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'अलग नजरिया रखना गुनाह नहीं': सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस भुइयां ने बताया, क्यों जरूरी है लोकतंत्र में खुलकर असहमति?

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 30 अगस्त 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
'अलग नजरिया रखना गुनाह नहीं': सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस भुइयां ने बताया, क्यों जरूरी है लोकतंत्र में खुलकर असहमति?

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने असहमति और अभिव्यक्ति की आजादी को लोकतंत्र की सबसे मजबूत रीढ़ बताया है.

नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी दिल्ली के दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने दो टूक कहा कि सवाल पूछना या व्यवस्था से अलग राय रखना कोई अवज्ञा नहीं, बल्कि नागरिक स्वतंत्रता और संवैधानिक जिम्मेदारी का जरूरी हिस्सा है.

📡 स्रोत: News18 Hindi

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