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अखबार, डाक टिकट और सिक्कों में सहेजा गांधी का इतिहास

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 30 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
अखबार, डाक टिकट और सिक्कों में सहेजा गांधी का इतिहास

बीकानेर के संग्रहकर्ता किशन सोनी ने दुर्लभ अखबारों, डाक टिकटों और सिक्कों में महात्मा गांधी की स्मृतियों को सहेजा। संग्रह में बापू के जीवन, आंदोलनों और विचारों की झलक।

30 सितम्बर, बीकानेर। गांधी जयंती महज महात्मा गांधी को याद करने का दिन नहीं, बल्कि उनके जीवन, विचारों और स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान को फिर से समझने का अवसर भी है। बीकानेर के संग्रहकर्ता किशन सोनी ने गांधीजी से जुड़ी दुर्लभ ऐतिहासिक सामग्री को वर्षों से सहेजकर रखा है। उनके संग्रह में पुराने अखबारों से लेकर डाक टिकट, सिक्के और स्मृति-चिह्न शामिल हैं, जो बापू की जीवन यात्रा को एक अलग अंदाज में सामने लाते हैं।

किशन सोनी के संग्रह में गांधीजी के जीवनकाल के दौर के कई पुराने अखबार सुरक्षित हैं। विश्वामित्र से लेकर पुराने ‘द हिंदू’ सहित विभिन्न समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरें और संपादकीय आज भी इस संग्रह का हिस्सा हैं। इन अखबारों के जरिए यह समझने का मौका मिलता है कि गांधीजी के जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं और उनके आंदोलनों को उस दौर की पत्रकारिता ने किस तरह प्रस्तुत किया था।

स्वतंत्रता आंदोलन के अलग-अलग पड़ाव, गांधीजी की गतिविधियां और उनके आंदोलनों से जुड़ी खबरें इन पुराने अखबारों में दर्ज हैं। यही वजह है कि यह संग्रह केवल पुराने समाचार पत्रों का संग्रह नहीं, बल्कि उस दौर की घटनाओं को समझने वाला ऐतिहासिक दस्तावेज भी नजर आता है।

किशन सोनी के संग्रह की एक खासियत महात्मा गांधी से जुड़े डाक टिकट भी हैं। भारत में गांधीजी से जुड़े विभिन्न अवसरों पर जारी टिकटों के अलावा दूसरे देशों के डाक टिकट भी उनके संग्रह में शामिल हैं। बांग्लादेश और इंडोनेशिया सहित अलग-अलग देशों में जारी टिकटों में गांधीजी को अलग-अलग रूपों में याद किया गया है।

इन डाक टिकटों में कहीं गांधीजी गीता पढ़ते नजर आते हैं, तो कहीं चरखे के साथ दिखाई देते हैं। कई टिकटों में उनके जीवन और विचारों से जुड़े प्रसंगों को चित्रित किया गया है। इस तरह ये डाक टिकट गांधीजी के व्यक्तित्व और गांधीवादी दर्शन को तस्वीरों के माध्यम से समझने का माध्यम बनते हैं।

संग्रह में गांधीजी से जुड़े पुराने सिक्के और स्मृति-चिह्न भी मौजूद हैं। भारतीय मुद्रा पर गांधीजी की तस्वीर आज आम है, लेकिन सोनी के संग्रह में ऐसे दुर्लभ सिक्के और पदकनुमा स्मृति-चिह्न भी हैं, जिनमें गांधीजी को अलग-अलग गतिविधियों में दर्शाया गया है। कहीं वे गीता पढ़ते दिखाई देते हैं, तो कहीं योग करते हुए और कहीं बा के साथ नजर आते हैं।

किशन सोनी का मानना है कि गांधीजी के बारे में केवल किताबों या मौखिक जानकारी के जरिए जानना पर्याप्त नहीं है। जब कोई व्यक्ति उस दौर का अखबार अपने हाथ में लेकर पढ़ता है या उस समय जारी हुए टिकट और सिक्कों को देखता है, तो इतिहास उसके सामने ज्यादा जीवंत रूप में सामने आता है।

सोनी कहते हैं कि गांधीजी अपने आप में एक बहुत बड़ा खजाना हैं और उनसे जुड़ी ऐतिहासिक वस्तुओं को सहेजकर रखना जरूरी है, ताकि नई पीढ़ी बापू को केवल सुनी-सुनाई बातों से नहीं, बल्कि उस दौर के दस्तावेजों और वास्तविक संग्रह के जरिए जान सके।

गांधी जयंती के मौके पर बीकानेर का यह संग्रह बताता है कि इतिहास सिर्फ किताबों के पन्नों में नहीं होता। कभी वह पुराने अखबार की स्याही में मिलता है, कभी डाक टिकट पर बनी तस्वीर में और कभी किसी पुराने सिक्के पर दर्ज गांधीजी की छवि में। किशन सोनी ने इन दुर्लभ वस्तुओं को सहेजकर बापू की स्मृतियों और इतिहास का एक ऐसा संग्रह तैयार किया है, जो नई पीढ़ी को गांधीजी के जीवन और विचारों से जोड़ने का माध्यम बन सकता है।

बाइट: किशन सोनी, संग्रहकर्ता पीटीसी: मुदिता पोपली, संवाददाता

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।