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अमेरिकी विज्ञापन में ‘मिस्टर सिंह’ पर बवाल, भारतीयों को निशाना बनाने का आरोप

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 10 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
अमेरिकी विज्ञापन में ‘मिस्टर सिंह’ पर बवाल, भारतीयों को निशाना बनाने का आरोप

अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की इमिग्रेशन पॉलिसी को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है.

अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (DHS) के एक नए आव्रजन प्रवर्तन विज्ञापन में भारतीयों के बीच आम उपनाम ‘सिंह’ के इस्तेमाल को लेकर नस्लीय भेदभाव और भारतीयों की प्रोफाइलिंग के आरोप लगे हैं.

यह डिजिटल विज्ञापन ‘ट्रांसफॉर्मर्स’ फिल्म की थीम पर बनाया गया है, जिसमें एक रोबोट सिर पर बंदाना बांधे भूरे रंग के एक व्यक्ति से बात करता दिखाई देता है और उसे ‘मिस्टर सिंह’ कहकर संबोधित किया गया है.

‘मिस्टर सिंह, सड़क से हटो, तुम्हें ड्राइविंग नहीं आती’ अमेरिकी DHS के आधिकारिक एक्स अकाउंट पर पोस्ट किए गए इस विज्ञापन में ‘ट्रांसफॉर्मर्स’ के मुख्य किरदार ऑप्टिमस प्राइम को दिखाया गया है. उसके हाथ पर DHS का पैच लगा है.

विज्ञापन में वह दाढ़ी वाले भूरे रंग के व्यक्ति का सामना करते हुए कहता है, “हमारी सड़कों से हट जाओ, तुम्हें गाड़ी चलाना नहीं आता, मिस्टर सिंह.” pic.twitter.com/JoS1yxZzfJ — Homeland Security (@DHSgov) September 9, 2026

यह विज्ञापन ट्रंप प्रशासन के उस व्यापक अभियान का हिस्सा है, जिसके जरिए अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे लोगों को स्वेच्छा से देश छोड़ने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है.

DHS इस अभियान को “Self-deport or find out” नारे के साथ प्रचारित कर रहा है. AI वीडियो में ट्रक ड्राइवरों का भी जिक्र DHS ने एक छोटा AI से तैयार किया गया वीडियो भी पोस्ट किया.

इसमें ‘ट्रांसफॉर्मर्स’ के खलनायक किरदार मेगाट्रॉन को ‘एलियंस’ की रिहाई के लिए बातचीत करते दिखाया गया है. अमेरिकी प्रशासन विदेशी नागरिकों के लिए ‘एलियंस’ शब्द का इस्तेमाल करता है.

वीडियो में मेगाट्रॉन उन ट्रक ड्राइवरों की रिहाई की मांग करता दिखाई देता है, जिनके नाम हरजिंदर सिंह, राजिंदर कुमार, बेकजान बेशेकीव, अखरोर बोज़ोरोव और जसवीर सिंह बताए गए हैं.

इन लोगों का सड़क हादसों और अन्य अपराधों में शामिल होने का जिक्र किया गया है.

DHS ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, “अगर आप इस देश के प्रति शत्रुतापूर्ण इरादे से आते हैं तो यह जान लें कि हम अपनी रक्षा करेंगे. हम अमेरिकनिज्म की रक्षा करेंगे. हम अपने घर की रक्षा करेंगे.”

‘सिंह’ उपनाम को लेकर क्यों मचा विवाद? ‘सिंह’ उपनाम बड़ी संख्या में हिंदू और सिख समुदाय के लोग इस्तेमाल करते हैं.

अमेरिका के ट्रकिंग क्षेत्र में भी भारतीय मूल के लोगों और सिखों की बड़ी संख्या काम करती है. ऐसे में विज्ञापन में ‘मिस्टर सिंह’ का इस्तेमाल किए जाने को लेकर सवाल उठे हैं.

आलोचकों का कहना है कि विज्ञापन का संदेश केवल अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे लोगों तक सीमित नहीं दिखता, बल्कि इसमें भारतीय मूल के लोगों को व्यापक रूप से निशाना बनाए जाने का संकेत मिलता है.

विज्ञापन में अमेरिका का प्रतिनिधित्व करने के लिए जिस रोबोट को दिखाया गया है, वह भी ‘ट्रांसफॉर्मर्स’ की कहानी में एक एलियन किरदार है. इसी वजह से विज्ञापन को लेकर सोशल मीडिया पर भी सवाल उठाए गए.

हिंदू और सिख संगठनों ने जताया विरोध विज्ञापन में ‘मिस्टर सिंह’ के इस्तेमाल की हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन और सिख कोएलिशन समेत कई संगठनों ने आलोचना की.

हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन ने एक्स पर कहा कि ‘सिंह’ हिंदू हैं, सिख हैं, अमेरिकी हैं और गाड़ी चलाते हैं.

संगठन ने DHS के रवैये को नस्लीय, गैर-अमेरिकी और भारत विरोधी प्रोफाइलिंग/ट्रोलिंग बताया.

फाउंडेशन ने इसे एक संघीय एजेंसी की ओर से भेदभावपूर्ण पोस्ट बताते हुए जांच का स्वागत किया. संगठन ने असिस्टेंट अटॉर्नी जनरल हरमीत के. ढिल्लों और एफबीआई निदेशक काश पटेल को भी टैग किया.

‘25 साल बाद भी सिखों को उनके हुलिए के लिए निशाना बनाया जा रहा’ सिख कोएलिशन ने कहा कि 9/11 के 25 साल बाद भी सिखों को उनके हुलिए के आधार पर निशाना बनाया जा रहा है.

संगठन ने कहा कि अमेरिका में लाखों सिखों का उपनाम सिंह है, जिसका अर्थ ‘शेर’ होता है.

संगठन ने कहा कि सिख अपनी पहचान बताने में अब भी निडर हैं, भले ही उनकी सरकार उन्हें दुश्मन के तौर पर पेश करे. अवैध प्रवासियों के लिए ‘Self-Deport’ अभियान

यह विवाद DHS के CBP Home कार्यक्रम को बढ़ावा देने वाले अभियान के बीच सामने आया है.

यह कार्यक्रम पात्र दस्तावेजविहीन प्रवासियों को अमेरिका छोड़ने की अपनी इच्छा स्वेच्छा से दर्ज कराने की सुविधा देता है.

DHS के अनुसार, जो लोग स्वेच्छा से देश छोड़ने के लिए पंजीकरण कराते हैं, उन्हें यात्रा में सहायता दी जा सकती है. इसके साथ ही उन्हें 2,600 अमेरिकी डॉलर का एग्जिट बोनस भी मिल सकता है.

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📡 स्रोत: NewsData.io

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