के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 336(3), 338, 340(2), 61(2) एवं 3(5) के तहत एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।
संगठन ने थाना प्रभारी से न्यायालय के निर्देशानुसार दर्ज एफआईआर की प्रति उपलब्ध कराने तथा की गई कार्रवाई से अजाक्स संघ को अवगत कराने की मांग की है। प्रेसवार्ता में संगठन ने कहा कि वह न्यायालय के आदेशों के पालन और संगठन के अधिकारों की रक्षा के लिए हर स्तर पर आवाज उठाएगा।
अजाक्स पदाधिकारियों ने पुलिस प्रशासन से मामले में निष्पक्ष कार्रवाई करने और न्यायालयीन आदेशों का पालन सुनिश्चित कराने की मांग की।