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अजाक्स विवाद गहराया, न्यायालय के आदेश के बाद मुकेश मौर्य समेत अन्य के खिलाफ FIR की मांग

लेखक: Yogi अंतिम अपडेट: 8 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
अजाक्स विवाद गहराया, न्यायालय के आदेश के बाद मुकेश मौर्य समेत अन्य के खिलाफ FIR की मांग

सदस्यता, करीब 30.89 लाख रुपये की कथित वित्तीय अनियमितता और कूटरचित दस्तावेजों के आरोपों को लेकर DGP को ज्ञापन, न्यायालय के आदेश के पालन की मांग

भोपाल। मध्यप्रदेश अनुसूचित जाति जनजाति अधिकारी कर्मचारी संघ (अजाक्स) से जुड़ा विवाद अब पुलिस कार्रवाई की मांग तक पहुंच गया है। अजाक्स के प्रांतीय अध्यक्ष आईएएस संतोष वर्मा के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस महानिदेशक को ज्ञापन सौंपकर न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी, भोपाल के 1 सितंबर 2026 के आदेश का पालन कराने और संबंधित आरोपितों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है।

अजाक्स के अनुसार, न्यायालय ने परिवाद प्रकरण क्रमांक UNCR 10566/2025 में थाना प्रभारी टीटी नगर को प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कर न्यायालय को सूचित करने के निर्देश दिए हैं। संघ का कहना है कि इसी आदेश के अनुपालन में पुलिस मुख्यालय में आवेदन देकर संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 318(4), 338, 336(3), 340(2), 61(2) एवं 3(5) के तहत कार्रवाई की मांग की गई है।

संघ की ओर से लगाए गए आरोपों के मुताबिक मामला केवल संगठनात्मक विवाद तक सीमित नहीं है। इसमें सदस्यता की पात्रता, संघ की राशि के हिसाब, कथित वित्तीय अनियमितताओं और सदस्यता समाप्त होने के बाद संघ के नाम तथा लेटरहेड के कथित इस्तेमाल से जुड़े गंभीर आरोप शामिल हैं।

करीब 30.89 लाख रुपये की राशि को लेकर सवाल

अजाक्स के ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि विभिन्न तिथियों में प्रांतीय कार्यालय से प्राप्त रसीद कट्टों के माध्यम से करीब 17.95 लाख रुपये की राशि संघ के नाम पर सदस्यों से प्राप्त की गई, लेकिन उसे संघ के खाते में जमा नहीं किया गया। इसके अलावा स्थानीय स्तर पर कथित रूप से अनधिकृत रसीद बुक के माध्यम से 12 लाख 94 हजार 290 रुपये प्राप्त करने और उसका हिसाब प्रांतीय कार्यालय को नहीं देने का आरोप भी लगाया गया है।

संघ का कहना है कि जीवन सदस्यता समेत अन्य मदों से प्राप्त राशि के संबंध में भी अपेक्षित लेखा-जोखा प्रस्तुत नहीं किया गया। इन आरोपों को लेकर न्यायालयीन प्रक्रिया के तहत पुलिस जांच की मांग की गई है।

सदस्यता समाप्त होने के बाद दस्तावेजों के इस्तेमाल का आरोप

ज्ञापन के अनुसार, जवाब और राशि का हिसाब प्रस्तुत करने के लिए अवसर दिए जाने के बाद भी अपेक्षित स्पष्टीकरण नहीं मिलने पर 30 जुलाई 2023 को राज्य कार्यकारिणी की बैठक में मुकेश मौर्य की प्राथमिक सदस्यता समाप्त करने का निर्णय लिया गया था।

अजाक्स का आरोप है कि सदस्यता समाप्त होने के बाद संघ के लेटरहेड और अन्य दस्तावेजों का कथित रूप से इस्तेमाल कर रजिस्ट्रार, फर्म्स एवं सोसाइटीज के समक्ष स्वयं को अजाक्स संघ का अध्यक्ष निर्वाचित किए जाने का दावा किया गया।

संघ ने दस्तावेजों में जनरल मीटिंग की तारीखों को लेकर भी सवाल उठाए हैं। ज्ञापन के अनुसार, एक दस्तावेज में 30 जुलाई 2023 को जनरल मीटिंग में अध्यक्ष चुने जाने का उल्लेख है, जबकि बाद में 17 अगस्त 2023 को प्रस्तुत दस्तावेज में बैठक की तारीख 29 जुलाई 2023 बताई गई। अजाक्स ने इन अलग-अलग तारीखों को दस्तावेजों की विश्वसनीयता से जुड़ा गंभीर सवाल बताया है।

रजिस्ट्रार कार्यालय की भूमिका की जांच की मांग

मामले में रजिस्ट्रार, फर्म्स एवं सोसाइटीज तथा असिस्टेंट रजिस्ट्रार की भूमिका की जांच की मांग भी की गई है। अजाक्स का आरोप है कि संबंधित अधिकारियों को संघ की वास्तविक कार्यकारिणी, वर्ष 2023 से 2026 तक निर्वाचित प्रांतीय अध्यक्ष जे. एन. कंसोटिया और मुकेश मौर्य की सदस्यता समाप्त किए जाने की जानकारी थी।

इसके बावजूद कथित दस्तावेजों और अध्यक्ष पद के दावे पर हुई कार्रवाई को लेकर संघ ने सवाल उठाए हैं। अजाक्स ने संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना बाकी है।

अजाक्स भवन में प्रवेश और संगठन के नाम के इस्तेमाल पर रोक का दावा

ज्ञापन में कहा गया है कि न्यायालयीन आदेश के अनुसार मुकेश मौर्य के अजाक्स भवन, भोपाल में प्रवेश पर रोक है। साथ ही संघ के नाम, पंजीयन क्रमांक, लेटरहेड अथवा संगठन के नाम से गतिविधियां संचालित करने पर भी प्रतिबंध का उल्लेख किया गया है।

अजाक्स का कहना है कि न्यायालय द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के बावजूद संगठन के नाम या पंजीयन का इस्तेमाल किया जाता है तो यह न्यायालयीन आदेश की अवहेलना का विषय होगा। संघ ने ऐसे किसी भी मामले में तत्काल वैधानिक कार्रवाई की मांग की है।

निष्पक्ष जांच और अभिलेखों की जांच की मांग

अजाक्स प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस से कथित कूटरचित दस्तावेजों, रसीद पुस्तिकाओं, बैंक खातों, सदस्यता अभिलेखों, रजिस्ट्रार कार्यालय में प्रस्तुत दस्तावेजों और संबंधित शासकीय रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग की है। संघ का कहना है कि पूरे मामले की जांच दस्तावेजी और अभिलेखीय साक्ष्यों के आधार पर की जानी चाहिए, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।

संघ ने पुलिस प्रशासन से न्यायालय के आदेश का शीघ्र पालन करते हुए प्राथमिकी दर्ज करने और निष्पक्ष विवेचना कराने की मांग की है। ज्ञापन में कहा गया है कि कानून के अनुसार कार्रवाई होने से न्यायिक प्रक्रिया में लोगों का विश्वास मजबूत होगा।

DGP को ज्ञापन सौंपने वाले प्रतिनिधिमंडल में अजाक्स प्रांतीय अध्यक्ष आईएएस संतोष वर्मा, कार्यवाहक प्रांतीय अध्यक्ष इंजीनियर एसएल सूर्यवंशी, प्रांतीय महासचिव गौतम पाटिल, प्रांतीय महासचिव राजवीर अग्निहोत्री, प्रांतीय संयुक्त सचिव अशोक वेन, जिलाध्यक्ष विनोद बट्टी सहित अन्य पदाधिकारी शामिल रहे।

💡 पृष्ठभूमि (Background)

अजाक्स विवाद में मध्यप्रदेश के अनुसूचित जाति जनजाति अधिकारी कर्मचारी संघ के प्रांतीय अध्यक्ष संतोष वर्मा के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस महानिदेशक को ज्ञापन सौंपा है, जिसमें 30.89 लाख रुपये की कथित वित्तीय अनियमितता और कूटरचित दस्तावेजों के आरोपों पर न्यायालय के आदेश के पालन की मांग की गई है। यह विषय संघ की आंतरिक गड़बड़ियों और सरकारी निकायों के साथ टकराव को दर्शाता है। खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे सार्वजनिक संसाधनों का दुरुपयोग और प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं। आम जनता पर इसका अ

🎙️ वॉयस ऑफ क्रांति का मत

वित्तीय विवादों में जब भी कागज़ात और आंकड़ों पर संदेह हो, तो कानूनी रास्ते अपनाना सबसे सही विकल्प है। न्यायालय के आदेश का पालन न करने से न केवल संस्था की विश्वसनीयता घटती है, बल्कि समाज में विश्वास भी टूटता है। हमें पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देना चाहिए, ताकि भ्रष्टाचार के किसी भी रूप को निवारण के लिए उचित न्यायिक प्रक्रिया से निपटा जा सके। इस तरह हम एक स्वस्थ, न्यायसंगत समाज का निर्माण कर सकते हैं।

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