भोपाल

अखाड़े के करतब पर शहर मुफ्ती के बयान पर मचा बवाल, शहर मुफ़्ती धार्मिक पद की गरिमा रखें या इस्तीफ़ा दें — ओसाफ अली

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 30 अगस्त 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
अखाड़े के करतब पर शहर मुफ्ती के बयान पर मचा बवाल, शहर मुफ़्ती धार्मिक पद की गरिमा रखें या इस्तीफ़ा दें — ओसाफ अली

भोपाल। ऑल इंडिया मुस्लिम त्यौहार कमिटी के जिला अध्यक्ष ओसाफ अली ने शहर मुफ़्ती मुफ़्ती अबुल कलाम साहब के हालिया मीडिया एवं सोशल मीडिया बयानों पर कड़ी आपत्ति जताते हुए उनके इस्तीफ़े की मांग की है। ओसाफ अली ने कहा कि 26 अगस्त के पारंपरिक जुलूस में महिलाओं ने पर्दे में रहकर अखाड़े के पारंपरिक करतब का प्रदर्शन किया था।

इस घटना को लेकर मुफ़्ती अबुल कलाम साहब की ओर से मीडिया और सोशल मीडिया पर जारी बयान में इसे डांस कहकर सवाल उठाए गए हैं। उपलब्ध सोशल मीडिया पोस्टों में भी उनके बयान और इसी घटना का उल्लेख दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि शहर मुफ़्ती का पद समाज को जोड़ने और मार्गदर्शन देने का पद है, सियासी बयानबाज़ी करने का नहीं।

यदि किसी धार्मिक पद पर बैठे व्यक्ति की सार्वजनिक गतिविधियों और बयानों को लेकर समाज में निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हों, तो उन्हें स्वयं स्पष्टीकरण देना चाहिए।

ओसाफ अली ने कहा कि यदि इन बच्चियों ने पर्दे की मर्यादा में रहते हुए अखाड़े के पारंपरिक करतब और आत्मरक्षा से जुड़े हुनर का प्रदर्शन किया था, तो इसे केवल “डांस” कहकर आलोचना करने के बजाय उनकी हौसला-अफ़ज़ाई की जानी चाहिए थी।

समाज की बेटियों को बहादुर बनने, आत्मरक्षा सीखने और अपनी सुरक्षा के लिए सक्षम बनने का संदेश मिलना चाहिए। साथ ही नाच-गाने जैसी गतिविधियों से दूरी रखने की धार्मिक नसीहत भी सकारात्मक और सम्मानजनक तरीके से दी जा सकती थी।

ओसाफ अली ने यह भी कहा कि क़ाज़ियात कैंपस में पूर्व में हुए कार्यक्रमों में ढोल-नगाड़े बजने और राजनीतिक व्यक्ति के जन्मदिन पर केक काटे जाने के वीडियो सोशल मीडिया पर मौजूद बताए जाते हैं।

यदि उन अवसरों पर कोई सार्वजनिक नसीहत या आपत्ति नहीं की गई, तो अब केवल एक धार्मिक जुलूस के अखाड़े के करतब पर सार्वजनिक टिप्पणी किए जाने को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। मुस्लिम त्यौहार कमिटी इन घटनाओं पर समान और निष्पक्ष मापदंड अपनाने की मांग करती है।

ओसाफ अली ने कहा कि हम किसी की धार्मिक हैसियत का अपमान नहीं कर रहे, लेकिन धार्मिक पद की गरिमा और निष्पक्षता पर सवाल उठने पर जवाब मांगना हमारा अधिकार है।

उन्होंने कहा कि ऑल इंडिया मुस्लिम त्यौहार कमिटी शहर मुफ़्ती से स्पष्ट रूप से इस्तीफ़े की मांग करती है और मांग करती है कि इस पद पर समाज में स्वीकार्य, योग्य और निष्पक्ष व्यक्ति को जिम्मेदारी दी जाए। धार्मिक पद को सियासत से अलग रखा जाए और समाज की परंपराओं पर टिप्पणी करने से पहले पूरे तथ्य और संदर्भ को समझा जाए।

“धार्मिक पद समाज को जोड़ने के लिए होता है, समाज में विवाद पैदा करने के लिए नहीं।”

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।